WHO की ताजा रिपोर्ट, दिल्ली को पीछे छोड़ रायपुर सबसे प्रदूषित शहर

Chandu Nirmalkar

Publish: Dec, 02 2016 09:21:00 (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
WHO की ताजा रिपोर्ट, दिल्ली को पीछे छोड़ रायपुर सबसे प्रदूषित शहर

राजधानी रायपुर और ग्वालियर में वायु प्रदूषण के नए आंकड़ों ने दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। यह आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन ने  ताजा रिपोर्ट में जारी किए हैं

अनिल अश्विनी शर्मा/नई दिल्ली/रायपुर. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और ग्वालियर में वायु प्रदूषण के नए आंकड़ों ने दिल्ली को पीछे छोड़ दिया है। यह आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन ने  ताजा रिपोर्ट में जारी किए हैं। संगठन ने दुनियाभर के सोलह सौ शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को जांचा है, इसमें भारत के कुल आठ शहर शामिल हैं। उनमें ग्वालियर और रायपुर की हवा दिल्ली से भी खराब निकली है। इलाहाबाद, पटना, लुधियाना, कानपुर, लखनऊ और फिरोजाबाद उन शहरों में शामिल हैं, जहां प्रदूषण फैलाने वाले खतरनाक कणों की मौजूदगी सुरक्षित सीमा से काफी अधिक पाई गई है। वायु प्रदूषण भारत में मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण है, जहां श्वसन संबंधी खतरनाक बीमारियों से मरने वालों की संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोगों को निगलने वाली इस मुसीबत से निपटने को लेकर भारत में की गई अब तक की प्रशासनिक कार्रवाई नाकाफी है, इसलिए इस समस्या पर नियंत्रण के लिए एक दीर्घकालिक रक्षात्मक रणनीति बनानी होगी।

छोटे शहर वायु प्रदूषण की चपेट में

रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्दियों में अधिकांश उत्तर भारतीय शहरों में वायु प्रदूषण का स्तर नई ऊंचाइयों पर पहुंच जाएगा, जहां पहले से ही वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर है। चूंकि राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता का स्तर दुनिया में बेहद खराब है, इसलिए उस पर ध्यान दिया जाता है लेकिन अध्ययन में यह बात निकलकर आई है कि अपेक्षाकृत भारत के तमाम छोटे लेकिन घनी आबादी वाले शहरों में हालात अब बेहतर नहीं हैं। आम धारणा के उलट फसल अवशेष जलाने से निकलने वाला धुंआ दिल्ली और अन्य उत्तर भारतीय शहरों में सबसे बड़ा प्रदूषक कारक नहीं है। अध्ययन के अनुसार दिल्ली सहित रायपुर और ग्वालियार में सर्दियों में होने वाले वायु प्रदूषण में धूल और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन के बाद यह तीसरा कारक है। तमाम अन्य कारक भी वायुमंडल को प्रदूषित कर रहे हैं। जैसे शहरी कचरे को जलाना और गिरती पत्तियों को जलाना, शहरी सीमाओं के भीतर जमीन के बड़े हिस्से पर चारों ओर बिखरा कचरा, सड़कों पर झाड़ू लगाने से उठने वाली धूल का हवा में मिलना, खाना पकाने के लिए प्रदूषणकारी ईंधन का उपयोग, ताप बिजली संयंत्रों की मौजूदगी और शहरों के इर्द-गिर्द प्रदूषणकारी उद्योगों की उपस्थिति अहम है।

कचरा प्रबंधन की प्रभावी भूमिका

प्रदूषण के अधिकांश कारक ऐसे हैं, जिनका प्रबंधन करना भी बहुत मुश्किल नहीं है। सड़कों की यांत्रिक (वैक्यूम क्लीनर) सफाई और शहर के खाली पड़े इलाकों में वृक्षारोपण कर धूल की समस्या को कुछ हद तक कम किया जा सकता है। गिरती पत्तियों को जलाने पर दंडात्मक कार्रवाई के जरिये अंकुश लगाया जा सकता है। नियमित प्रदूषण नियंत्रण और यातायात के बेहतर प्रबंधन से सड़कों पर जाम की समस्या को कम कर वाहन उत्सर्जन को आसानी से कम किया जा सकता है। साथ ही शहरों से प्रदूषणकारी उद्योगों और बिजली संयंत्रों के अलावा कूड़े के ढेरों को हटाया जाना चाहिए।

प्रदेश में प्रदूषण रोकने

ये प्रयास हुए शुरू
पर्यावरण का नियम नहीं मानने पर 60 ऑटोमोबाइल प्रतिष्ठानों को नोटिस।
31 दिसम्बर तक सभी जिलों में शुरू होंगे वाहनों के प्रदूषण जांच केंद्र।
खुले में कचरा जलाने पर रोक।
44 रोलिंग मिल्स को ऑनलाइन इमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम ना लगाये जाने के कारण बंद करने सहित उनकी बिजली काटने के निर्देश।
भनपुरी के दो उद्योगों को कराया बंद।
पुराने डीजल वाले ऑटो की जगह ई-रिक्शा के लिए सब्सिडी।
विभिन्न निर्माण कार्यो में हरे कपड़े का नेट लगाना अनिवार्य।

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