मिलों की क्षमता पर संदेह, उपभोक्ता संरक्षण के संचालक ने दिए जांच का आदेश

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Feb, 16 2017 03:05:00 (IST)

Raigarh, Chhattisgarh, India
मिलों की क्षमता पर संदेह, उपभोक्ता संरक्षण के संचालक ने दिए जांच का आदेश

धान के कस्टम मिलिंग के लिए राइसमिलरों द्वारा कराए गए अनुबंध में गलत जानकारी दिए जाने की बात सामने आ रही है। इसको लेकर खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण के संचालक एनएन एक्का ने एक आदेश जारी करते हुए राइसमिलरों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का जांच करने के लिए कहा है।

रायगढ़. धान के कस्टम मिलिंग के लिए राइसमिलरों द्वारा कराए गए अनुबंध में गलत जानकारी दिए जाने की बात सामने आ रही है। इसको लेकर खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण के संचालक एनएन एक्का ने एक आदेश जारी करते हुए राइसमिलरों द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का जांच करने के लिए कहा है।
 
धान खरीदी शुरू होने के साथ ही साथ राइसमिलों से कस्टम मिलिंग करने पंजीयन भी शुरू हो जाता है। जिले में 107 राइसमिलों ने अनुबंध कराया है। इसके लिए क्षमता की जानकारी भी दी गई है। निर्देश में कहा गया है कि 2015-16 और 2016-17 में मिलरों द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों का परीक्षण करने, वास्तविक रूप से क्षमता जानने के लिए भौतिक रूप से मिलिंग कराने को कहा गया है ताकि वास्तविक मिलिंग सामने आ सके। सूत्र बताते हैं कि जिले के कई राइसमिलों ने भी क्षमता कम करते हुए जानकारी दिया गया है हांलाकि विभाग के अधिकारियों की माने तो जिले में अभी तक एक भी राइसमिल का नाम सामने नहीं आने की बात कही जा रही है।

हांलाकि सूत्र बताते हैं कि विभाग ने इस मामले में गोपनीय रूप से जांच करने का काम शुरू कर दिया गया है। हांलाकि अभी तक भौतिक सत्यापन कराने का काम चालू नहीं किया गया है। ऐसे में जल्द ही यह आरंभ कर दिया जाएगा। हलांकि अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि यह निर्देश अन्य जिलों के लिए दिया गया है। पर यहां भी जांच की कार्रवाई की जाएगी।

उद्योग विभाग से भी लेंगे प्रमाण पत्र- राइसमिलरों द्वारा पेश किए गए क्षमता का मिलान करने के बाद उद्योग विभाग से भी उक्त मिलों के क्षमता की जानकारी लेने कहा गया है। इसके पीछे कारण यह है कि उद्योग विभाग में जांच कर क्षमता का प्रमाण पत्र दिया जाता है।

इस कारण घटाते हैं क्षमता- जानकार बताते हैं कि राइसमिलर धान खरीदी के सीजन में कस्टम मिलिंग के लिए कम क्षमता बताते हैं ताकि बिचौलिए व अन्य किसानों से भी कम दाम में लिए गए धान का मिलिंग कर उससे लाभ कमा सके।

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