ब्राजील में जीका वायरस पर रिसर्च करेगी नीमच की बेटी अपूर्वा

vikram ahirwar

Publish: Jan, 14 2017 05:11:00 (IST)

Ratlam, Madhya Pradesh, India
ब्राजील में जीका वायरस पर रिसर्च करेगी नीमच की बेटी अपूर्वा

 पेरिस की यूनिवर्सिटी से रिसर्च प्रोग्राम के लिए टॉप फाइब में चयनित


नीमच।  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा विज्ञान में हो रही विशेष खोज के क्षेत्र में नीमच का भी नाम जुडऩे जा रहा है। देश की ओर से यह उपलब्धि दिलाई है नीमच की बेटी 23 वर्षीय अपूर्वा त्रिवेदी ने। अपूर्वा को ब्राजील की साओपोलो यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस ने विशेष शोध का अवसर दिया है। इंटरनेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अपूर्वा जीका वायरस पर 6 माह तक गहन अध्ययन एवं रिसर्च कर रिपोर्ट तैयार करेगी।
पेरिस यूनिवर्सिटी के लिए भी टॉप टू में चुनी गई
अपूर्वा वर्तमान में यूनिवर्सिटी ऑफ  पीयरे एंड मेरीक्यूरी, पेरिस में प्रोग्राम ऑफ  इंटरनेशनल मास्टर इन इम्यूनोलोजी में अध्ययनरत् है। इसके अंतर्गत इम्यूनोलॉजी बायोथैरेपी यानि शरीर की प्रकृति के अनुसार उपचार में मददगार प्राकृतिक तत्वों पर गहन अध्ययन होता है। अपूर्वा इसमेें स्पेशलाइजेशन कर रही है। नीमच के कार्मल कान्वेंट स्कूल से 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद अपूर्वा ने गुजरात यूनिवर्सिटी के एमजी साइंस कॉलेज अहमदाबाद से माइक्रो बायलॉजी में स्नातक किया साथ ही बायोइन्फर्मेटिक में डिप्लोमा भी किया। अपूर्वा की चिकित्सा विज्ञान जगत में विशेष रुचि के चलते उसे गुजरात साइंस कॉलेज में सेमिनार में शोध पढऩे का अवसर भी मिला। इसी दौरान उसने जिनेटिक प्रोटियोमिक्स यानि चिकित्सा में सकारात्मक प्रभाव डालने वाले खाद्य पर भी शोध किया था। इसके चलते उसका ऑनलाइन कैंपस में पेरिस की मेरिक्यूरी एवं पियरे यूनिवर्सिटी में प्रोग्राम ऑफ इंटरनेशनल मास्टर इन इम्यूनोलोजी, बायोथैरेपी के लिए टॉप 2 में चयन हुआ। इसके लिए पेरिस यूनिवर्सिटी में मात्र 10 सीटï हैं। गुजरात की ओर से इस प्रोग्राम के लिए चयनित अपूर्वा अब तक दूसरी शोधार्थी है।
शोध के लिए एकमात्र का चयन
पेरिस यूनिवर्सिटी में दूसरे सेमेस्टर में अध्ययन के दौरान इंटरनेशनल एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत अपूर्वा त्रिवेदी का ऑनलाइन कैंपस के जरिए साओपोलो यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंस ब्राजील के शोध कार्यक्रम के लिए हुआ है। इसमें वह टॉप फाइव में चुनी गई है। भारत से वह इस शोध कार्यक्रम में इस सत्र में शामिल होने वाली एकमात्र छात्रा है। अपूर्वा ने बताया कि ब्राजील में जीका वायरस से होने वाली बीमारी बढ़ रही है। यह बीमारी एक प्रकार के मच्छर के काटने से होती है। जीका वायरस के फैलने और उपचार के बारे में कई शोध हो चुके हैं, इसी खोज को आगे बढ़ाने के लिए यह नया रिसर्च होगा। रिसर्च इस पर आधारित है कि मनुष्य के शरीर के कौन से ऐसे अवयव हैं जो बीमारी से स्वत: लडऩे में सक्षम हैं और उन्हें किस तरह विकसित किया जा सकता है। यह शोध कार्य 6 माह का होगा। खास बात यह है कि अपूर्वा को रिसर्च वर्क के लिए उसकी मातृ संस्था सहित सोरबोन यूनिवर्सिटी फ्रांस और रिसर्च सेंटर साओपोलो यूनिवर्सिटी ब्राजील की ओर से स्कॉलरशीप भी दी जा रही है। अपूर्वा बताती है कि छोटे कस्बे में पढ़कर भी हम श्रेष्ठता सिद्ध कर सकते हंै बशर्ते हमारी दिशा और लक्ष्य सही हो। अपूर्वा के पिता अरुण त्रिवेदी और मां हेमांगिनी का कहना है कि अपूर्वा के यहां तक पहुंचने में काफी आर्थिक विषमताओं का सामना करना पड़ा लेकिन प्रतिभा के सामने विदेशी विश्वविद्यालयों ने भी मदद के लिए हाथ बढ़ाए और स्वत: रास्ता बनता गया।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned