निवेशकों को नया साल भी कर सकता है निराश

Mutual Funds
निवेशकों को नया साल भी कर सकता है निराश

 इक्विटी और रियल एस्टेट में निवेश करने वालों के लिए 2016 का साल निराशाजनक रहा। हालांकि डेट में निवेश करने वालों, खासतौर से लंबी अवधि के बॉन्ड्स और डेट फंड्स में निवेश करने वालों के लिए यह साल शानदार रहा।


नई दिल्ली. इक्विटी और रियल एस्टेट में निवेश करने वालों के लिए 2016 का साल निराशाजनक रहा। हालांकि डेट में निवेश करने वालों, खासतौर से लंबी अवधि के बॉन्ड्स और डेट फंड्स में निवेश करने वालों के लिए यह साल शानदार रहा। गोल्ड में भी पैसा लगाने वालों को इस साल अच्छा रिटर्न मिला। लेकिन नए साल 2017 के बारे में आशंका जताई जा रही है कि सभी एसेट क्लास यानी इक्विटी, रियल एस्टेट, डेट में निवेशकों को निराशा का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में आज हम विभिन्न एसेट क्लास की संभावित तस्वीर पेश कर रहे हैं।

डेट पर सीमित रिटर्न

बैंकों द्वारा एफडी रेट घटाने के साथ ही फिक्स्ड इनकम चाहने वाले निवेशकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। सरकार ने भी ईपीएफ पर ब्याज घटा दिया है। पब्लिक प्रोविडेंट फंड और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट सरीखे छोटी बचत योजनाओं के मामले में भी ऐसी कटौती हो सकती है। चूंकि 10 साल वाले सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न में पहले ही बहुत गिरावट आ चुकी है, लिहाजा लंबी अवधि वाले बॉन्ड्स और डेट फंड्स से पूंजीगत लाभ की संभावना बिल्कुल सीमित है।

इक्विटी में बेहतरी की कम है उम्मीद

2016 में सेंसेक्स ने महज 1त्न रिटर्न दिया। एक्सपर्ट्स को 2017 में भी इक्विटी के कुछ खास रहने की उम्मीद नहीं है। अमेरिका में आर्थिक बेहतरी और डॉलर की मजबूती का 2017 में भारतीय इक्विटी मार्केट के प्रदर्शन पर बुरा असर होगा। वैश्विक निवेशकों का ध्यान अब भारत जैसे विकासशील देशों से हटकर अमेरिका की ओर मुड़ रहा है। डॉलर इंडेक्स पहले ही 14 वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गया है और इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। जीडीपी विकास दर नोटबंदी के कारण सुस्त है।

आईटी, फार्मा अपेक्षाकृत बेहतर

नोटबंदी के कारण जीडीपी ग्रोथ और खपत को झटका लगा है। हालांकि फार्मा, आईटी जैसे निर्यात आधारित सेक्टर की कंपनियां अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं, क्योंकि वे नोटबंदी से प्रभावित नहीं हैं। निर्यात आधारित सेक्टर को डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी का बड़ा फायदा भी मिल सकता है। डॉलर के 70-71 रुपए तक जाने की संभावना है। हालांकि डोनाल्ड ट्रंप के आउटसोर्सिंग पर सख्त रुख को देखते हुए आईटी सेक्टर से ज्यादा उम्मीद करना भी ठीक नहीं है। नोटबंदी से बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र को फायदा हुआ है।

सोना भी रह सकता है कमजोर

सोना को लेकर भी ज्यादातर विशेषज्ञ उत्साहित नहीं हैं, क्योंकि डॉलर की मजबूती का असर सोना के प्रदर्शन पर हो सकता है। 2017 में सोना में किसी बड़े उछाल की उम्मीद नहीं है। हालांकि सोने में मजबूती या कमजोरी आगामी महीनों में होने वाली घटनाओं पर निर्भर करेगी। हालांकि रुपए में कमजोरी के कारण सोना के घरेलू निवेशकों को कुछ फायदा हो सकता है। सोना के 2017 में 27,000 से 31,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के रेंज में रहने का अनुमान है।

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