तय हुई थी बड़ी डील, 115 प्लॉट बेचकर कमाते 5-5 करोड़

Chandu Nirmalkar

Publish: Oct, 19 2016 01:37:00 (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
तय हुई थी बड़ी डील, 115 प्लॉट बेचकर कमाते 5-5 करोड़

कमल विहार कपड़ा मार्केट विवाद...

रायपुर . कमल विहार के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (सीबीडी) में 30 फीसदी छूट के साथ कॉमर्शियल भूखंड खरीदने की योजना में रायपुर थोक कपड़ा व्यापारी संघ और आरडीए की मिलीभगत उजागर हुई है।

रायपुर थोक कपड़ा व्यापारी संघ के पांच बड़े कारोबारियों ने लगभग 115 दुकान हथियाने में कामयाबी पा ली थी। इन कारोबारियों की योजना एक माह के भीतर 5-5 करोड़ रुपए कमाने की थी। लेकिन थोक कपड़ा व्यापारी संघ के दूसरे सदस्यों ने जब दुकानों के आवंटन विरोध शुरू किया तो उनके मंसूबे पर पानी फिर गया और इस बात का खुलासा हुआ कि संघ के रसूखदार और बड़े पदाधिकारियों ने अपने ही नाम से 25-25 दुकानों के आवंटन का प्रस्ताव आरडीए को दिया है, जबकि 300 से ज्यादा कारोबारियों  को जानबूझकर वेटिंग लिस्ट में रखा गया। इन पांच 5 बड़े कारोबारियों की मंशा  आवंटित दुकानों को वेटिंग लिस्ट में शामिल दूसरे कारोबारियों को दोगुनी कीमत पर दुकान बेचने की थी। सूत्रों का कहना है कि समय रहते मामला का खुलासा हुआ, वरना एक महीने में इन कारोबारियों की योजना 5-5 करोड़ रुपए कमाने की थी।

जिनकी फर्म  पंडरी में नहीं उस पर मेहरबानी
कारोबारी पर इतनी मेहरबानी की गई कि एक साथ 25 दुकानों के आवंटन का प्रस्ताव थोक कपड़ा व्यापारी संघ ने स्वीकार कर लिया, जबकि इस घराने का पंडरी में थोक कारोबार ही नहीं है। यह घराना दलदलसिवनी में व्यवसाय, कर रहा है। यह स्थिति तब है कि जब पंडरी के बाकी कारोबारियों को वेटिंग लिस्ट में रखा गया।

आरएसएस और बीजेपी को फायदा
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के चेयरमेन ज्ञानेश शर्मा ने आरोप लगाया कि रमन सरकार अपने राजनीतिक लाभ के लिए आरएसएस और बीजेपी के लोगों को कमल विहार कें सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट के नाम पर चहेतों को फायदा पहुंचाने में लगी है।

सीधी बात
रमेश मोदी, अध्यक्ष, रायपुर थोक कपड़ा व्यापारी संघ
सवाल- यह आरोप लगाया जा रहा है कि थोक कपड़ा व्यापारी संघ के बड़े कारोबारियों ने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने ही नाम से ज्यादा दुकानों के आवंटन का प्रस्ताव भेजा।  
जवाब- यह गलत है। किसी भी पदाधिकारी या कारोबारियों को एक इंच जमीन नहीं दी गई। प्रस्ताव रद्द कर दिए गए हैं।
सवाल-  आपने चेक लेकर प्रस्ताव तो आरडीए को दिया था।
जवाब- विवाद के बाद यह प्रस्ताव रद्द कर दिया गया है। हमने चेक  लौटा दिए हैं। आवंटन में बंदरबांट नहीं किया गया। हां कुछ लोगों ने विरोध जरूर जताया था।
सवाल- क्या अब कमल विहार में फिर से नई जमीन तलाशेंगे ?
जवाब- जब तक 600 या 800 दुकानें नहीं मिल जाती तब तक कमल विहार में नहीं जाएंगे।

बिना कागजी कार्रवाई हो गए प्लॉट बुक!
आरडीए ने कमल विहार में व्यावसायिक प्लॉटों की खरीदी के लिए 19 नवंबर तक आवेदन करने पर 30 प्रतिशत छूट देने का प्लान सेंट्रल बैंक के कर्ज से मुिक्त पाने के लिए बनाया है। आरडीए ने जुलाई में शहर के व्यापारियों और उनके एसोसिएशन को बुलाकर कमल विहार के व्यावसायिक प्लॉटों का प्रजेंटेशन भी दिया गया था। पंडरी कपड़ा व्यापारी एसोसिएशन ने 12 -12 सौ वर्गफीट के 1000 प्लॉटों की मांग की थी। इसके बाद आरडीए ने सभी बड़े प्लॉटों को रिसाइज करने के बाद बताने की बात कही।

30 प्रतिशत छूट का निर्णय
कमल विहार के बड़े व्यावसायिक प्लॉटों की साइज छोटा कर व्यापारियों को 30 प्रतिशत छूट देने का फैसला संचालक मंडल में लिया गया। यह छूट 19 नवंबर तक पंजीयन कराने वाले व्यापारी के लिए ही रखी गई। प्राधिकरण ने कमल विहार के अधोसंरचना के कार्य के लिए सेंट्रल बैंक से 600 करोड़ रुपए ऋण लिया है। जिसमें करीब 470 करोड़ रुपए बकाया है। बड़े प्लॉटों के नहीं बिकने से आरडीए बैंक का किश्त समय पर जमा भी नहीं कर पाया। एेसे में बैंक से चर्चा कर आरडीए ने 2017 तक की मियाद को बढ़ाकर 2023 तक करा लिया है।

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