सरकार ला रही है नई इक्विटी सेविंग स्कीम, मिलेगी ज्यादा टैक्स छूट

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सरकार ला रही है नई इक्विटी सेविंग स्कीम, मिलेगी ज्यादा टैक्स छूट

टैक्स पेयर्स को राहत देने के लिए सरकार नई इक्विटी सेविंग स्कीम लाने पर विचार कर रही है। नई स्कीम में निवेशकों का रुझान बढ़ाने के लिए अधिक कर लाभ के साथ ही नियमों को भी लचीला बनाया जाएगा।

नई दिल्ली. टैक्स पेयर्स को राहत देने के लिए सरकार नई इक्विटी सेविंग स्कीम लाने पर विचार कर रही है। नई स्कीम में निवेशकों का रुझान बढ़ाने के लिए अधिक कर लाभ के साथ ही नियमों को भी लचीला बनाया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि कुछ वर्षों पहले सरकार ने राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्‍स स्‍कीम लॉन्‍च की थी, जिसके नियम और शर्त पेचीदा होने की वजह से निवेशकों ने इसमें ज्‍यादा दिलचस्‍पी नहीं दिखाई। बाध्य होकर इस वर्ष के बजट में इस स्‍कीम को खत्‍म कर देना पड़ा। इसको देखते हुए आने वाली नई इक्विटी स्कीम के नियम को अधिक सरल व अधिक टैक्स छूट देने वाला बनाया गया है।

2 लाख रुपए तक मिलेगी टैक्स छूट

राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम में टैक्स छूट की सीमा 50 हजार रुपए थी। वहीं, नई इक्विटी सेविंग्स स्कीम में इसकी सीमा 2 लाख रुपए होगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस इक्विटी में निवेश करना और इससे बाहर निकलना बहुत आसान होगा। इस स्कीम में निवेश के लिए डीमैट अकाउंट की अनिवार्यता भी नहीं होगी।

12 लाख वाले भी ले पाएंगे लाभ

नई इक्विटी सेविंग्स स्कीम में सालाना 12 लाख रुपए आय वाले लोग भी निवेश कर पाएंगे। इस इक्विटी सेविंग्स स्कीम में निवेश करने के बाद लॉक इन पीरियड (पैसा कितने समय के बाद निकाले जा सकते हैं) और टैक्स बेनिफिट के लिए निवेश की समय-सीमा पर अभी सरकार विचार कर रही है। राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम में निवेशकों को तीन साल तक लगातार निवेश करना होता था और जमा रकम पर टैक्स छूट पाने के लिए तीन साल तक रकम को होल्ड करना होता था। नई स्‍कीम के मामले में सरकार ने बाजार के विभिन्‍न प्रतिभागियों, नियामकों और डिपॉजिटरी से राय भी ली है।

पुराना स्कीम क्यों हुआ बंद

राजीव गांधी इक्विटी सेविंग्स स्कीम उन निवेशकों के लिए था, जिनके पास पहले से डीमैट अकाउंट नहीं था या था भी तो उससे कोई ट्रांजेक्‍शन नहीं किया गया था। इसके अलावा भी कई अव्यावहारिक शर्तें थीं। इसी का नतीजा था कि इस स्कीम के तहत सिर्फ 57,000 खाते खुले, जिसके तहत 154 करोड़ रुपए का ही निवेश हुआ। नियम पेंचीदा होने के साथ इसकी होल्डिंग पीरियड भी निवेशकों को नहीं भाई। इस कारण इसे बंद करना पड़ा।

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