मामा की धमकी नहीं छटवां वेतनमान चाहिए

vikram ahirwar

Publish: Apr, 21 2017 05:43:00 (IST)

Neemuch, Madhya Pradesh, India
मामा की धमकी नहीं छटवां वेतनमान चाहिए

पंचायत सचिव संगठन का धरना सातवे दिन भी जारी


नीमच/जावद। जनपद पंचायत में पंचायत सचिवों द्वारा अपनी मांगों को लेकर गुरुवार को सातवें दिन भी धरना प्रदर्शन जारी रहा। पंचायत सचिव संगठन की हड़ताल से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को अपने आवश्यक पंचायत कार्य से वंचित रहना पड़ रहा है।  शासन की योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।


मानमाने आंकड़े भरवाए जा रहे हैं अभियान के!
पंचायत सचिव अपनी मांगों को लेकर आगे भी धरना प्रदर्शन एवं रैलियों और ज्ञापन के माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज को बुलंदी से प्रेषित करते रहेंगे। शासन सचिवों की जायज मांगों को मानकर सचिवों को छठा वेतनमान अध्यापक वर्ग तीन के समान वेतन अनुकंपा नियुक्ति एवं अन्य शासकीय सेवक के समान सुविधाएं प्रदान कर आम जनता को हो रही परेशानियों से निजात दिलाएं। इधर 'ग्रामोदय से भारत उदयÓ अभियान की विफलता छुपाए नहीं छुप रही है। अधिकारियों के दबाव में जहां ऑनलाइन आकड़ों की फर्जी फीडिंग सहायक सचिवों से करवाई जा रही है वहीं आकड़ों की जमीनी हकीकत कुछ ओर ही है।


सचिवों का धरना पूरे जोश के साथ जारी
सरकार खुद सकते में है की जब पंचायत स्तर के सभी महत्वपूर्ण कर्मचारी पटवारी, पंचायत सचिव, सरपंच के साथ साथ अब तो ग्राम कोटवार भी हड़ताल पर हैं तो ऐसे में ग्रामोदय अभियान को सफल कैसे मान लिया जाए। मुख्यमंत्री की सार्वजनिक मंच से कर्मचारियों को काम पर लौटने की नसीहत इसका ज्वलंत उदाहरण है। हड़ताल से सरकार का कामकाज कितना प्रभावित हो रहा है। गुरुवार को भी पंचायत सचिवों का धरना पूरे जोश के साथ जारी है। जब तक पंचायत सचिवों की मांगे पूरी नहीं होंगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा।


मनासा में भी हड़ताल पर
मनासा. मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन के बैनर तले मनासा ब्लॉक के सचिव अपनी विभिन्न मांगों को लेकर लगातार सातवें दिन भी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे हुए हैं।  सभी अधिकारी कर्मचारी मांगे नहीं माने जाने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल पर रहेंगे। सचिवों ने 'ग्रामोदय से भारत उदयÓ अभियान का भी बहिष्कार कर रखा है। पंचायत सचिव संघ की राज्य स्तरीय मांगे एवं स्थानीय समस्याओं का निराकरण नहीं करने के संबंध में 14 अप्रैल से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हडताल पर बैठे हुए हैं।

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