कलयुग में प्रभु का स्मरण नहीं किया तो पछताना पड़ेगा: हेमंत भाई भंडारी

suresh mishra

Publish: Jul, 09 2017 12:29:00 (IST)

Panna, Madhya Pradesh, India
कलयुग में प्रभु का स्मरण नहीं किया तो पछताना पड़ेगा: हेमंत भाई भंडारी

जुगल किशोर मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा, ब्रह्म ज्ञान होने पर यज्ञ आदि कर्मकांडों की आवश्यकता नहीं होती। ब्रह्म ज्ञान ब्रह्म की निकटता का अनुभव कराता है।


पन्ना। भगवान जुगल किशोर मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में कथा व्यास हेमंत भाई भंडारी ने कहा कि कर्म द्वारा कर्म के बीज का नाश नहीं होता। ब्रह्म ज्ञान होने पर यज्ञ आदि कर्मकांडों की आवश्यकता नहीं होती। ब्रह्म ज्ञान ब्रह्म की निकटता का अनुभव कराता है। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए महाराजश्री ने कहा, हमाराशरीर पालकी है, आत्मा राजा है।

तीन गुण कहार है, चौथा निर्गुणी परम हंस है। तीन कहारों से परम हंस की चाल नहीं मिलती। आत्मारूपी राजाओं को वहीं बोध कराता है। उन्होंने बताया कि शास्त्रों में आए कथानकों के वेदांत को जानो।

धैर्य की आवश्यकता
गृहस्थी ही गजेन्द्र है जो माया जाल रूपी ग्रह के फंदे में पड़ा रहता है। समय रहते अगर हम आत्म द्वार के लिए प्रभु स्मरण नहीं किए तो पछताना पड़ेगा। मन ही मन्द्रिराचल है। मन का मंथन समुद्र रूप है। मंथन से सर्वप्रथम जहर ही प्राप्त होता है। इसलिए धैर्य की आवश्यकता होती है। विषयों को ज्ञानेन्द्रियों तक सीमित रखो।

हाथ आया अमृत भी निकल जाता है
कर्मेन्द्रियों को विषैला मत होने दो। आत्मा की दृष्टि सिर्फ अमृत पर होगी वही उसका गंतव्य और मंतव्य है। उन्होंने बताया कि इंद्रियों को कच्छाप रूप में बना दो, विषयों का प्रहार होने पर भी कोई असर नहीं होगा। दैत्य वृत्ति मोहानी के मोह जाल में फंस जाती है, जिससे हाथ आया अमृत भी निकल जाता है।

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