भरभराकर गिरा छत का प्लास्टर, बाल-बाल बचीं 15 बेटियां

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Jul, 18 2017 04:38:00 (IST)

Raigarh, Chhattisgarh, India
भरभराकर गिरा छत का प्लास्टर, बाल-बाल बचीं 15 बेटियां

जिले के धरमजयगढ़ की १५ बेटियां खुशकिस्मत थीं, वरना जो हादसा  टला है उससे तो पूरे नगर में मातम का आलम होता। हलांकि इस घटना का भय कक्षा ११ वीं की इन छात्राओं में स्पष्ट देखा जा रहा है

रायगढ़. जिले के धरमजयगढ़ की १५ बेटियां खुशकिस्मत थीं, वरना जो हादसा  टला है उससे तो पूरे नगर में मातम का आलम होता। हलांकि इस घटना का भय कक्षा ११ वीं की इन छात्राओं में स्पष्ट देखा जा रहा है, ये सहमी हुई हैं।

मामला धरमजयगढ़ के जेलपारा स्थित जेल पारा स्थित शासकीय कन्या स्कूल का है। जब दिन के लगभग दो बजे कक्षा ११ वीं की पढ़ाई चल रही थी और उस क्लास में १५ छात्राएं बैठी हुई थीं।

इसके बाद तो अचानक छत का प्लास्टर भरभरा कर गिर गया। जिस समय ये घटना हुई कक्षा 11की छात्राएं लगभग 15 की संख्या में  अपने क्लास में कॉमर्स विषय की पढाई कर रही थीं।

छत के प्लास्टर के बड़े हिस्से के गिरने के साथ ही वहां हाहाकार की स्थिति बन गई थी, क्लास में भगदड़ मच गई। छात्राओं ने बताया कि वो पढ़ाई में मशगुल थीं कि तभी अचानक कुछ आवाज़ के साथ उस कमरे का छत का सीलिंग फटकर गिरने लगी।

अचानक हुए हादसा से किसी को कुछ समझ नहीं आया पढाई कर रही छात्राओं में अफरा तफरी मच गई। इस घटना से क्लास में पढ़ा रहे टीचर के सिर में काफी चोट आई है वहीं कुछ छात्राएं भी घायल हुई हैं।

ये तो गनीमत रही कि इस हादसे में किसी प्रकार की जनहानि या बड़ी दुर्घटना नहीं हुई। वरना इस हादसे में जान  भी जा सकती थी इसके बाद तो पूरे नगर में मातम का आलम होता।

विदित हो कि ये स्कूल लंबे समय से जर्जर भवन में संचालित हो रहा है। यह बात स्थानीय प्रशासन की जनकारी में थी, इसके बावजूद भवन की मरम्मत की दिशा में कोई कारगर उपाय नहीं किया गया। स्थिति यह है कि अपनी जान को जोखिम में डालकर जहां छात्राएं पढऩे को मजबूर हैं वहीं शिक्षक पढ़ाने को मजबूर हैं।

पहुंचे नेता और अधिकारी- इस घटना की जनकारी मिलते ही धरमजयगढ़ एसडीएम नम्रता डोंगरे और विकासखंड शिक्षाधिकारी भी मौका मुआयना करने पहुंचे और स्कूल भवन का बारीकी से जायज़ा लिया।

हलांकि गुस्साए लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि ये काम पहले भी किया जा सकता था पर दुर्घटना के बाद निरीक्षण किया जा रहा है।

पत्रिका ने उठाया था मामला
- विदित हो कि लगभग 20 दिनों पूर्व  भी इस  जीर्ण-शीर्ण भवन में चल रहे स्कूल और उससे बना भय और परेशानी की खबर को पत्रिका ने प्रमुखता से प्रकाशित की थी।

इसके बाद भी कोई संज्ञान या फिर बचाव के उपाय नहीं किए गए थे। जब मौके पर पहुंचे अधिकारियों पर लोगों का गुस्सा फूटा तो बीईओ ने यह कहकर अपना बचाव किया कि हरसाल जीर्ण शीर्ण भवन के लिए लगभग 40 लाख रूपए का स्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाता है लेकिन आज तक शासन से स्वीकृति नहीं मिली है.पैसे के अभाव में भवन की मरम्मत निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा है।                                               

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