बजट से उम्मीदें: होम बायर्स व सस्ते घर को मिले विशेष छूट

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बजट से उम्मीदें: होम बायर्स व सस्ते घर को मिले विशेष छूट

आम बजट की उलटी गिनती शुरू हो गई। आम से खास तक हर आदमी को इस बार के  बजट का बेसब्री से इंतजार है। होम बायर्स से लेकर रियल एस्टेट सेक्टर को भी इस साल के बजट से काफी उम्मीदें हैं।



राकेश यादव
सीएमडी अंतरिक्ष इंडिया ग्रुप

आम बजट की उलटी गिनती शुरू हो गई। आम से खास तक हर आदमी को इस बार के  बजट का बेसब्री से इंतजार है। होम बायर्स से लेकर रियल एस्टेट सेक्टर को भी इस साल के बजट से काफी उम्मीदें हैं। और संभावना भी प्रबल है कि वित्त मंत्री इस बार के बजट में पिछले साल की सुधार प्रक्रिया जैसे रियल एस्टेट बिल (रेरा), वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी), नोटबंदी पूरा होने के बाद अफोर्डेबल हाउसिंग से जुड़ी कई सारी रियायतें और साल की शुरुआत में बैंकों की ओर से ब्याज दरों में कटौती से बेहतर हुई संभावनाओं की गाड़ी को आगे बढ़ाएंगे। हाउसिंग फॉर ऑल स्कीम को सफल बनाने के लिए वित्त मंत्री से विशेष रियायत के साथ ही अप्रत्यक्ष कर के बोझ को भी कम करने की उम्मीद की जा रही है। इससे होम बायर्स को लाभ मिलेगा।

पहला घर खरीदारों को मिले विशेष लाभ 

पिछले बजट में भी वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली दफा घर खरीदारों को 50 हजार रुपए का विशेष लाभ दिया था। हालांकि, यह सीमा 35 लाख रुपए तक के लोन पर थी। फिर भी यह एक अच्छा कदम था। इस बार भी पहली दफा घर खरीदारों को विशेेष लाभ मिल सकता है।

अंडर कंस्ट्रक्शन पर बदले टैक्स छूट नियम 

अभी उसका पजेशन तीन साल में मिलने पर होम लोन के ब्याज पर 2 लाख इनकम टैक्स में छूट मिलती है। तीन साल के बाद पजेशन मिलने पर सिर्फ 30 हजार की छूट मिलती है। सरकार इसको बदले और प्रोजेक्ट लेट होने पर भी फाइनेंशियल सिक्योरिटी प्रदान करना चाहिए।

जीएसटी में हाउसिंग कम टैक्स दायरे में हो

इस साल जीएसटी लागू होने का ऐलान हो चुका है। चूंकि हाउङ्क्षसग हर किसी से सीधे जुड़ा हुआ है, ऐसे में वित्त मंत्री को चाहिए कि इस सेक्टर को जीएसटी के कम टैक्स वाले दायरे में रखें जिससे इस सेक्टर को लाभ और घर की कीमत आम आदमी की पहुंच के अंदर रहे।

सिंगल विंडो को मिले हरी झंडी 

प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होने से होम बायर्स के साथ डवलपर्स को भी काफी नुकसान उठाना पड़ता है। कोई भी प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं होने की मुख्य  वजह स्वीकृति में मिलने वाला विलंब होता है। किसी एक प्रोजेक्ट को शुरू करने में करीब 40 विभागों से स्वीकृति लेनी होती है। स्वीकृति के लिए एक सिंगल विंडो सिस्टम बनाया जाना चाहिए।

इंफ्रास्ट्रक्चर का मिले दर्जा 

हाउसिंग सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस देना चाहिए। बजट में इस बार इसको हरी झंडी दे देनी चाहिए। इससे इस सेक्टर के लिए फंड जुटाना आसान हो जाएगा और सस्ते घरों की कमी दूर करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रैक्स से जुड़े नियमों को सरल बनाना चाहिए। 

सस्ते घर का लाभ हर वर्ग को मिले
 
सभी को घर मुहैया कराने के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग और हाउसिंग फॉर ऑल जैसी स्कीमों पर पूरी शिद्दत से काम हो रहा है। हालांकि, इसका लाभ अभी तक व्यापक स्तर पर नहीं मिल पा रहा है। फिलहाल प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ केवल ईडब्ल्यूएस और एल.आई.जी. वर्ग के लोगों तक ही सीमित है। जबकि सस्ते घरों की जरूरत देश में सभी वर्ग के लोगों को है। ऐसे में बजट में सस्ते प्रोजेक्ट को विशेष लाभ दिया जाना चाहिए, जिससे इसका लाभ ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे।

होम लोन पर मिले ज्यादा टैक्स छूट
 
सस्ते घर खरीदारों को स्टांप ड्यूटी, इनकम टैक्स में छूट और दूसरे टैक्स से राहत दे। अभी होम लोन पर मिलने वाली टैक्स कटौती की सीमा 2 लाख रुपए है, जो आज के परिप्रेक्ष्य में बहुत ही कम है। जबकि टियर 1 और टियर 2 शहरों में फ्लैट के औसत दाम 50 लाख से एक करोड़ रुपए के बीच हैं। इसके साथ ही टैक्स स्लैब में बदलाव की जरूरत भी है, जिससे सभी वर्ग के लोगों को बचत करने में मदद मिले और वे बचत के पैसे का इस्तेमाल अपने सपने पूरा करने के लिए कर सकें। 

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