विश्वकप खेलकर लौटे ओलंपियन निशानेबाजों को 13 घंटे से एयरपोर्ट पर बैठाया

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विश्वकप खेलकर लौटे ओलंपियन निशानेबाजों को 13 घंटे से एयरपोर्ट पर बैठाया

मेरठ में पकड़े गए हथियारों की तस्करी के मामले से घबराए कस्टम अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाने से किया इनकार।

कुलदीप पंवार
नई दिल्ली।
भारतीय खिलाडिय़ों और अन्य सेलीब्रेटिज के साथ विदेशी एयरपोर्ट पर खराब व्यवहार के कई किस्से आपने सुने होंगे, लेकिन पूरे विश्व में अपने निशाने की धाक से देश का नाम रोशन करने भारतीय निशानेबाजों को मंगलवार को अपने ही देश के एयरपोर्ट पर बेहद घटिया व्यवहार का सामना करना पड़ा।

दो अलग-अलग देशों से निशानेबाजी विश्व कप व एक अन्य बड़े इवेंट में भाग लेकर सुबह 4 से 5 बजे के बीच अलग-अलग फ्लाइट से यहां इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे लगभग डेढ़ दर्जन निशानेबाजों को कस्टम ने वहीं रोक लिया और उनके हथियारों को क्लियरेंस देने से इंकार कर दिया। लगभग 13 घंटे बाद भी ये खिलाड़ी एयरपोर्ट पर भूखे-प्यासे बैठकर अपने ही देश में प्रवेश करने का इंतजार कर रहे थे। इन निशानेबाजों में कुछ ओलंपिक में भी देश के लिए खेल चुके हैं।

indin Shooting Team

एक टीम साइप्रस तो दूसरी पिजेन से पहुंची

भारतीय निशानेबाजों के दो अलग-अलग दल साइप्रस में हुए शॉटगन विश्व कप और चेक रिपब्लिक के पिजेेन में पिजेन वल्र्ड एयर राइफल-एयर पिस्टल शूटिंग ग्रां प्री में हिस्सेदारी करने के बाद मंगलवार सुबह देश वापस लौटे। इनमें ओलंपियन गुरप्रीत सिंह, हरप्रीत सिंह, पेंबा तमांग, चैन सिंह, क्यानन चेनाई, सीमा तोमर आदि शामिल थे। साइप्रस से शॉटगन टीम के 7 निशानेबाज दोहा होते हुए लगभग 20 घंटे से भी ज्यादा की फ्लाइट लेकर सुबह 5 बजे यहां पहुंची, जबकि पिजेन से आ रही टीम के 11 निशानेबाज भी इससे कुछ ज्यादा लंबी फ्लाइट लेकर सुबह 4 बजे यहां एयरपोर्ट पर उतरे।

कस्टम ने कर दिया क्लियरेंस से इंकार
इन सभी के हथियारों को कस्टम अधिकारियों ने क्लियरेंस देने से इंकार कर दिया और सुबह 10 बजे कस्टम कमिश्नर के आने तक इंतजार करने को कहा। कमिश्नर के नहीं आने पर भी निशानेबाजों को कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया और उन्हें इंतजार करने को कहा गया। उन्हें बताया गया कि डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस (डीआरआई) की तरफ से हरी झंडी मिलने पर ही उन्हें छोड़ा जाएगा। इस बारे में जब एनआरएआई के अध्यक्ष रनइंदर सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन स्विच ऑफ मिला।

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खाना मांगने पर किया खराब व्यवहार

एक निशानेबाज ने 'पत्रिका' से फोन पर बातचीत में बताया कि लंबी फ्लाइट की थकान के बीच एयरपोर्ट पर रोकने के बावजूद कस्टम अधिकारियों ने उन्हें कुछ खाने-पीने तक नहीं दिया। जब उन्होंने इस बारे में एक कस्टम अधिकारी से शिकायत की तो उसने बेहद रुखे तरीके से कहा, एक दिन नहीं खाओगे तो मर नहीं जाओगे। उस निशानेबाज ने आगे कहा, हम देश के लिए खेलते हैं और इस तरह का व्यवहार हमारे साथ अपने ही देश में हो रहा है।

