सतयुग से चली आ रही है टेस्ट- ट्यूब बेबी से बच्चे के जन्म की तकनीक

suryapratap gautam

Publish: Oct, 19 2016 03:49:00 (IST)

Raipur, Chhattisgarh, India
सतयुग से चली आ रही है टेस्ट- ट्यूब बेबी से बच्चे के जन्म की तकनीक

आज टेस्टट्यूब, आई वी एफ और सेरोगेसी तकनीक से नि:संतान दंपत्त‌‌ियों को संतान का सुख मिल रहा है। लेकिन शास्‍त्रों और पुराणों में जो कथाएं मिलती हैं...

रायपुर. आज टेस्टट्यूब, आई वी एफ और सेरोगेसी तकनीक से नि:संतान दंपत्त‌‌ियों को संतान का सुख मिल रहा है। लेकिन शास्‍त्रों और पुराणों में जो कथाएं मिलती हैं उसके अनुसार ऐसा लगता है कि उन दिनों की तकनीक आज से कहीं आगे की रही होगी। पुराणों में गर्भधारण की ऐसी कथाएं मिलती हैं जिसे पढकऱ आज के जमाने में यकीन करना भी मुश्किल होगा।

रामायण में एक कथा है कि हनुमान जी समुद्र में पूंछ में लगी आई बुझाने गए तो उनके शरीर से जो पसीना गिरा उसे एक मछली पी गई। काफी समय बाद हनुमान जी को पता चला कि उनके पसीने को पीने से मछली गर्भवती हो गई और उनका मकरध्वज नाम का एक पुत्र भी है।

लेकिन इस तरह की पहली घटना का जिक्र देवी भागवत में मिलता है। इसमें मधु और कैटभ नाम के दो असुर हैं। सृिष्ट के शुरुआती समय में ही ब्रह्मा जी के कान से मैल गिरा जिससे दो असुर उत्पन्न हो गए। यह असुर ब्रह्मा जी को मारना चाहते थे लेक‌िन विष्‍णु भगवान ने इन असुरों को मार ‌द‌िया।

ऋग्वेद में देवताओं के चिकित्सक अश्विनी कुमार के जन्म की कहानी दी गई है जो अद्भुत है। भगवान सूर्य की पत्नी संज्ञा सूर्य देव का ताप सहन नहीं कर पा रही थी इसल‌िए अपनी छाया को सूर्यलोक में छोडकऱ पृथ्वी पर अश्वनी बनकर रहने लगी। जब सूर्य देव को इस रहस्य का पता चला तो उन्होंने संज्ञा की खोज की और अश्विनी रुप में उन्हें संज्ञा नजर आई और सूर्य संज्ञा के म‌िलन से पुत्र उत्पन्न हुए ज‌िसका नाम अश्विनी कुमार रखा गया।

महाभारत में कौरवों के जन्म की भी कथा अनोखी है। मटकी में रखे मांस के एक पिंड के एक सौ एक टुकड़े हुए जिनसे सौ कौरव और उनकी एक बहन का जन्म हुआ।

महाभारत में सत्यवती के जन्म की भी कथा हैरान करने वाली है। राजा सुधन्वा का वीर्य एक पक्षी लेकर उनकी पत्नी के पास जा रहा था रास्ते में वह वीर्य एक नदी में गिर जाता है जिसे श्राप के कारण मछली बनी एक अप्सरा पी जाती है जिससे वह गर्भवती होकर एक बालक और एक बालिका को जन्म देती है। यही बालिका सत्यवती कहलाती है ज‌िससे भीष्म के पिता शांतनु विवाह करते हैं।

रामायण में भगवान राम के जन्म की भी कथा अद्भुत है। इसमें दशरथ जी ने एक यज्ञ आयोजन किया। इस यज्ञ के अंत में देवता प्रकट हुए और दशरथ जी के हाथों में खीर दिया। इस खीर को खाने से दशरथ जी की तीनों पत्नी गर्भवती हुई और राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुध्न का जन्म हुआ। कुछ कथाओं में ऐसा भी जिक्र आता है कि खीर के बर्तन को कौआ उठाकर ले गया और अंजनी की गोद में गिरा ‌दिया इस बर्तन में लगे खीर को खाने से अंजनी ने हनुमान जी को जन्म द‌िया।

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