शराब को लेकर टूटा यह भ्रम, अध्ययन में सामने आया चौंकाने वाला सच 

Noida, Uttar Pradesh, India
शराब को लेकर टूटा यह भ्रम, अध्ययन में सामने आया चौंकाने वाला सच 

इसी तरह के 2000 में हुए एक अन्य अध्ययन के निष्कर्ष में यह पाया गया था कि कम मात्रा में शराब पीने वालों की मृत्यु शराब न पीने वालों की अपेक्षा देर में हुई

नई दिल्ली/नोएडा। कहते हैं कि शराब पीने वाले पीने का कोई न कोई बहाना ढूंढ ही लेते हैं। इस क्रम में एक बहाना यह भी है कि शराब पीने के शौकीन अक्सर यह कहते हैं कि थोड़ी शराब पीने में कोई बुराई नहीं है, बल्कि कम मात्रा में शराब पीना स्वास्थ्य के लिए लाभदायक भी होता है।


क्या है सर्वो का सच 

दरअसल शराब पीने का शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव का समय-समय पर अध्ययन होता रहता है। कई बार कुछ इस तरह के निष्कर्ष सामने आये हैं, जिसमें यह कहते हुए पाया गया है कि कम मात्रा में शराब पीने से अच्छी नींद आती है या स्वास्थ्य मेंटेन रहता है। लोगों का तर्क यहां तक होता है कि इसी लिए सरकार फौजियों को सस्ती शराब उपलब्ध करवाती है, जिससे वे स्वस्थ रहें और बेहतर काम कर सकें।  
लेकिन इस बात को अंतिम निष्कर्ष के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता. क्योंकि ऐसे अध्ययन ज्यादातर उन्हीं कंपनियों के द्वारा या उनकी आर्थिक मदद के बाद किये गए हैं, जो खुद शराब बनाती हैं। जाहिर है कि उनके निष्कर्ष संदेह से परे नहीं माने जा सकते। दूसरे कई अध्ययन यह बताते हैं कि शराब पीना नुक्सानदायक है। अगर कम मात्रा में पिया जाए तो कम नुक्सान और ज्यादा पिया जाए तो ज्यादा नुकसान होता है।
 
अध्ययन में सामने आया अनोखा सच

शराब का शरीर पर पड़ने वाले असर के मामले में एक अध्ययन का अक्सर जिक्र किया जाता है। आर्ची कोक्रेन, जिन्हें कि सबूतों के आधार पर कोई दवा देने की प्रक्रिया के जनक के रूप में जाना जाता है, ने एक अध्ययन किया। उन्होंने अपने दो सहयोगियों के साथ पश्चिम के अठारह विकसित देशों में शराब पीने और ह्रदय रोग पर शोध किया। उन्होंने पाया कि जिन डॉक्टरों ने ज्यादा शराब पी, उन्हें हार्ट अटैक का खतरा कम पीने वालों की तुलना में कम था, इससे यह निष्कर्ष निकला गया कि शराब पीने से हार्ट अटैक का खतरा कम होता है।

साइंटिफिक रीजन बताया कारगर 
 
लेकिन इस अध्ययन की एक बात ध्यान से देखने पर यह बात सामने आयी कि शराब बनाने के लिए जिन तत्वों का इस्तेमाल होता है, उसमें एंटी ऑक्सीडेंट और पौधों में पाए जाने वाला पोलिफेनोल प्रमुख है। माना जाता है कि इन दोनों ही तत्वों का उपयोग करने पर हार्ट अटैक में लाभ मिलता है। जाहिर है कि ज्यादा शराब पीने वालों में हार्ट अटैक के कम होने की बात को इसी से जोड़ा गया था।

लंबे समय तक जिए कम शराब पीने वाले 

इसी तरह के 2000 में हुए एक अन्य अध्ययन के निष्कर्ष में यह पाया गया था कि कम मात्रा में शराब पीने वालों की मृत्यु शराब न पीने वालों की अपेक्षा देर में हुई। यानी वे लम्बी अवधि तक जिए। इस निष्कर्ष पर भी इस आधार पर सवाल उठाये गए कि चूंकि वही लोग शराब कम पीते हैं जो यह जानते हैं कि ज्यादा शराब पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। यानी वे अपने हेल्थ इशू को लेकर औरों से अधिक सचेत थे। यानी उन्होंने कम शराब पीने के साथ-साथ स्वास्थ्य की कुछ अन्य बातें भी अनुकरण की होंगीं। जबकि ज्यादा शराब पीने वाले अपने स्वास्थ्य के प्रति बिलकुल बेपरवाह थे, तभी उन्होंने ज्यादा शराब पी यानी उन्होंने स्वास्थ्य के किसी अन्य बात का भी पालन नहीं किया होगा। वहीं बिलकुल शराब न पीने वाले लोग भी किसी तरह स्वास्थ्य के प्रति बहुत सचेत रहे हों, इसका कोई प्रमाण नहीं हो सकता। यानी कम शराब पीने को स्वास्थ्य के लिए अच्छा घोषत नहीं किया जा सकता। उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए यही कहा जा सकता है कि जितना सम्भव हो, शराब से दूरी ही बनाना अच्छा होगा। आखिरकार यह हमारे स्वास्थ्य के साथ-साथ समाज में हमारी गरिमा को भी नुक्सान पहुंचाता है। 

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