नीदरलैंड की ककड़ी खूब भा रही लोगों को

vikram ahirwar

Publish: Jan, 13 2017 04:45:00 (IST)

Ratlam, Madhya Pradesh, India
नीदरलैंड की ककड़ी खूब भा रही लोगों को

आधा बीघा में ले रहे 18 से 20 टन ककड़ी, 15 से 20 रुपए किलो तक मिल रहे हैं बाजार में दाम, होता है 90 फीसदी फायबर


नीमच। यूं तो आधुनिक तकनीक का उपयोग कर लगभग हर किसान अधिक से अधिक आर्थिक लाभ कमा रहा है, लेकिन कम क्षेत्रफल में अधिक उत्पादन लेने के लिए एक अन्नत कृषक ने नीदरलैंड से ककड़ी के बीज मंगवाकर बोए हैं। आधा बीघा में 18 से 20 टन ककड़ी का सहजता से उत्पादन ले रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है ककड़ी
उन्नत कृषक नरेंद्र सोनी ने बताया कि मैंने अपने खेत पर पॉली हाउस लगाया है। आधुनिक तकनीक का उपयोग कर अधिक से अधिक उत्पादन लेने का प्रयास कर रहे हैं। इस बार मैंने नीदरलैंड से ककड़ी के बीज मंगवाए हैं। इसका आधा बीघा में उत्पादन ले रहा हूं। इस ककड़ी की विशेषता यह है कि इसे सीधे बेल से तोड़कर और धोकर खाया जा सकता है। स्वाद भी अच्छा है और इसमें करीब 90 फीसदी फायबर होता है जो स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक है। आधा बीघा में 18 से 20 टन तक ककड़ी का उत्पादन होने की पूरी उम्मीद है। बाजार में भी 15 से 20 रुपए तक दाम मिल रहे हैं। इस ककड़ी की एक ओर विशेषता है कि इसमें बीज बिलकुल नहीं हैं। पेट के विकारों के लिए यह ककड़ी काफी गुणकारी है। इसमें पित्त बिलकुल नहीं होता। सोनी ने बताया कि अब तक जितना भी उत्पादन हुआ है वो पूरा का पूरा नीमच मंडी में ही खप रहा है। शहर से बाहर भेजने की आवश्यकता ही नहीं पड़ रही है। इस ककड़ी का स्वाद और छोटा आकार ग्राहकों को काफी लुभा रहा है।
नीदरलैंड से जिस ककड़ी के बीज उन्नत कृषक ने मंगवाए हैं वास्तव में उसका स्वाद अच्छा है। यहां अधिकांश पॉली हाउस में यह ककड़ी ही उगाई गईहै। कम लागत में अच्छा उत्पादन लेने वाली फसल के रूप में भी इस शामिल किया गया है। आधा बीघा में बिना मेहनत और संसाधनों का उपयोग किया किसान कम से कम 13 से 14 टन को उत्पादन ले ही रहा है। जो किसान आधुनिक तकनीक का उपयोग कर रहे हैं वे 20 टन तक प्रति बीघा ले रहे हैं। शादी के सीजन में इसकी मांग बढ़ जाती है और दाम भी अच्छे मिलते हैं। मांग अधिक और आवक कम होने की स्थिति में 40 रुपए किलो तक के भाव ककड़ी बिकती है। इससे किसानों को काफी आर्थिक लाभ हो रहा है। सीधे सीधे कहा जाए तो लागत का दो से ढाई गुना किसान कमा रहे हैं।
-एसएस सारंगदेवोत, कृषि वैज्ञानिक कृषि विज्ञान केंद्र नीमच

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