ये नाक वाले!

Shankar Sharma

Publish: May, 18 2017 11:55:00 (IST)

Opinion
ये नाक वाले!

अब जयपुर में ही देखिए। अपनी 'नाक' की खातिर एक बाप ने अपनी आंखों के सामने अपने बेटी के सुहाग को कत्ल करवा दिया। अरे वाह रे नाक वालों!


व्यंग्य राही की कलम से
कसम से जितनी बड़ी नाक इस देश वालों की है उतनी दुनिया में किसी की नहीं। होड़ मची है कि किसकी नाक कितनी लम्बी है। यहां हर जाति, हर कुटुम्ब की अपनी विशेष नाक है। व्यक्तिगत नाकों का तो कहना ही क्या। यहां भांति-भांति की नाकों में बामन, बनिया, राजपूत, जाट, गुर्जर, चौधरी, कायमखानी, पठान, खान, सिंह साब सबकी नाकों की अपनी-अपनी खासियत है। मजे की बात यह कि कोई भी अपनी नाक को छोटी नहीं मानता। अब जयपुर में ही देखिए।

अपनी 'नाक' की खातिर एक बाप ने अपनी आंखों के सामने अपने बेटी के सुहाग को कत्ल करवा दिया। अरे वाह रे नाक वालों! खानदान में  बेटा प्रेम-विवाह कर ले तो उससे कुटुम्ब की नाक ऊंची हो जाती है और बेटी ने कर लिया तो नाक कट जाती है।

नाक कटने-नाक बढऩे के कई किस्से तो हर परिवार में मिल जाएंगे लेकिन साहब जब से कश्मीर में आतंककारियों ने सेना के एक जवान लेफ्टिनेंट की नृशंस हत्या की है तब से हमें लगता है कि हमारी नाक कट गई और हैरतअंगेज यह कि बात-बात पर दुश्मन का सिर काटकर लाने की दुहाई देने वाले, अपने शत्रु को घर में घुसकर नेस्तनाबूद करने वालों की लम्बी जुबान को जैसे लकवा मार गया हो।

कसम से उस नौजवान फौजी की हत्या के बाद हम कुछ दिन इसलिए चुप रहे कि लगा छप्पन इंच की छाती वाले हमारे शेर दहाड़ेंगे। पंजे चलाएंगे। लेकिन, हाय किसी की जुबान से एक शब्द नहीं फूटा। क्या इसलिए कि वह फौजी अफसर कश्मीरी था। चाहे किसी की कटी न कटी हो हमारी नाक को तो हम उसी दिन से कटा समझ रहे हैं।

वैसे भी इस देश में जब आम आदमी की ही कोई औकात नहीं बची तो फिर उसकी नाक की क्या औकात। इस मामले में एक भयावह चुप्पी है। कांग्रेस चुप। वामपंथी चुप। समाजवादी चुप। क्या अब अपनी नाक बचाने के लिए इस देश के आम आदमी को ही खड़ा होना पड़ेगा? कुछ तो बोलो, सांप क्यों सूंघ रहे हैं?

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