लाल बत्ती वाली कारें

Shankar Sharma

Publish: Apr, 21 2017 12:19:00 (IST)

Opinion
लाल बत्ती वाली कारें

भला हो नरेंद्र भाई का, जिन्होंने लाल बत्ती संस्कृति को खत्म करने की जोरदार पहल की। लाल बत्ती वाली कारें देखकर हमें लगता इनमें देवपुरुष विराजमान हैं और सड़क पर भीड़ भरे ट्रैफिक में रेंगने वाले कीड़े


व्यंग्य राही की कलम से

प्राय: ऑपरेशन थियेटर्स, टीवी स्टेशनों के रिकार्डिंग रूम, आकाशवाणी के स्टूडियो और निजी संस्थानों के सीईओ के दफ्तर के दरवाजे पर लाल बत्ती लगी रहती है। जब यह बत्ती जल रही होती है तो आप उस कक्ष में प्रवेश नहीं कर सकते क्योंकि भीतर महत्वपूर्ण काम चल रहा होता है। लाल बत्ती की याद आते ही हमें एक अद्भुत कथा स्मरण हो आई है। पांचाल पुत्री द्रौपदी के पांच पति थे। उनमें से एक भी द्रौपदी के कक्ष में होता तो दूसरा पति उस कक्ष में प्रवेश नहीं करता था। चूंकि उस जमाने में न तो बिजली थी और न ही लाल बत्ती सो पति की जूतियां संकेतक का कार्य करती थी। दरवाजे पर किसी एक पति की जूतियां खुली रहती तो दूसरा पांडव कक्ष में नहीं जाता था।

गलती से चला गया तो दण्ड स्वरूप उसे एक निश्चित समय तक निर्वासित रहना पड़ता था। लाल बत्ती एक अच्छी व्यवस्था है लेकिन देश का ऐरा-गैरा भी अपनी कार के आगे लाल बत्ती लगा कर घूमने लगा। मंत्रीजी के साथ घर वाली, साला-साली, बेटा-बेटी, चमचे, निजी सचिव यहां तक कि नेताजी के चहेते तक अपनी कार में लाल बत्ती लगा कर चलने लगी। कसम से लाल बत्ती वाली कार देखते ही हम तो छिटक कर फुटपाथ पर ऐसे चढ़ जाते हैं जैसे सामने से कोई छुट्टा सांड आ रहा हो।

लाल बत्ती की आड़ में उच्चके टोल टैक्स से निकल जाते, दारू की तस्करी होती, भगोड़े बदमाश नाकाबंदी से निकल लेते, यहां तक कि अवैध व्यापार के लिए भी लाल बत्ती वाली कारों का इस्तेमाल होने लगा। भला हो नरेंद्र भाई का, जिन्होंने लाल बत्ती संस्कृति को खत्म करने की जोरदार पहल की।

लाल बत्ती वाली कारें देखकर हमें लगता इनमें देवपुरुष विराजमान हैं और सड़क पर भीड़ भरे ट्रैफिक में रेंगने वाले कीड़े। मंत्रियों के कारों के काफिले और खामखां के दिखावे पर भी रोक लग जाए तो मजा आ जाए। चलो कम से कम सड़कों पर हांडते लाल बत्ती वालों से तो पीछा छूटा।

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