मेरठ वैपन-मीट केस और एयरपोर्ट वैपन केस से जुड़ाव
एक निशानेबाज ने बताया कि इस सारे मामले का जुड़ाव मेरठ में पिछले दिनों प्रसिद्ध निशानेबाज प्रशांत विश्नोई के घर डीआरआई के छापे में पकड़े गए 44 से ज्यादा अवैध विदेशी हथियारों, 2 लाख से ज्यादा कारतूसों और 117 किलो हिरण का मांस व अन्य जानवरों के अंग और खाल आदि से है।

साथ ही एयरपोर्ट पर 25 पिस्टल तस्करी कर ला रहे राष्ट्रीय स्तर के निशानेबाज अनिल जगलान और अमित गोयल के मामले से भी मंगलवार के सारे घटनाक्रम का जुड़ाव है। इन दोनों मामलों में कई कस्टम अधिकारी निलंबन के बाद जांच झेल रहे हैं। इसके चलते कोई भी कस्टम अधिकारी हथियारों से जुड़े किसी भी तरह की क्लियरेंस में अपना जुड़ाव नहीं चाहता है।


अपना ही लेटर नहीं माना
इन निशानेबाजों का ये भी कहना है कि कस्टम अधिकारियों ने अपने ही विभाग की तरफ से जारी लेटर को भी मानने से इंकार कर दिया। दरअसल अभी तक नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरएआई) अपने लेटरहैड पर खिलाड़ी का नाम, उसके हथियार की डिटेल, हथियार का नंबर, मेक एवं मॉडल आदि लिखने के बाद उसके साथ हर हथियार के लाइसेंस की फोटोकॉपी, टूर्नामेंट के मेजबान देश की तरफ से जारी गन परमिट और डीजसीए की तरफ से हथियार को उड़ान में साथ ले जाने का परमिट लगाकर खिलाडिय़ों को देता है।

जिस पर खेलने के लिए जाते समय कस्टम डिपार्टमेंट अपनी मुहर लगाकर उसे ही परमिट का दर्जा दे देते हैं, जो वापसी में खिलाडिय़ों को एयरपोर्ट पर कस्टम क्लियरेंस में काम आता है। लेकिन मंगलवार को एयरपोर्ट पर मौजूद कस्टम अधिकारियों ने इस लेटर को ही असली मानने से इंकार कर दिया।

छूट गई कई की घरेलू फ्लाइट
कस्टम डिपार्टमेंट के क्लियरेंस नहीं देने के चलते इन निशानेबाजों में मौजूद कई दूसरे शहरों के निशानेबाज अपनी घरेलू फ्लाइट भी नहीं पकड़ पाए। एक निशानेबाज ने कहा, हमने 4 घंटे बाद की कनेक्टिंग होम फ्लाइट बुक करा रखी थी। लेकिन इस सारे झमेले में हम उसे भी नहीं पकड़ पाए।

तैयारी खराब होने का भी सताया डर
इसके अलावा निशानेबाजों को अपनी तैयारी खराब होने की भी चिंता सता रही थी। एक निशानेबाज ने बताया कि 17 मई से म्यूनिख में एक और विश्व कप होना है। इसके लिए हमें हर दिन कड़ी तैयारी करनी है। लेकिन आज का पूरा दिन इस सारे झमेले में खराब हो गया और अभी ये ही नहीं पता कि घर कब पहुंचेंगे और उसके बाद भी समय खराब होगा।

हमें कुछ बातों को डीआरआई के साथ स्पष्ट करना होगा और तब तक निशानेबाजों के हथियारों को क्लियर करने में देरी होगी।
- अमनदीप सिंह, अतिरिक्त कस्टम कमिश्नर, आईजी इंटरनेशनल एयरपोर्ट

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