सज्जन के अमृतसर दौरे के दौरान खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी 

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सज्जन के अमृतसर दौरे के दौरान खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी 

कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन के गुरुवार को पंजाब दौरे के दौरान सिख चरमपंथियों ने खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी की और स्वर्ण मंदिर के बाहर शिरोमणि गुरुद्वारा (एसजीपीसी) प्रबंधन समिति के कार्यबल के स्वयंसेवियों से भी भिड़ गए। 

अमृतसर. कनाडा के रक्षा मंत्री हरजीत सिंह सज्जन के गुरुवार को पंजाब दौरे के दौरान सिख चरमपंथियों ने खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी की और स्वर्ण मंदिर के बाहर शिरोमणि गुरुद्वारा (एसजीपीसी) प्रबंधन समिति के कार्यबल के स्वयंसेवियों से भी भिड़ गए। ये प्रदर्शनकारी कट्टरपंथी शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) और अन्य चरमपंथी संगठनों के थे और स्वर्ण मंदिर के बाहर खड़े रहे। इनके हाथों में सज्जन का स्वागत और पंजाब सरकार की आलोचना वाले पोस्टर, बैनर और प्लेकार्ड थे। सज्जन जैसे ही स्वर्ण मंदिर पहुंचे, इन्होंने खालिस्तान के समर्थन में नारेबाजी करनी शुरू कर दी। हालांकि, एसजीपीसी कार्यबल के सदस्यों ने इन्हें सज्जन के पास जाने से रोक दिया।

कनाडाई रक्षा मंत्री ने चरमपंथियों को किया नजरअंदाज
हालांकि, कनाडा के रक्षा मंत्री ने चरमपंथी तत्वों को नजरअंदाज किया। इस दौरान एसजीपीसी के अध्यक्ष किरपाल सिंह बडूंगर सहित संगठन के अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया। सज्जन ने स्वर्ण मंदिर में मत्था टेका और लगभग एक घंटे तक वहीं रहे। उन्होंने परिक्रमा भी की और कुछ देर बैठे। इस दौरान एसजीपीसी ने यह सुनिश्चित किया कि चरमपंथी तत्व गुरुद्वार परिसर के अंदर किसी तरह की असहज स्थिति पैदा नहीं कर सकें। सज्जन किसी पश्चिमी देश के रक्षा मंत्री बनने वाले पहले सिख हैं। गुरुद्वारा परिसर में एसजीपीसी ने सज्जन (46) को सिरोपा और स्वर्ण मंदिर की प्रतिकृति और एक तलवार भी भेंट की। सज्जन बुधवार शाम को ही यहां पहुंच गए थे। 

मुख्यमंत्री अमरिंदर के बयान से पहले ही हो चुका है विवाद
पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा उन्हें खालिस्तानी समर्थक बताने से विवाद हुआ था। हवाईअड्डे पर जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनकी अगुवाई की। श्री गुरु रामदास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे के बाहर सज्जन के स्वागत में बैनर लिए कुछ कट्टरपंथी समूह के सदस्य भी खड़े थे। हरजीत सिंह सज्जन का परिवार होशियारपुर से 15 किलोमीटर दूर बामबेली गांव का रहने वाले हैं। उनका परिवार 1970 के मध्य में कनाडा जाकर बस गया था। उस समय सज्जन की उम्र मात्र पांच वर्ष थी। सज्जन अपने पैतृक गांव का भी दौरा कर सकते हैं।

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