वह सच्ची विद्या जो देश प्रेम जाग्रत करे :डॉ राजेश्वरान्द जी

Gadarwara, Madhya Pradesh, India
वह सच्ची विद्या जो देश प्रेम जाग्रत करे :डॉ राजेश्वरान्द जी

सर्व ब्राह्मण महासभा का आयोजन

गाडरवारा। विद्या परिश्रम से प्राप्त होती है, भाग्य से नहीं। विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास करना चाहिए। पहले विद्या, गुरुओं, आचार्यों की सेवा करके पढ़ी जाती थी। वह विद्या परमार्थ देने वाली लोक कल्याण करने वाली थी। आज ज्ञानार्जन नौकरी के लिए किया जाता है। पढ़कर इंजीनियर, डॉक्टर बनते हैं। विद्या आदर्श जीवन के लिए पढ़ी  जानी चाहिए। जिससे आने वाली पीढ़ी के लिए उदाहरण बनें। ऐसा तभी बन सकता है, जब हम नम्रता से  अपने से बड़ो का आदर करें। वह सच्ची विद्या है जो विद्यार्थियों में देशप्रेम जाग्रत करे। राजा एवं विद्वान की पूजा सभी जगह होती है, राजा अपने राज्य तक पूजित होता है। परंतु विद्वान की सभी जगह पूजा होती है। उक्ताशय के उद्गार 1008 डॉ राजेश्वरानंदजी ब्रह्मचारी महाराज ने सर्व ब्राह्मण महासभा द्वारा रविवार को आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में व्यक्त किए। कार्यक्रम में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लेने वाले विद्यार्थियों को शील्ड व प्रशस्ति पत्र  से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती जी एवं भगवान परशुरामजी की पूजन से हुई। तदोपरांत महाराजश्री का पादुका पूजन हुआ।  मंचासीन अतिथि पूर्व विधायकद्वय पं नरेश पाठक, साधना स्थापक, पूर्व नपाध्यक्ष ममता पाण्डेय, सर्व ब्राह्मण सभा के जिलाध्यक्ष पं नारायण दुबे, बसेडिय़ाजी, गौरीशंकर खेमरिया, संतोष शर्मा, जयमोहन शर्मा, लता पाण्डेय, डॉ स्वाति कुरचानिया, सर्व ब्राह्मण महासभा के पूर्व अध्यक्ष पं डीके उपाध्याय, डॉ उमाशंकर दुबे एवं अन्य आमंत्रित अतिथियों का स्वागत महासभा के अध्यक्ष पं नगेन्द्र त्रिपाठी एवं पदाधिकारियों ने किया। कार्यक्रम को पूर्व विधायक द्वय  नरेश पाठक व साधना स्थापक ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम  विद्यार्थियों के माता-पिता, अन्य शहर व ग्रामों से आमन्त्रित अतिथियों  की उपस्थिति में संपन्न हुआ।

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