प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों को कराई जा रही है नकल

Jameel Khan

Publish: Apr, 11 2017 11:23:00 (IST)

Jaipur, Rajasthan, India
प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों को कराई जा रही है नकल

यहां तक कि प्राथमिक स्तर के छात्रों की प्रगति के लिए महाराष्ट्र द्वारा आयोजित शैक्षणिक प्रगति कसौटी-संकलित मूल्यमापन में भी जमकर नकल कराने का मामला प्रकाश में आया है

मुंबई। मुंबई के समीप भिवंडी में एसएससी एवं एचएससी का प्रश्न पत्र लीक करके नकल कराने की घटनाएं प्रकाश में आती रहती हैं। भिवंडी में अच्छा से अच्छा परीक्षा फल बताने के चक्कर में प्राथमिक स्तर पर ही नकल कराकर बच्चों के
भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। यहां तक कि प्राथमिक स्तर के छात्रों की प्रगति के लिए महाराष्ट्र द्वारा आयोजित शैक्षणिक प्रगति कसौटी-संकलित मूल्यमापन में भी जमकर नकल कराने का मामला प्रकाश में आया है।

बता दें कि राज्य सरकार की ओर से प्राथमिक स्तर के छात्रों की प्रगति जानने के लिए पिछले वर्ष से शैक्षणिक प्रगति कसौटी संकलित मूल्यमापन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें हिंदी एवं गणित की परीक्षा लेकर छात्रों का मूल्यमापन किया जाता है। 60 अंक के प्रश्न पत्र में पांच अंक प्रायोगिक, पांच अंक मौखिक प्रश्न एवं 50 अंक का प्रश्न लिखित रहता है, जिसके लिए प्रथम सत्र में एक परीक्षा होती है और दूसरी परीक्षा द्वितीय सत्र में होती है। सूत्र बताते हैं कि शैक्षणिक प्रगति कसौटी के लिए होने वाले इस मूल्यमापन में प्रथम सत्र की अपेक्षा द्वितीय सत्र में छात्रों का अधिक अंक आना चाहिए।

सरकारी योजनाओं पर फिर रहा पानी
छात्रों की प्रगति बताने एवं उन्हें अधिक अंक दिलाने के चक्कर में यहां के स्कूलों में जमकर नकल कराई जा रही है। हिंदी एवं उर्दू माध्यम के स्कूलों की बात तो दूर इंग्लिश मीडियम के स्कूलों के शिक्षकों द्वारा खुलेआम नकल कराई गई है। छात्रों ने बताया कि उनके स्कूल की मैम ने तो ब्लैकबोर्ड पर ही लिख दिया था। क्लासेज चलाने वाले एक शिक्षक ने बताया कि इंग्लिश मीडियम के कई स्कूलों के गिने चुने बच्चों को तो गणित का प्रश्नपत्र एक दिन पहले ही दे दिया गया था, जिसका जेराक्स शहर के तमाम बच्चे लेकर अपने ट्यूशन के टीचर के पास पहुंच गए थे।

उन्होंने बताया कि शहर के एक-दो स्कूलों में ही नहीं, बल्कि अच्छे-अच्छे स्कूलों में भी नकल कराई गई है। वहीं इस बारे में एक शिक्षक ने बताया कि छात्रों की संख्या के हिसाब से पेपर कम दिया जाता है, जिसका जेराक्स निकालकर अन्य बच्चों को दिया जाता है। जेराक्स की दूकान से भी प्रश्न पत्र लीक कर दिया जाता होगा, जिसके कारण राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद इस योजना पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

बीएमसी ने नहीं की कार्रवाई
इसी तरह आठवीं एवं नौवीं के छात्रों के लिए यहां के बहुत सारे स्कूलों में भारतीय शिक्षण मंडल की ओर से मानक के आधार पर बनाया गया प्रश्न पत्र मंगाया जाता है, लेकिन बीएसएम के प्रश्न पत्र को भी लीक कर दिया जा रहा है। इससे नौवीं की
परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र नकल करने से नहीं चूक रहे हैं। हालांकि पेपर लीक न हो इसके लिए बीएसएम द्वारा सभी स्कूलों में परीक्षा लेने के लिए एक ही समय की समय सारिणी दी जाती है। इसके बावजूद पेपर लीक कर दिया जा रहा है, जिसकी शिकायत बीएसएम से भी की गई है, लेकिन पेपर लीक के मामले में कुछ भी कार्रवाई नहीं की गई। जिस स्कूल के मासूम छात्रों को शुरू से ही नकल कराया जाएगा उनके भविष्य का क्या होगा?

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