अद्भूत है छत्तीसगढ़ की काशी नगरी, साक्षात विराजते हैं बाबा विश्वनाथ

Raipur, Chhattisgarh, India
अद्भूत है छत्तीसगढ़ की काशी नगरी, साक्षात विराजते हैं बाबा विश्वनाथ

यहां से 18 किमी दूर आरंग के नवागांव में भी काशी नगरी है, जहां पर बाबा विश्नाथ की पूजा की जाती है। इस गांव में काशी विश्वनाथ जैसी गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

 रायपुर. यहां से 18 किमी दूर आरंग के नवागांव में भी काशी नगरी है, जहां पर बाबा विश्नाथ की पूजा की जाती है। इस गांव में काशी विश्वनाथ जैसी गहरी आस्था जुड़ी हुई है। यहां के लोगों का काशी नगरी से काफी लगाव है। गांव में आने पर आप बनारस जैसा ही अनुभव करेंगे। गांव में 18वीं सदी का भगवान विश्वनाथ का मंदिर आस्थ का केंद्र है। सावन मास शुरू होने के साथ ही अनेक स्थानों से श्रद्धालु भगवान का अभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना करने पहुंचते हैं। जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और रुद्राभिषेक कर अपनी मुरादें पूरी करते हैं। मान्यता है कि भगवान विश्वनाथ के दर्शन मात्र से सभी तरह के दुख दूर हो जाते हैं।

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पुरातात्विक महत्व के अनुसार भगवान विश्वनाथ का यह मंदिर राजा-महाराजाओं के जमाने में ईटों से बना हुआ है। उसी स्थान पर अवशेष मिला था, जहां पर भगवान शिवलिंग स्थापित है। मंदिर के सर्वराकार बालमुकुंद अग्रावाल बताते हैं कि आरंग के सीता बगीचा में 400 वर्ष पुराने इस मंदिर के अवशेष प्राचीनता के गवाह हैं। कभी यह स्थान साधु-संत मंदिर में आकर तंत्र-मंत्र की सिद्धि करते थे। यह स्थान सिद्धी प्राप्त करने का केन्द्र बिंदु था । यहां मंदिर में 345 वर्ष पहले तीन साधुओं ने समाधि लिया था। गर्भगृह के पास एक गुफानुमा कमरे में आज भी वहां दिन-रात ज्योति जलती है ।

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50 खंभे, 6 चक्र बढ़ाते हैं शोभा

एक समाधि बगीचे में और दूसरी समाधि तालाब के किनारे है। अग्रवाल बताते हैं कि 50 खंबे 6 चक्र शोभायमान हैं। मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव, पार्वती के साथ रूद्र के अवतार भैरव विराजमान हंै। शिवलिंग के ऊपर गणेश जी की मनोहारी प्रतिमा का दर्शन मंदिर में प्रवेश करते होता है।

भैरव बाबा का मंदिरा से अभिषेक
भैरव बाबा का प्रतिदिन मदिरा से भक्तों द्वारा अभिषेक किया जाता है। शिव जी की पूजा सुबह 5 बजे से आरंभ होती है, शाम को वैदिक विधान से अभिषेक किया जाता है। सावन मास और महाशिव रात्रि पर्व पर यहां भक्तों की भीड़ बढ़ जाती है । वर्ष 2015 में 1008 शिवलिंग की स्थापना मंदिर के गर्भगृह के सामने की गई है। वे विगत 15 सालों से निवास छोड़कर भगवान की सेवा में लगे हुए हैं।





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