जल्द मिले सजा

Shankar Sharma

Publish: Apr, 18 2017 11:00:00 (IST)

Opinion
जल्द मिले सजा

तेरह महीने बाद ही सही भगोड़े विजय माल्या की लंदन में गिरफ्तारी से उसके भारत आने की उम्मीद तो जगी। भारत के अनुरोध पर ब्रिटेन सरकार ने माल्या की गिरफ्तारी कर प्रत्यर्पण की राह खोली है


तेरह महीने बाद ही सही भगोड़े विजय माल्या की लंदन में गिरफ्तारी से उसके भारत आने की उम्मीद तो जगी। भारत के अनुरोध पर ब्रिटेन सरकार ने माल्या की गिरफ्तारी कर प्रत्यर्पण की राह खोली है। देश के बैंकों से नौ हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर चुकाए बगैर फरार होने वाले माल्या को लाने की लंबे अर्से से कोशिशें हो रही थीं।

लंदन में माल्या की गिरफ्तारी के बावजूद उसके भारत लौटने में अभी समय लगने की संभावना है। सरकार को इस मामले में ब्रिटेन के साथ निरंतर संपर्क में रहने के अलावा तमाम कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखना होगा। माल्या कब भारत लौटता है, ये देखने की बात है लेकिन उसके देश छोड़कर भागने की घटना से सरकार को जरूर सबक लेना चाहिए। नौ हजार करोड़ का कर्जदार माल्या सरकारी एजेंसियों को धता बताकर भारत से भाग गया, ये शर्म की बात है। उसके भागने में कहीं सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत तो नहीं थी।

माल्या पिछले साल मार्च में देश छोड़कर भागा था तो उसके प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध करने में 11 माह का समय क्यों लगा? ऐसे अनेक सवालों का जवाब सामने आना चाहिए। एक व्यक्ति पूरे तंत्र को धोखा देकर भाग जाए तो सवाल खड़े होना लाजिमी है। माल्या को भारत लाना सफलता नहीं मानी जाएगी। सफलता तब मानी जागी, जब माल्या को लाकर कानून के सुपुर्द किया जाए।

नौ हजार करोड़ की रकम वसूल की जाए और एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के आरोप में सजा भी दिलाई जाए। ये अकेले माल्या की बात नहीं बल्कि उन जैसे हजारों लोगों की बात है जो आम आदमी के टैक्स की कमाई को लूटकर ऐशभरी जिन्दगी जीते हैं।

हजारों करोड़ के कर्ज में डूबे होने के बावजूद माल्या पार्टियों के नाम पर करोड़ों रुपया लुटाता रहा। पैसे के बल पर राज्यसभा चुनाव जीतने वाले माल्या को किन-किन दलों ने समर्थन दिया था, सबको पता है। ऐसे तमाम माल्याओं से राजनीतिक दल सांठगांठ रखते हैं। सरकार को प्रयास ये भी करना चाहिए कि जिन देशों के साथ उसकी प्रत्यर्पण संधि नहीं है, उनसे संधि करें। प्रत्यर्पण संधि के बावजूद ऐसे मामलों में आने वाली अड़चनों को दूर करने की कोशिश भी करनी चाहिए। आग लगने पर कुआ खोदने की प्रवृत्ति को छोड़कर तैयारी पहले से ही शुरू कर देनी चाहिए ताकि ऐसे अपराधी को बच निकलने का मौका नहीं मिले।

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