आरटीआई में पूछा कितना बकाया है मनरेगा का, तो जिला पंचायत ने कहा नहीं है पता

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Dec, 01 2016 04:07:00 (IST)

Raigarh, Chhattisgarh, India
आरटीआई में पूछा कितना बकाया है मनरेगा का, तो जिला पंचायत ने कहा नहीं है पता

जिला पंचायत को इस बात की जानकारी नहीं है कि जिले में मनरेगा के तहत कितनी मजदूरी का बकाया है।

रायगढ़. जिला पंचायत को इस बात की जानकारी नहीं है कि जिले में मनरेगा के तहत कितनी मजदूरी का बकाया है। इस बात का आरोप छजकां के नेता बजरंग अग्रवाल ने लगाया है।

 अग्रवाल ने कहा कि भारत की अति महत्वपूर्ण महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना का छत्तीसगढ़ राज्य में बुरा हाल है। दो साल से भी ज्यादा समय से मनरेगा मजदूरों का भुगतान बकाया है जो कि लगभग हर जिले में करोड़ों रुपया है।

राज्य सरकार भुगतान देने के लिए केन्द्र से गुहार लगा रही है किंतु केन्द्र सरकार ने मजदूरों की बकाया मजदूरी का भुगतान शायद उचित नहीं समझा और दो साल से भुगतान लटका पड़ा है।

अब तो स्थिति यह है कि सूचना का अधिकार और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को जिला पंचायत रायगढ़ कितनी गंभीरता से ले रही है जहां उसे पता ही नहीं है कि जिले में मनरेगा मजदूरों का कितना भुगतान बकाया है।

 आरोप लगाते हुए छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं बजरंग अग्रवाल ने कहा है कि जिला पंचायत रायगढ़ को मनरेगा की बकाया मजदूरी के संबंध में जानकारी नहीं होना अत्यंत चिंताजनक एवं गंभीर बात है।

क्योंकि जिले के ग्रांम पंचायतों को मनरेगा के तहत कार्योंं की स्वीकृति जिला पंचायत ही देती है तथा उसे यह भी मालूम है कि जो कार्य उसने स्वीेकृत किये हैं उसकी राषि ग्रांम पंचायत को दी है या नहीं।

अत: जिला पंचायत द्वारा सूचना का अधिकार के तहत दिये गये आवेदन में यह कहना कि जानकारी उनके पास नहीं है अत्यंत हास्यस्पद है।

    छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस (जोगी) के वरष्ठि नेता अग्रवाल ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत उनके आवेदन में जानकारी देने से कतरा रही है इसीलिये लिखाकर दे दिया कि आवेदित जानकारी उनके कार्यालय से संबंधित नहीं है।

उन्होने अपने जवाब में यह भी लिखा है कि आवेदन एक ही विषय पर हो तभी जानकारी दिया जाना संभव है। इसी जवाब में जिला पंचायत ने लिखा है कि चाही गई जानकारी मनरेगा के वेब साईट में उपलब्ध है।

    आम आदमी के सेवक श्री अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि जिला पंचायत कार्यालय द्वारा सूचना का अधिकार कानून को गंभीरता से नहीं लिया गया है।                

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