यूनि‍टेक बिल्डर्स को भी SC से लगा झटका, 38 खरीदारों के 17 करोड़ लौटाने का आदेश

Noida, Uttar Pradesh, India
यूनि‍टेक बिल्डर्स को भी SC से लगा झटका, 38 खरीदारों के 17 करोड़ लौटाने का आदेश

यूनिटेक के ये फ्लैट गुड़गांव और नोएडा एक्सप्रेस-वे के आसपास बने हुए हैं

नई दिल्ली/नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूनिटेक बिल्डर को आदेश दिया कि वह 38 निवेशकों के 17 करोड़ रुपए वापस करें। धन वापसी के लिए यूनिटेक को एक महीने का समय दिया गया है। इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट पूर्व के एक आदेश का पालन करते हुए कम्पनी ने 15 करोड़ रुपए पहले ही उच्चतम न्यायालय के पास जमा करवा दिए हैं। शेष दो करोड़ रुपए चुकाने के लिए कम्पनी के पास एक महीने का समय है।

कोर्ट ने कहा कि बांड में किए गए वायदे के मुताबिक तय समय पर निवेशकों को फ्लैट न देना एक गलत प्रवृत्ति है और इस प्रवृत्ति को रोकना जरूरी है। इसलिए ये बिल्डर उन निवेशकों के धन अवश्य लौटाए जिन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ उनके पास निवेश कर रखा था। ये फ्लैट गुड़गांव और नोएडा एक्सप्रेस-वे के आसपास बने हुए हैं।

कैसे वापस मिलेंगे पैसे

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी निवेशक कोर्ट में फ्लैट लेने के बांड से लेकर अपनी पहचान से जुड़े सभी कागजात को कोर्ट में दाखिल करें। इसके उचित पहचान के बाद निवेशकों को पैसे वापस कर दिए जाएंगे। इसमें सभी ग्राहकों के एक साथ आने का इंतजार नहीं किया जाएगा, बल्कि जो भी निवेशक हैं, वे अपने कागजात जमा करवाकर अपने धन की वापसी कर सकते हैं।

पार्श्वनाथ डेवलपर को भी 22 करोड़ वापस करने का आदेश

उपभोक्ताओं के हित में सुप्रीम कोर्ट लगातार बिल्डरों पर कड़ी नकेल लगाती हुई नजर आ रही है। यूनिटेक के मामले से ठीक एक दिन पूर्व दिल्ली-एनसीआर के एक अन्य बड़े बिल्डर पार्श्वनाथ को भी अपने 70 निवेशकों को 22 करोड़ रुपए वापस करने का आदेश दिया था। गाजियाबाद में बन रहे इन फ्लैटों को ग्राहकों को वापस करने में भी बिल्डर नाकाम रहा था।

कोर्ट ने की यह सख्त टिप्पणी

एक अन्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि जैसे बिल्डरों ने यह मान रखा था कि उन्हें किसी भी कीमत पर निवेशकों के पैसे वापस नहीं करने हैं और ऐसा करके वे अपनी कम्पनी की माली हालत खराब कर बच भी जाएंगे। कोर्ट ने सख्त अंदाज में कहा कि बिल्डरों को इस प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना होगा। उन्हें समझना होगा कि इस देश में एक कानून है जो उन्हें उनकी मनमर्जी पर नहीं छोड़ सकता।

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