पत्रिका #hallabol डिबेट में लोगों ने कहा- शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के लिए सरकार जिम्मेदार

Raipur, Chhattisgarh, India
  पत्रिका #hallabol डिबेट में लोगों ने कहा- शिक्षाकर्मियों की हड़ताल के लिए सरकार जिम्मेदार

पत्रिका छत्तीसगढ़ के फेसबुक पेज में #hallabol- voice of citizens की शुरुआत की है और इसमे देश से जुड़े हर एक मुद्दे पर परिचर्चा की जाती है...

रायपुर. पत्रिका छत्तीसगढ़ के फेसबुक पेज में #hallabol- voice of citizens की शुरुआत की है और इसमे देश से जुड़े हर एक मुद्दे पर परिचर्चा की जाती है। चाहे वह मुद्दा राजनीति से जुड़ा हो या फिर कोई अन्य पहलू पर। इस लाइव शो के जरिए एक्सपर्ट और आम आदमी की राय ली जाती है। सोमवार शाम को हल्लाबोल के एपिसोड में एक मुद्दा उठाया गया कि 'क्या शिक्षाकर्मी पढ़ाते कम, हड़ताल ज्यादा करते हैं' तो इस मुद्दे पर एक्सपर्ट के साथ-साथ लोगों ने अपनी राय दी।


इस डिबेट में कुछ लोगो ने शिक्षाकर्मी की हड़ताल को जायज नहीं समझा तो कुछ लोगों ने हड़ताल करने की वजह राज्य सरकार को बताया कि सरकार उन्हें सुविधा नहीं देती तो शिक्षाकर्मियों को प्रोटेस्ट करना पड़ता है।



जब फेसबुक पेज पर लोगों की इस मुद्दे पर राय मांगी तो कई कमेंट आए कुछ लोगों ने शिक्षाकर्मियों की हड़ताल को गलत ठहराया तो किसी ने सरकार को जिम्मेदार बताया। पेज पर सुभाष चंद्रा नाम के एक युवक ने कहा कि अगर घर का खर्चा नहीं चल रहा तो नौकरी छोड़कर प्राईवेट जॉब देख लें, प्रोटेस्ट करके बच्चों का भविष्य क्यों खराब करते हैं। इसके जवाब में लोगों ने अपने कमेंट पास किए कुछ लोगों ने कहा कि सरकार शिक्षाकर्मियों को अपना नौकर समझती है कि जहां चाहे ड्यूटी पर लगा दो ओर 6-6 महीने तक वेतन नहीं देती तब अपने हक के लिए इंसान कया करे। वहीं संतोष गावेल ने कहा के शिक्षाकर्मी को प्राइवेट सेक्टर में काम करवाकर दिखाना चाहिए तब पता चलेेगा कि काम क्या होता है। और उसके बाद कितने पैसे मिलते हैं।

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अधिकतर जो कमेंट आए उसमे शिक्षाकर्मी की हड़ताल को सही बताया गया लोगों ने कहा कि सरकार का रवैया ही सुस्त है। शिक्षाकर्मी  को सही समय पर वेतन नहीं दिया जाता जिससे उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हालाकि वजह जो भी हो लेकिन गलती इसमें दोनों की है, सरकार को भी अपनी जिममेंदारी के तहत कार्य करना चाहिए और शिक्षाकर्मी को भी नैतिकता के जरिए मसला हल करना चाहिए।

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