अमले से पूछा न अमले ने गांवों में झांका

vikram ahirwar

Publish: Jan, 13 2017 11:19:00 (IST)

Ratlam, Madhya Pradesh, India
अमले से पूछा न अमले ने गांवों में झांका

पत्रिका मुहिम- झोलाछाप डॉक्टरों की तरफ आंखे मूंदकर बैठे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, पास से गुजर जाते बंगालियों के


रतलाम। स्वास्थ्य महकमा इन दिनों गहरी निंद में है। केवल छोटे-मोटे अभियान और सरकार की योजना को जैसे-तैसे लागू करके अपनी जिम्मेदारी निभाने के अलावा आम जनता और ग्रामीणों के स्वास्थ्य के प्रति गंभीर दिखाई नहीं देता है।
 विभागीय अधिकारियों की नजरों में होते हुए भी नजरअंदाज करके छोड़े जा रहे बंगालियों और बिना डिग्री के इलाज करने वालों के खिलाफ आज भी यह विभाग कार्रवाई को लेकर गहरी निंद में ही है। पत्रिका ने पिछले एक पखवाड़े से ज्यादा समय से अपने अभियान के माध्यम से एक-एक गांव में इलाज की दुकान चलाने वाले बंगालियों और बिना डिग्री के इलाज करने वालों को बेनकाब किया लेकिन आज भी विभागीय अधिकारियों का आलम यह है कि न तो जिले में बैठे अधिकारियों ने मैदानी अमले से पूछना जरुरी समझा और न मैदानी अमले ने इन बिना डिग्री वालों के क्लिनिक तक जाने की जहमत उठाई है।
प्रशासन की डपट से कार्रवाई
सैलाना और बाजना विकासखंड में दो बंगालियों पर स्वास्थ्य अमले ने कार्रवाई तो की है लेकिन यह कार्रवाई विभाग ने स्वप्रेरणा से नहीं की जबकि प्रशासन के भारी दबाव और अपने ऊपर कार्रवाई के डर से की है। सैलाना एसडीएम आरपी वर्मा के सख्त निर्देश के बाद सैलाना और बाजना के बीएमओ ने दौड़ लगाई लेकिन फिर सुस्ती छा गई है। इस ढिलाई का फायदा उठाकर ज्यादातर गांवों से बंगाली भाग चुके हैं।
निर्देश देकर पूरी की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग की जिले की सबसे बड़ी अधिकारी से जब बंगालियों और बिना डिग्री वालों पर कार्रवाई की बात कही गई तो उन्होंने मैदानी अमले को निर्देश देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। उनका कहना था कि हमने बीएमओ को कार्रवाई के लिए निर्देश दिए जा चुके हैं। गांवों में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने में असफल स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी काम के बोझ का बहाना भी बनाने से पीछे नहीं है।

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