IAS ने पूछा सवाल- पंडित दीनदयाल कौन थे? जवाब में छपवा दी 5 करोड़ किताबें

Raipur, Chhattisgarh, India
IAS ने पूछा सवाल- पंडित दीनदयाल कौन थे? जवाब में छपवा दी 5 करोड़ किताबें

कांकेर जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ शिव अनंत तायल ने बीते दिनों फेसबुक पर एक सवाल किया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय कौन थे, उनकी उपलब्धि क्या थीं?

मधुकर दुबे/रायपुर. कांकेर जिला पंचायत के तत्कालीन सीईओ शिव अनंत तायल ने बीते दिनों फेसबुक पर एक सवाल किया कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय कौन थे, उनकी उपलब्धि क्या थीं? आईएएस का यह सवाल शासन को इतना खटका कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की उपलब्धियों की जानकारी देने के लिए 5 करोड़ की किताबें छपवा दी गर्इं। वह भी बिना टेंडर निकाले।

फेसबुक वॉल की इस टिप्पणी के कारण तायल को कांकेर से हटाकर मंत्रालय में अटैच कर दिया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी पर पंचायतों की मूलभूत राशि से 13 करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना दी गई और उनकी जीवनी पर आधारित 15 खंड की किताब भी प्रकाशित करवा दी गई जबकि, नियम के मुताबिक इसके लिए टेंडर निकालना चाहिए था। लेकिन गुपचुप तरीके से 5 करोड़ रुपए खर्च कर 10 हजार 971 पुस्तकों का प्रकाशन दिल्ली के प्रभात प्रकाशन से करा दिया गया। जिम्मेदारों की दलील है, जो भी हुआ है, वह शासन के निर्देश पर ही हुआ है।

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पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय को 25 सिंतबर को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशताब्दी मनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके लिए आनन-फानन में एक समिति का गठन भी कर लिया गया। इसमें प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक पुस्तक देने का फैसला किया गया, जिसे पंचायत के आत्मानंद वाचनालय को सौंपा जाएगा।

पंचायतों की मूलभूत राशि से खर्च पर सवाल
पत्रिका की पड़ताल में पता चला कि पंचायत की मूलभूत मद की राशि से खर्च की भरपाई करने की तैयारी भी कर ली गई। यह सुगबुगाहट होते ही विपक्षी पार्टियां भी इसे मुद्दा  बनाने में जुट गई हैं। उनका कहना है कि पंचायत की मूलभूत राशि को किसी भी महापुरुष के नाम पर नहीं, बल्कि विकास योजनाओं पर खर्च होनी चाहिए।

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बिना टेंडर पुस्तक छपवाना गलत नहीं
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्म शताब्दी मनाने के लिए शासन से निर्देश मिला है। बिना टेंडर पुस्तक छपवाना कोई गलत नहीं है। इसके लिए 5 करोड़ खर्च किया गया है। बची हुई राशि से अन्य कार्यक्रम होंगे।
एमके राउत, अपर मुख्य सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय

बाकी राशि एेसे करेंगे खर्च

पुस्तक की छपाई के खर्चे से बचे 8 करोड़ रुपए सिर्फ जन्म शताब्दी पर जिला पंचायतों और ग्राम पंचायतों में खर्च करने को हरी झंडी मिल गई है। इस दिन गांवों में लोगों को पं. दीनदयालय की जीवनी के बारे में बताया जाएगा। सांस्कृतिक कार्यक्रम और पोस्टर बैनर पर खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक ग्राम सभा के मूलभूत मद की राशि से पुस्तक और समारोह आयोजित करने के नाम पर मंत्रालय से राशि जारी करते समय कटौती कर ली जाएगी।
इसे खर्च की गई राशि में समायोजित किया जाएगा।

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