धरोहरों को संवारने अभियान शुरू

praveen praveen

Publish: Nov, 29 2016 10:51:00 (IST)

Raisen, Madhya Pradesh, India
धरोहरों को संवारने अभियान शुरू

रायसेन. जिले में दो विश्व धराहरों सांची और भीमबैठिका के अलावा कई अन्य ऐसे पर्यटन महत्व के स्थान हैं, जिनका समुचित विकास हो जाए तो रायसेन जिला पर्यटन के क्षेत्र में देश में अपनी अलग ही पहचान बना सकता है।

रायसेन. जिले में दो विश्व धराहरों सांची और भीमबैठिका के अलावा कई अन्य ऐसे पर्यटन महत्व के स्थान हैं, जिनका समुचित विकास हो जाए तो रायसेन जिला पर्यटन के क्षेत्र में देश में अपनी अलग ही पहचान बना सकता है।

   सालों से उपेक्षित और अनदेखे ऐसे स्थानों को अब विकसित कर प्रचार-प्रसार के साथ पर्यटकों के लिए सुलभ बनाने की दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। सबसे पहले जिले में शैल चित्रों की श्रंखला को संकलित किया जाएगा। इसके लिए जिला पुरातत्व संघ एवं पर्यटन विकास परिषद ने ऐसे 15 प्रमुख स्थानों का चयन किया है, जहां बहुतायत में और उल्लेखनीय शैल चित्र और शैलाश्रय हैं। इन स्थानों पर जाकर दस्तावेजीकरण करने के साथ नक्श आदि बनाने और वर्तमान स्थिति के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए 15 दलों का गठन किया गया है। इनमें कम से कम चार सदस्य शामिल किए गए है। जल्द ही ये दल संबंधित स्थान पर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे। फिर विकास और प्रचार-प्रसार की योजना पर काम किया जाएगा। यह पूरा काम कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव के नेतृत्व में किया जाएगा।

ये काम करेंगे दल
दल में शामिल अधिकारी, शोधकर्ता और विषय में रुचि रखने वाले लोगों को शामिल किया गया है। ये दल चिन्हित स्थान पर पहुंचकर गुफा, शैलचित्रों की मार्किंग, फोटोग्राफी करेंगे। इसके बाद इनके नजरी  नक्शा आदि तैयार किए जाएंगे। शैलचित्रों के महत्व, काल, वर्तमान स्थिति आदि का आंकलन भी किया जाएगा।

इन स्थानों का किया है चयन
समिति ने जिले में शैलचित्र पाए जाने वाले प्रमुख स्थानों में बाड़ी विकास खंड के भरतीपुर-घाना, औबेदुल्लागंज विकासखंड के शंकरगढ़, जावारा, झिरी, तिलेंडी तथा मकोडिया को शामिल किया गया है। इसी तरह सांची विकासखंड के रामछज्जा, पेनगमा, खरबई, नागोरी, महुआखेड़ा, सतधारा, उर्देन, पुतली करार को शामिल किया गया है। ऐसे कुल 15 स्थानों पर दल जाकर काम करेंगे।

दलों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
उक्त पुरा धरोहरों पर जाकर काम करने के लिए गठित दलों के सदस्यों को पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला पुरातत्व संघ एवं पर्यटन विकास परिषद इसके लिए इंतजाम करेगी। प्रसिद्ध पुरातत्ववेत्ता दलों को प्रशिक्षित करेंगे।

बनाना होगा पर्यटन सर्किट
पर्यटन स्थलों के विकास की योजना के साथ इन स्थानों को आपस जोडऩे के लिए एक सर्किट बनाने की जरूरत भी होगी, ताकि एक जगह से चलकर पर्यटक सभी स्थानों का भ्रमण आसानी से कर सकें। सांची से शुरू होकर पूरे जिले का भ्रमण कर भोजपुर तक या भोजपुर से शुरू होकर सांची तक के लिए एक सर्किट प्लान तैयार करना होगा। तभी जाकर पर्यटकों को लाभ होगा ओर शासन की योजना साकार होगी।

 ये होगा जिले को लाभ
जिले में बहुतायत में पाए जाने वाले शैलचित्रों को अभी तक समुचित प्रचार और उक्त स्थानों पर जरूरी विकास कार्य नहीं हुए हैं। समिति के ये प्रयास सफल होते ही इन स्थानों की गिनती प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में होने लगेगी। हालांकि भीमबैठिका शैलचित्रों के लिए ही पहले से विश्व धरोहरों में शामिल है। सांची जिले की दूसरी विश्व धरोहर है। इन 15 स्थानों को भी प्रसिद्धि मिलने पर जिले में पर्यटन एक उद्योग के रूप में उभर का सामने आएगा। युवाओं को रोजगार के साधन मिलेंगे। जिले में देश, विदेश के पर्यटकों का आना शुरू होगा।जो अभी तक केवल सांची और भीमबैठिका तक ही सीमित हैं।

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