साहब मेरा बेटा नहीं, इसलिए मैं आई

vikram ahirwar

Publish: Feb, 17 2017 12:35:00 (IST)

Ratlam, Madhya Pradesh, India
साहब मेरा बेटा नहीं, इसलिए मैं आई

मंडी में न बिस्तर का पता..न किसान भवन, सर्द रात, खुले आसमान कटा रहे अन्नदाता रात 


रतलाम। साहब मेरा बेटा जिंदा नहीं है, अगर वह होता तो मैं यहां क्यू आती। लहसुन के अच्छे दाम मिले इसलिए रतलाम मंडी आई। सुबह से शाम हो गई, सबके पास गुहार लगाई पर किसी ने नहीं सुनी। ये मैरे लड़के की लड़की है, जो भी साथ आ गई। अब जब तक लहसुन नहीं बिके कैसे जाऊ। अभी तो गाड़ी अंदर नहीं आई कल भी नंबर आए के नहीं पता नहीं। यह व्यथा था सरवड़ से आई महिला गुड्डीबाई की। जो सैलाना बस स्टैंड स्थित लहसुन प्याज मंडी में सैकड़ों पुरुषों के मध्य रूआंसी आंखें लिए अपने लड़के की लड़की के साथ सर्द रात में बैसहारा की तरह रात गुजारने को मजबूर थी।

पत्रिका ने गुरुवार की रात 10.30 बजे करीब लहसुन-प्याज मंडी की स्थिति जानी तो स्थिति दयनित थी। सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण अंचल से आए किसान अपनी-अपनी उपज पर सर्द रात में यहां खुले में सोने को च²र तो कोई कंबल तो कोई शाल ओड़़े सोने को मजबूर नजर आया। किसी दो तो किसी को तीन-तीन दिन यहां रात गुजारते हो गया। पर मंडी प्रशासन इनकी उपज की नीलामी व्यवस्था नहीं कर पाई। यहां तक की बाहर से आए किसानों को बिस्तर, भोजन, चाय व अन्य सुविधाएं कहां मिलेंगी इसका तक पता नहीं है।


रात 10.42 बजे-बिस्तर तक की व्यवस्था नहीं
खेड़ावदा बडऩगर से आए बुजुर्ग हिरालाल कल से आएं है। आज भी लहसुन नीलाम नहीं हुई कल भी पता नहीं होगी के नहीं। यहां मंडी में कोई सुविधा नहीं, जबकि मंदसौर में किराये के बिस्तर और सोने के लिए जगह तो मिल जाती है। ठंड तो लगती है, पर करे क्या शाल ओड़कर रात गुजारना पड़ रही है।


रात 10.45 बजे-मंडी गेट के बाहर बोरी रात...
रूनिजा माधोपुर से आए बुजुर्ग जगदीश जो मंडी गेट पर शाल औड़े अपनी लहसुन की दो बोरी लेकर बैठे थे, बताते है कि दूध की गाड़ी में दो बोरी डाल कर लाया था। अंदर नहीं जाने दिया तो यही पटककर बैठ गया। पूछने पर बताया कि रात इन्ही पर बैठकर गुजारना है बिस्तर कहां है।


रात 10.50 बजे- बिस्तर का भी पता नहीं कहां मिलेंगे
 कानवन से आए जगदीश और दशरथ ने बताया कि शाम को आए थे, कि लहसुन सुबह बिक जाएंगी। यहां तो गेट पर ताले लगा रखे है, इसलिए बाहर की वाहन में बैठे हुए है। बिस्तर तक का पता नहीं की कहां मिलेगे। गाड़ी में रखी बोरियों पर ही रात गुजारेंगे। खाना तो होटल में खा लिया। हमें तो टोकन भी नहीं दिया।

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