ट्रंप विरुद्ध बन रहा महाभियोग का योग (प्रो. चिंतामणि महापात्र)

Shankar Sharma

Publish: May, 19 2017 12:05:00 (IST)

Opinion
ट्रंप विरुद्ध बन रहा महाभियोग का योग (प्रो. चिंतामणि महापात्र)

संचार माध्यमों में 'मेन ऑफ कंट्रोवर्सी' के नाम से ख्यात अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से खुफिया जानकारी साझा करने के ताजा खुलासे ने, उनके लिए मुसीबतें खड़ी कर दी हैं

संचार माध्यमों में 'मेन ऑफ कंट्रोवर्सी' के नाम से ख्यात अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूस से खुफिया जानकारी साझा करने के ताजा खुलासे ने, उनके लिए मुसीबतें खड़ी कर दी हैं। विरोधी दल उन पर देशद्रोह के आरोप लगाते हुए महाभियोग की मांग कर रहे हैं। क्या ट्रंप पूर्व की तरह इस विवाद से भी बाहर निकल पाएंगे..?

अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कार्यभार संभालने के बाद से ही अपनी कार्यशैली को लेकर एक के बाद एक विवादों में फंसते रहे हैं। ट्रंप विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली देश अमरीका के ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं जो 70 साल की उम्र में राष्ट्रपति बने और जिन्हें पूर्व में न तो राजनीति का और ना ही किसी सैन्य अभियान का अनुभव रहा है।

विवादों और ट्रंप का पुराना नाता रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान भी वे काफी विवादित रहे थे। लेकिन, तमाम विवादों को धकेलते हुए वे आगे बढ़ते रहे। पिछले दिनों उन्होंने अमरीकी जांच एजेंसी एफबीआई के तत्कालीन प्रमुख जेम्स कॉमी को पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल टी. फ्लिन के खिलाफ जांच बंद करने के लिए कहा।

जेम्स कॉमी ने लिखित में ट्रंप पर यह आरोप लगाया। बाद में जांच बंद नहीं करने पर उन्हें एफबीआई प्रमुख के पद से बर्खास्त भी कर दिया गया। अमरीका में एफबीआई प्रमुख का पद काफी महत्वपूर्ण होता है। इनके पास सभी प्रमुख नेताओं की गुप्त जानकारियां रहती हैं।

कोई भी राष्ट्रपति उन्हें हटाने के बारे में सोच भी नहीं सकता लेकिन ट्रंप ने ऐसी हिमाकत की। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल साइट ट्विटर पर लिखा कि उन्होंने रूस से आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ सीरिया एंड इराक (आईएसआईएस) के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा की हैं।

राष्ट्रपति द्वारा इस खुलासे ने पूरे अमरीका को स्तब्ध कर दिया। जब से पुतिन रूस के राष्ट्रपति बने हैं तब से अमरीका और रूस के बीच अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एक नया शीतयुद्ध शुरू हो गया है। रूस जैसे पंरपरागत प्रतिद्वंद्वी के साथ खुफिया जानकारी साझा करना अमरीका में राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना जा रहा है।

हालांकि आतंकवाद के खिलाफ दो देशों में सूचनाओं का आदान-प्रदान होता रहता है। और, पूर्व में भी अमरीका और रूस की खुफिया एजेंसियां आतंकवाद के खिलाफ एक-दूसरे से जानकारियां साझा करती रही हैं। लेकिन, प्रमुख विपक्षी दल डेमोक्रेट्स के सांसद अल ग्रीन ने राष्ट्रपति ट्रंप के इस कृत्य को देशद्रोह बतातेे हुए उन पर महाभियोग चलाने की मांग तक कर डाली। वहीं ट्रंप ने खुफिया जानकारी साझा करने को उचित ठहराते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ऐसा करने का पूरा हक है।

इससे आईएसआईएस द्वारा प्रसारित आतंकवाद को काबू करने और देश की विमानन सेवाओं के सुरक्षित परिचालन करने में मदद मिलेगी। इससे किसी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है। वहीं दूसरी ओर अमरीका के न्याय विभाग और कांग्रेस ने तो इन आरोपों की जांच प्रारम्भ कर दी है। अगर जांच में यह साबित हो जाता है कि डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव प्रचार के दौरान उनके पार्टी सहयोगी रूस के खुफिया अधिकारियों से मिलते रहे हैं तो ट्रंप पर महाभियोग चलाना आसान हो जाएगा।

अब ऐसा लगता है कि ट्रंप धीरे-धीरे फंसते जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि रिपब्लिकन पार्टी के कार्यकर्ता व बड़े नेताओं ने अभी तक राजनीतिक सफर  में ट्रंप का साथ ही दिया है। अगर पार्टी साथ नहीं होती तो ओबामा केयर को इस तरह भंग करना आसान नहीं होता। मगर अहम सवाल यह है कि ये कब तक उनका समर्थन करेंगे? अमरीका में राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया काफी जटिल है।

संविधान के अनुसार अमरीका में राष्ट्रपति पर दुराचार, राजद्रोह, घूसखोरी और जघन्य अपराध साबित होने पर ही महाभियोग चलाया जा सकता है। लेकिन, ट्रंप के विरोधी इसके लिए 25 वें संविधान संशोधन का उपयोग करना चाहते हैं। इसके अंतर्गत मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को राष्ट्रपति पद के अयोग्य माना गया है।

ऐसा लगता है कि ट्रंप पर महाभियोग की मांग को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी देश भर में अभियान चलाएगी। लेकिन, अब तक अमरीका के 228 साल के लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ जब किसी राष्ट्रपति को महाभियोग की वजह से पद गंवाना पड़ा हो। अब तक केवल दो राष्ट्रपतियों पर ही महाभियोग चला है लेकिन वे भी अपना पद बचाने में सफल रहे। मात्र पूर्व राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने ही महाभियोग का सामना करने से पहले ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। ट्रंप संबंधित ताजा विवादों के मद्देनजर इनके खिलाफ महाभियोग शुरू हो सकता है।

अगर ट्रंप को सदन में महाभियोग का सामना करना पड़ता है तो उनके बचावकर्ता उनको दुर्भावनापूर्ण राजनीतिक रंजिश का शिकार बताने का प्रयास करेंगे। यह भी सर्वविदित है कि जिस तरह ट्रंप बेखौफ बयानबाजी व निर्भीक निर्णय लेते हैं उससे अमरीकी नागरिकों के बीच उनकी लोकप्रियता बरकरार है।

अगर वे अमरीका के आर्थिक हालात सुधारने में कामयाब होते हैं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सफल होते हैं तो उन्हें हटाना आसान नहीं होगा। हालांकि अमरीका में इस बात पर आम सहमति है कि ट्रंप अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में निजी, राजनीतिक और कानूनी तौर पर अधिक सशक्त निर्णय लेते हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक मापदण्डों के उल्ंलघन, कानून की अवहेलना और  मानवीय शिष्टाचार के अनादर जैसे लगातार लग रहे आरोपों से बिगड़ी छवि को वे कैसे सुधार पाते हैं।

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