पलानीस्वामी TN के 29वें CM, 15 दिनों में साबित करना होगा बहुमत 

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पलानीस्वामी TN के 29वें CM, 15 दिनों में साबित करना होगा बहुमत 

AIADMK विधायक दल के नेता ई पलानीस्वामी ने राज्य के 13वें सीएम के तौर पर शपथ ले ली है। उनके साथ 30 एनी मंत्रियों ने भी शपथ ली। 

चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में पिछले कई दिनों से जारी घमासान पर विराम लगता नजर आ रहा है। गुरुवार को राज्यपाल विद्यासागर राव के न्यौते पर AIADMK विधायक दल के नेता ई पलानीस्वामी ने राज्य के 29वें सीएम के तौर पर शपथ ले ली है। उनके साथ 30 एनी मंत्रियों ने भी शपथ ली। अब उन्हें 15 दिनों के अंदर विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा। इससे पहले पलानीस्वामी ने साढ़े ग्यारह बजे राज्यपाल से मुलाकात की थी। 


और किसने ली शपथ ?

पलानीस्वामी के साथ 30 अन्य मंत्रियों ने शपथ की। इसमें जयकुमार समेत AIADMK के कई बड़े नेता भी शामिल हैं। 

क्यों पलानीस्वामी को बनाया गया सीएम ?

पलानीस्वामी, स्वर्गीय जयललिता के अलावा शशिकला के वफ़ादार माने जाते हैं। वे चार बार विधायक रहे हैं और पिछड़े वर्ग (गौडर समुदाय) से आते हैं। शशिकला पिछड़ों में थेवर समुदाय से आती हैं। ये दोनों जातियां AIADMK का वोटबैंक मानी जाती हैं।

कैसे बहुमत साबित करेंगे नए CM 

माना जा रहा है कि पलानीस्वामी बहुमत साबित करने में कामयाब हो जाएंगे। पार्टी के करीब 120 विधायकों ने उन्हें लिखित समर्थन का पत्र सौंपा है। ये विधायक बहुमत साबित होने तक महाबलीपुरम के रेसॉर्ट में ही रुकेंगे। उनके विरोधी पनीरसेल्वम के पास विधायकों का ऐसा कोई आंकड़ा नहीं है।  पार्टी के महज 15-20 विधायक ही खुलकर उनके पक्ष में हैं। 
राज्यपाल से मुलाक़ात कर सौंपा 120 विधायकों का समर्थन पत्र 

क्या कर सकते हैं पनीरसेल्वम 

पनीरसेल्वम शक्ति परीक्षण में नई सरकार के खिलाफ वोट करेंगे। पार्टी के दूसरे और विधायकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे। पीएमके ने उन्हें पहले ही सपोर्ट दिया है। डीएमके और दूसरी पार्टियों की मदद से हो सकता है वे शक्ति परीक्षण में पलानीस्वामी को कामयाब न होने दें। हालांकि यह शक्ति परीक्षण के दिन ही साफ़ हो पाएगा।  

सुबह राज्यपाल से मिले थे पलानीस्वामी 

गुरुवार सुबह पलानीस्वामी ने राज्यपाल से मुलाक़ात कर AIADMK के करीब 120 विधायकों का समर्थन पत्र उन्हें सौंपा। यह बता दें कि जयललिता के निधन, AIADMK की महासचिव के रूप में शशिकला का चुना जाना और बाद में शशिकला के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की वजह से तमिलनाडु में कई दिनों से राजनीतिक गतिरोध बना हुआ था। कभी जयललिता और शशिकला के वफादार पनीरसेल्वम की बगावत के बाद तमिलनाडु में यह संकट गहरा गया था। 

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