साहस तो दिखाएं!

Shankar Sharma

Publish: Nov, 29 2016 11:17:00 (IST)

Opinion
साहस तो दिखाएं!

कालेधन और भ्रष्टाचार पर प्रहार का सरकार का ये अभियान बेशक 50 दिन की बजाए सौ -डेढ़ सौ दिन क्यों न चले, लेकिन उसका असर भी दिखना चाहिए

कालेधन और भ्रष्टाचार पर प्रहार का सरकार का ये अभियान बेशक 50 दिन की बजाए सौ -डेढ़ सौ दिन क्यों न चले, लेकिन उसका असर भी दिखना चाहिए। लेधन पर प्रहार की मुहिम को अंजाम तक ले जाना है तो केंद्र सरकार के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी को चंद कदम और चलने के लिए तैयार रहना होगा।

नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री का पार्टी सांसदों -विधायकों के लिए बैंक खातों के लेन-देन का ब्यौरा देना अनिवार्य करना इस दिशा में पहला कदम तो हो सकता है लेकिन सिर्फ इससे काम चलने वाला नहीं। केंद्र में पार्टी की सरकार आने के बाद से सांसदों, विधायकों के साथ पार्टी पदाधिकारियों और बड़े नेताओं के लिए संपत्ति की खरीद-बेचान का ब्यौरा देना भी अनिवार्य तो हो ही उसे सार्वजनिक करने का साहस भी दिखाया जाए।

अच्छा तो ये होता कि प्रधानमंत्री सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि सभी दलों के सांसद-विधायकों से बैंक खातों और तमाम खरीद-फरोख्त की जानकारी सार्वजनिक करने को कहते। जानकारी भी पार्टी अध्यक्षों को नहीं बल्कि लोकसभाध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति और विधानसभाओं के अध्यक्षों को दी जाती।

प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार और कालेधन को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कुछ और सख्त कदमों के संकेत दिए भी हैं। सरकार का ये अभियान बेशक 50 दिन की बजाए सौ -डेढ़ सौ दिन क्यों न चले, लेकिन उसका असर भी दिखना चाहिए। बात बैंक खातों या लॉकरों तक ही नहीं रह जानी चाहिए।

बेनामी संपत्तियों के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों और सहकारी-शिक्षण संस्थानों के नाम पर कालेधन को सफेद करने की जुगत पर भी प्रहार होना चाहिए जिनमें से अधिकांश का नियंत्रण प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से राजनेताओं-नौकरशाहों के पास है। जांच-पड़ताल इनकी भी व्यापक तरीके से कराई जानी चाहिए।

बेहतर हो कि इस मुहिम में सरकार सभी दलों को साथ लेकर आगे बढ़े ताकि ये अभियान सरकार का न लगकर समूचे देश का लगे। अभियान में पारदर्शिता भी रहे जिससे देशवासी भी सब कुछ जान सकें। सालों की गंदगी एक दिन या एक महीने में साफ नहीं हो सकती। जनता समय देने को तैयार है लेकिन जो भी काम हो बिना राजनीतिक लाभ-हानि की सोच के।

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