समाधान के हों प्रयास

Shankar Sharma

Publish: Oct, 18 2016 10:23:00 (IST)

Opinion
समाधान के हों प्रयास

पैसे के दम पर आईएएस, डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बनने वाले लोगों से देश के भले की उम्मीद तो कतई नहीं की जा सकती

बधाई का पात्र है बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड, जिसने टॉपर घोटाले की जांच के बाद राज्य के 68 इंटर कॉलेजों और 19 स्कूलों की मान्यता रद्द करने का साहस दिखाया। बोर्ड का यह कड़ा फैसला उन सभी दूसरे राज्यों के लिए नजीर हो सकता है जहां परीक्षाएं खिलवाड़ बनती जा रही हैं।  न केवल स्कूल-कॉलेज की परीक्षाएं बल्कि प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षाएं भी आजकल ऐसा मजाक बनकर रह गई हैं जहां पैसा और जालसाजी योग्यता पर हावी होती जा रही है। बिना पढ़े -लिखे योग्यता सूची में अव्वल आने या फिर डॉक्टर-इंजीनियर बनने के किस्से अब आम हो चले हैं।

परीक्षाओं में अब नकल तो बीते जमाने की बात बनती जा रही है। नकल का स्थान ऐसे संगठित गिरोह ले चुके हैं जो पैसे की एवज में परीक्षार्थी को टॉप भी करा सकते हैं तो मनचाही नौकरी में भी सफलता भी दिला सकते हैं। बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड ने छह महीने की जांच के बाद कॉलेज-स्कूलों की मान्यता रद्द की है। लेकिन जरूरत इससे आगे बढ़कर फैसला लेने की है। सिर्फ मान्यता रद्द करने से काम चलने वाल नहीं।

इन कॉलेज संचालकों के साथ परीक्षा में टॉप करने वाले छात्र-छात्राओं के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाकर उन्हें सींखचों के पीछे भेजे जाने की दिशा में भी प्रगति होनी चाहिए। सरस्वती के मंदिर में होने वाली इस तरह की जालसाजी देश को कमजोर बना रही है। पैसे के दम पर आईएएस, डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बनने वाले लोगों से देश के भले की उम्मीद तो कतई नहीं की जा सकती।

केन्द्र सरकार को इस तरह की धांधलियों का मुद्दा राज्यों पर छोडऩे की बजाए आगे आकर इसके समाधान की दिशा में जुटना चाहिए। सभी राज्य सरकारों के साथ मिलकर ऐसा तंत्र विकसित करे जिससे योग्यता पर जालसाजी हावी न होने पाए। ये मुद्दा राजनीति से अलग है लिहाजा इस पर एक राय बनने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए।

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