प्रतियोगिता में नहीं दौड़ पाए नि:शक्त बच्चे

ram kailash

Publish: Dec, 01 2016 11:22:00 (IST)

Rajgarh, Madhya Pradesh, India
प्रतियोगिता में नहीं दौड़ पाए नि:शक्त बच्चे

क्लब ग्राउंड के पथरीले मैदान पर हुए विकलांग बच्चों के कार्यक्रम में बिना प्रशिक्षण के आए बच्चे दौड़ ही नहीं पाए। कागजी खानापूर्ति और तीन


ब्यावरा.
क्लब ग्राउंड के पथरीले मैदान पर हुए विकलांग बच्चों के कार्यक्रम में बिना प्रशिक्षण के आए बच्चे दौड़ ही नहीं पाए। कागजी खानापूर्ति और तीन दिसंबर को विश्व विकलांग दिवस की भरपाई करने के लिए आयोजित उक्त प्रतियोगिता में जो बच्चे आए उन्हें किसी तरह की कोई पूर्व तैयारी ही नहीं करवाई गई।

दरअसल, क्लब ग्राउंड में सीमित व्यवस्थाओं के बीच हुई प्रतियोगिता में ब्यावरा ब्लॉक के विभिन्न स्कूलों के कुल 60 बच्चों ने भाग लिया। इसमें अस्थि बाधित, श्रवण बाधित, मानसिक कमजोर और दृष्टि बाधित कैटेगिरी के बच्चों ने 50 और सौ मीटर दौड़ में भाग लिया, लेकिन प्रशिक्षण के अभाव में कुछ बच्चे पांच से 10 मीटर दौड़ पाए तो कुछ दौड़ ही नहीं पाए। पूरी तरह से औपचारिक लग रहे उक्त कार्यक्रम में दौड़ के अलावा एथलेटिक्स में गोला फेंक, भाला फेंक सहित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में डांस व अन्य प्रतियोगिताएं भी हुईं। जनपद पंचायत द्वारा आयोजित इस प्रतियोगिता में न पहले से कोई जानकारी मुहैया करवाई गई न ही बच्चों को बेहतर प्रशिक्षण मिला।

अब यहां चयनित बच्चे जिला स्तर पर तीन दिंसबर को होने वाली प्रतियोगिता में भाग लेंगे। मुख्य अतिथि विधायक नारायणसिंह पंवार की गैरमौजूदगी में जनपद पंचायत उपाध्यक्ष प्रतिनिधि चैनसिंह ही पहुंच पाए। इस दौरान कार्यक्रम के आखिर में सीईओ रामकुमार मंडल पहुंचे और जनपद के परमानंद दुबे, लोकेशआर्य, बीईओ जे. पी. यादव, बीआरसीओ. पी. नामदेव, सिविल अस्पताल के प्रभारी डॉ. एस. एस. गुप्ता, उत्कृष्ट स्कूल की पीटीआई चंदा खान सहित अन्य स्पोटर््स टीचर व बच्चे मौजूद थे।  ब्लॉक स्तर पर जनपद पंचायत के माध्यम से और जिलास्तर पर जिला प्रशासन के माध्यम से होने वाले विकलांग बच्चों के उक्त आयोजन में पिछली बार भी लापरवाही सामने आई थी।

 वैसे बीआरसी में एक स्टॉफ सदस्य है, जो विकलांग बच्चों ट्रेंड करने का काम करती है। बाकी स्कूलों में व्यायाम शिक्षकों की कमी है। अब विकलांग बच्चे सामान्य बच्चों जैसे थोड़े दौड़ सकते हैं। वैसे डॉक्टर की टीम थी, चेकअप के बाद ही बच्चों को प्रतियोगिता में शामिल किया गया। शासन स्तर पर तमाम स्कूलों में प्रशिक्षण देना मुश्किल है।
-जेपी यादव, बीईओ, ब्यावरा

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