अनाधिकृत पानी के दम पर शहर में चल रही है जलआवर्धन योजना

Piyushkant Chaturvedi

Publish: Oct, 19 2016 12:59:00 (IST)

Raigarh, Chhattisgarh, India
अनाधिकृत पानी के दम पर शहर में चल रही है जलआवर्धन योजना

सिंचाई विभाग ने नगर निगम रायगढ़ को नोटिस देकर इस बात की जानकारी मांगी है कि निगम किस-किस स्रोत से पानी ले रहा है।

रायगढ़. सिंचाई विभाग ने नगर निगम रायगढ़ को नोटिस देकर इस बात की जानकारी मांगी है कि निगम किस-किस स्रोत से पानी ले रहा है।
मजे की बात यह है कि नगर निगम की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। इसके बाद निगम को रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। दरअसल मुख्य अभियंता की ओर से अप्रैल 2015 में एक पत्र रायगढ़ जल संसाधन विभाग को भेजा गया था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने इसे निगम को भेजा है।

वहीं दूसरा पहलू यह है कि जलआवर्धन योजना के लिए केलो नदी से पानी लेने के मामले में ङ्क्षसचाई विभाग ने नगर निगम पर तीन गुना पेनाल्टी के साथ 31 लाख रुपए का बिल थमा दिया है।

जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार जला आवर्धन योजना में केलो नदी से पानी लेने के लिए निगम का कोई अनुबंध जल संसाधन विभाग से नहीं है।

ऐसे में विभाग ने अप्राधिकृत रूप से भू-जल उपयोग अधिनियम 1911 की धारा 44 के नियम 73 के तहत तीन गुना पेनाल्टी जोड़ते हुए 31 लाख 97 हजार 548 रुपए का बिल निगम पर ठोंक दिया है। दरअसल नगर निगम की ओर से जल आवर्धन योजना के लिए गोवर्धनपुर के पास केलो नदी से पानी लिया जाता है।

बोर और नदी से पानी लेता है निगम
विभाग की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब निगम ने नहीं दिया है। जानकारों का कहना है कि पानी किसी भी माध्यम से लिया जाए यदि उसका व्यवसायिक इस्तेमाल किया जाता है

तो उस पर अधिकार जलसंसाधन विभाग का होता है। यदि जल आवर्धन योजना से पहले की बात करें तो लगभग सभी वार्ड में बोर के माध्यम से पानी की सप्लाई होती थी।

वहीं शहर के कुछ इलाकों में केलो नदी का पानी इंटेकवेल के माध्यम से दिया जाता था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शहर के वार्डों में लगभग 615 बोर के माध्यम से पानी की सप्लाई होती थी।

जनहित का मसला
निगम की ओर से सप्लाई की जाने वाली पानी केलो से ली जा रही है। ऐसे में पानी जन सुविधा से जुड़ा हुआ है। जब इस मामले के जानकारों से बात की गई तो उनका कहना था

 कि बेशक यह मामला जनसुविधा का है इसलिए जो दर विभाग ने लगाया है वह जनसुविधा का ही है 50 पैसे की दर ली जा रही है। लेकिन यदि आप केलो से पानी लेकर उसका व्यवसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं खासकर जहां से पानी लिया जा रहा है वहां कोई कर शासन के नियमानुसार नहीं दिया जा रहा है

लेकिन उसी पानी की कीमत या टैक्स जब लोगों से वसूला जा रहा है और टैक्स नहीं देने पर कनेक्शन काट दी जाती है, एफआईआर करवाने का प्रावधान हो तो यह मामला गंभीर हो जाता है।

निगम ने दिया है हिसाब
पेनाल्टी ठोंके जाने से पहले नगर निगम से जल आवर्धन योजना के लिए लगाए गए बोर और इससे लिए जा रहे पानी की मात्रा के विषय में जानकारी मांगी थी।

 इसके बाद निगम की ओर से बताया गया कि केलो नदी पर गोवर्धनपुर में 60 एचपी का वीटीपी पंप लगाया गया है। जिसकी क्षमता 112 लीटर प्रति सेकेंड है।  साथ ही निगम की ओर से मार्च 2015 से जनवरी 2016 तक लिए गए पानी का हिसाब दिया है।

कहा लगवाओ मीटर
पानी का हिसाब मिलने के बाद विभाग ने फौरी तौर पर उसे मान लिया है पर जल संसाधन विभाग की ओर से इस बात की भी सूचना दी गई है कि आप जहां से भी पानी ले रहे हैं

 वहां पर मीटर लगवाएं ताकि इस बात को नोट किया जा सके कि कितना पानी लिया जा रहा है। उस हिसाब से जल संसाधन विभाग अपना जलकर अधिरोपित कर सके। लेकिन इस मामले में भी कोई सुगबुगाहट नहीं दिख रही है।

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