बच्चों के जान से हो रहा खिलवाड़, कीड़ा युक्त पानी पीने की मजबूरी

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Feb, 17 2017 12:55:00 (IST)

Raigarh, Chhattisgarh, India
बच्चों के जान से हो रहा खिलवाड़, कीड़ा युक्त पानी पीने की मजबूरी

शालेय शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत विभिन्न स्कूलों में कई तरह के प्रयोग एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बरमकेला. शालेय शिक्षा गुणवत्ता अभियान के अंतर्गत विभिन्न स्कूलों में कई तरह के प्रयोग एवं प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

सरकार स्कूली विद्यार्थियों के बौद्धिक क्षमता एवं विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। बच्चों को स्वस्थ और निरोगी बनाए रखने के लिए स्वास्थ्य परीक्षण करना,

कृमि दिवस मनाना, आयरन एवं विटामिन खिलाना जैसे कार्यों का निष्पादन किया जा रहा है तो दूसरी तरफ बरमकेला विकास खण्ड के ग्राम झनकपुर के प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला के विद्यार्थियों का दुर्भाग्य है

जो गंदी पोखरी या हेण्डपम्प से निकलने वाले कीड़ेयुक्त पानी का उपयोग करने पर मजबूर हैं। इसकी जानकारी स्कूल के प्रधान पाठक द्वारा अपने स्तर पर संकुल समन्वयक,

संकुल प्रभारी, बीआरसी, बीईओ, सीईओ तथा पीएचई विभाग को दे चुके हैं फिर भी इनके द्वारा आज तक पानी की व्यवस्था न करना मानो किसी बड़ी घटना का ही इंतजार की जा रही है।

    शासकीय प्राथमिक शाला एवं पूर्व माध्यमिक शाला झनकपुर का शाला भवन ग्राम से लगभग 1 से डेढ़ किमी दूर बना हुआ है। इस परिसर में प्राथमिक शाला के जल उपयोग हेतु एक हैंडपंप खुदवाया गया है।

जिसमें पिछले 3-4 वर्षों से कीड़े निकल रहे हैं। इसकी जानकारी प्रधान पाठक, संकुल समन्वयक एवं संकुल प्रभारी द्वारा हमेषा से दी जा रही है।

पीएचई विभाग द्वारा कीटनाशक दवाई डालकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर दी जाती है। माध्यमिक शाला के लिए एक हेण्डपम्प खुदवाया गया जिसमें एकबूंद पानी नहीं निकला, ऐसे में सरपंच द्वारा विरोध करते हुए अधिक खुदाई की मांग करने पर भी विभाग ने खुदाई नहीं की और हेण्डपम्प सूखा है।

ये है स्थिति

झनकपुर में 78 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं इनके मध्यान्ह भोजन, शौचालय प्रयोग, हाथ धोने, बर्तन धोने के लिए प्रतिदिन पानी आवश्यकता पड़ती है।

शाला के पास में एक डबरी है जिसका पानी गंदा हो गया है फिर भी विद्यार्थी इस पानी का प्रयोग करने को मजबूर होते हैं। क्या विद्यार्थियों को अपने नियमित उपयोग के लिए डेढ़ किमी दूर से पानी लाना पड़ता है।
 
निदान आज तक नहीं किया गया
पिछले 3 वर्षों से हमने अपने स्तर पर इसकी जानकारी लिखित एवं मौखिक तौर पर देते आ रहे हैं। फिर भी इसका निदान आज तक नहीं किया गया है।
जिससे हमारे बच्चों को या तो डेढ़ किमी. दूर से पानी लाना पड़ता है या फिर मजबूरन कीड़ायुक्त पानी का उपयोग करना पड़ता हैं-
प्रधान पाठक श.मा.शाला झनकपुर

समाधान नहीं किया जाता
समय रहते अधिकारियों द्वारा समाधान नहीं किया जाता है और जब कोई घटना घट जाती है तभी पूरा अमला को लगाया जाता है। ऐसे में क्या फायदा। सूचना के बावजूद आज तक समाधान न होना दुर्भाग्यपूर्ण है-
 मनोज नायक, निवासी, झनकपुर

क्या कहते हैं अधिकारी-
1.इसकी जानकारी मुझे नहीं है ऐसा कुछ है तो मैं दिखवाता हॅंू-
मुख्य कार्यपालन अधिकारी,ज.पं.बरमकेला

2.कल ही इसकी जानकारी मुझे हुई है मै कल डीईओ को बताकर कोई न कोई समाधान कराता हूं-
-बी.ई.ओ. बरमकेला

3.अपने स्तर पर हमने प्रयास किया है वहां 300 फिट तक दूसरे हेण्डपम्प के लिए खोदाई की गई थी। इससे ज्यादा हम खोद नहीं सकते हैं। बरमकेला क्षेत्र के अधिकांश जगहों पर 300 फिट से नीचे पानी का लेबल है इसलिए वहां ज्यादा गहराई तक खुदाई करने की आवश्यकता है-
उपयांत्रिकी पी.एच.ई सारंगढ़

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