धान खरीद न होने पर किसान परेशान, अफसर बना रहे नोटबंदी का बहाना

Mukesh Kumar

Publish: Dec, 02 2016 04:28:00 (IST)

Pilibhit, Uttar Pradesh, India
धान खरीद न होने पर किसान परेशान, अफसर बना रहे नोटबंदी का बहाना

सरकारी क्रय केंद्रों पर प्रभारी का पता नहीं है कुछ दलाल केंद्र पर बिचैलियों का काम कर रहे हैं।

पीलीभीत। सरकारी धान क्रय केंद्रों पर धान खरीद न होने से किसानों की हालत खराब हो रही है। आलम यह है कि कागजों में धान सरकारी क्रय केंद्रों पर बड़े पैमाने पर धान खरीद दिखाई जा रही है। वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। केंद्रों पर एक माह बाद भी किसानों का धान मंडी में पड़़े-पड़े सड़ रहा है। धान क्रय केंद्र प्रभारी उसे तौलने से कतरा रहे हैं। पेशेवर धान माफिया का क्रय केंद्रों पर कब्जा जग-जाहिर है। केंद्रों पर प्रभारी का पता नहीं है कुछ दलाल केंद्र पर बिचैलियों का काम कर रहे हैं। वहीं अधिकारियों के बोल कुछ अलग ही हैं। धान खरीद के प्रभारी अधिकारी एडीएम कहना है कि नोटबंदी का धान खरीद पर असर पड़ा है।

क्रय केंद्र प्रभारी मांग रहे रिश्वत

पूरनपुर मंडी स्थित पर प्रथम धान क्रय केंद्र पर 14 नवंबर से लगातार धान की रखवाली कर रहे किसान रामनाथ की तबीयत बिगड़ने पर उसके बेटे विजय स्वरूप ने मंडी स्थल पहुंचकर बुधवार रात धान की रखवाली की। विजय स्वरूप ने बताया कि पिछले 14 नवंबर से धान लेकर क्रय केंद्र पर पड़े हैं। सेंटर इंचार्ज धान नमी युक्त बताकर लगातार टालमटोल कर रहे हैं। अन्य कई किसानों की भी यही समस्या बतायी जा रही है। क्रय केंद्र प्रभारी धान तोलने की एवज में रिश्वत मांग रहे हैं।

कमियां छुपाने में लगे केंद्र प्रभारी
मंडी में लगे क्रय केंद्र प्रभारी अब अपनी कमियां छुपाने में लगे हैं। उनका कहना है कि किसान जो धान लेकर मंडी लेकर आ रहे हैं, वो मानक के अनुरूप नहीं है। मंडी सभापति के निर्देश के बाद सेंटर इंचार्ज प्रभात कुमार ने 14 नवंबर से मंडी में डेरा जमाये किसान रामनाथ के धान की तौल कराई। वही मंडी सचिव प्रवीण अवस्थी का कहना है कि अगर कोई सेंटर प्रभारी खरीद में कोताही बरतता है तो कार्रवाई की जाएगी। किसान रामनाथ का धान नहीं खरीदा जा रहा उसकी उन्हे कोई जानकारी नहीं है।

नोटबंदी का खरीद पर असर

वहीं अपर जिलाअधिकारी एवं जिला धान खरीद प्रभारी अजयकांत सैनी से धान खरीद और लक्ष्य हासिल की बात की गयी। उन्होने बताया कि जनपद में धान खरीद का लक्ष्य 30 लाख मीट्रिक टन का है जिसके सापेक्ष में 8 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो चुकी है। नोटबंदी की वजह से व्यापारियों के साथ समस्या आ रही है। जब बाजार में नोट आ जाएंगे तो शायद खरीद और बढ़ जाए।


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