29 जनवरी से 2 फरवरी के बीच भूल से भी न करें कोई शुभ काम, वरना...

Ashish Gupta

Publish: Jan, 14 2017 07:36:00 (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
29 जनवरी से 2 फरवरी के बीच भूल से भी न करें कोई शुभ काम, वरना...

ज्योतिष में कुछ नक्षत्रों में शुभ कार्य करना सही माना जाता है वहीं कुछ नक्षत्र ऐसे भी होते हैं जिन्हें बेहद अशुभ माना जाता है। आइए जानें एेसे ही कुछ नक्षत्रों के बारें में.

रायपुर. साल के पहले ही महीने दो भयंकर पंचकों का योग बने हैं। जानकरों की मानें तो एक ही महीने में दो बार पंचक का आना किसी भी रूप में शुभ नहीं है। पहला पंचक सूर्य दक्षिणायन में था तब 2 जनवरी को यह पंचक शुरू हुआ और 6 जनवरी तक चला। इसके बाद यह पंचक तब पड़ेगा जब सूर्य उत्तरायन में होगा। 29 जनवरी को यह पंचक शुरू होकर 2 फरवरी तक रहेगा। इस बीच खास ध्यान रखने की जरूरत है।

ज्योतिष में कुछ नक्षत्रों में शुभ कार्य करना सही माना जाता है वहीं कुछ नक्षत्र ऐसे भी होते हैं जिन्हें बेहद अशुभ माना जाता है। इन नक्षत्रों के किसी भी चरण में शुभ कार्य करने से या तो उसमें बाधा उत्पन्न होती है या फिर उसमें सफलता मिल पाना मुश्किल हो जाता है। धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद एवं रेवती कुछ ऐसे ही अशुभ नक्षत्रों के नाम है, जिन्हें काफी अशुभ माना जाता है। धनिष्ठा के प्रारंभ से लेकर रेवती के अंत तक का समय काफी अशुभ माना गया है, इसे पंचक कहा जाता है।

पांच दिन


पांच दिनों का यह समय, वर्ष में कई बार आता है। इसलिए सामान्य जन को यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी जरूरी कार्य इन पांच दिनों में संपन्न ना किया जाए तो ही बेहतर है। इसके लिए आप किसी विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं। इन पांच दिनों में ना तो दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करनी चाहिए, ना घर की छत या खाट बनवानी चाहिए और ना ही ईंधन का सामान इकट्ठा करना चाहिए।

पंचकों के प्रकार रोग पंचक


अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो यह रोग पंचक कहा जाता है। इसके प्रभाव में आकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करता है। इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ कार्य निषेध माना गया है। मांगलिक कार्यों के लिए यह पांच दिन अनुपयुक्त हैं।

राज पंचक


सोमवार से शुरू हुआ पंचक राज पंचक होता है, यह पंचक काफी शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सरकारी कार्यों में सफलता हासिल होती है और बिना किसी बाधा के संपत्ति से जुड़े मसलों का निदान होता है।

अग्नि पंचक


मंगलवार से शुरू हुए पंचक के दौरान आग लगने का भय रहता है जिसकी वजह से इस पंचक को शुभ नहीं कहा जा सकता। इस दौरान औजारों की खरीददारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए। इस दौरान कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों और अधिकार हासिल करने जैसे मसलों की पहल की जा सकती है, क्योंकि उनमें सफलता मिलने की संभावना होती है।

बुधवार या बृहस्पतिवार


अगर पंचक बुधवार या बृहस्पतिवार से प्रारंभ हो रहे हैं तो उन्हें ज्यादा अशुभ नहीं कहा जाता। पंचक के मुख्य निषेध कर्मों को छोडकऱ कोई भी कार्य किया जा सकता है। आगे की स्लाइड्स में जानते हैं क्या है पंचक के मुख्य नियम। विद्वानों के अनुसार पंचक के समय चारपाई नहीं बनवानी चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से कोई बड़ा संकट आ सकता है।

चोर पंचक


ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार शुक्रवार से शुरू हुए पंचक, जिसे चोर पंचक कहा जाता है, के दौरान यात्रा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा धन से जुड़ा कोई कार्य भी पूर्णत: निषेध ही माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान धन की हानि होने की संभावनाएं प्रबल रहती हैं।

मृत्यु पंचक


शनिवार से शुरू हुआ पंचक सबसे ज्यादा घातक होता है क्योंकि इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। अगर इस दिन किसी कार्य की शुरुआत की गई तो व्यक्ति को मृत्यु तुल्य परेशानियों से गुजरना पड़ता है। शनिवार से शुरू हुए पंचक के दौरान कोई भी जोखिम भरा कार्य नहीं करना चाहिए। व्यक्ति को चोट लगने, दुर्घटना होने और मृत्यु तक की आशंका रहती है।

गरुण पुराण


गरुण पुराण के अनुसार पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते समय किसी योग्य जानकार से पूछकर आटे या कुश (एक प्रकार की घास) के पांच पुतलों को भी अर्थी पर रखकर पूरे विधान के साथ अंतिम संस्कार करने से पंचक के दोष से मुक्ति मिलती है।

अशुभ


जानकारों के अनुसार पंचक को बहुत अशुभ माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद शादी-विवाह जैसे कार्य करने में किसी प्रकार की समस्या नहीं होती।

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