GST के तहत सस्ते मकानों को सेवा कर में मिले छूटः नायडू

abhishek tiwari1

Publish: Apr, 08 2017 10:51:00 (IST)

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GST के तहत सस्ते मकानों को सेवा कर में मिले छूटः नायडू

केंद्रीय मंत्री ने बिल्डरों से मकान खरीदने वालों से किए वादे को पूरा करने और समय पर उसकी डिलीवरी करने को कहा

नई दिल्ली। शहरी विकास मंत्री एम वैंकेया नायडू ने सस्ते मकानों को जीएसटी प्रणाली के तहत सर्विस टैक्स से छूट देने की वकालत की है, ताकि कम लागत वाले मकानों की कीमतें नहीं बढ़ें। नायडू ने रीयल एस्टेट कंपनियों के संगठन क्रेडाई के एक कार्यक्रम में राज्यों से कहा कि वे किफायती आवासीय परियोजना के लिए स्टांप ड्यूटी में छूट दें तथा अन्य के लिए इसे युक्तिसंगत बनाएं। उन्होंने आश्वस्त किया कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली से कीमतें नहीं बढ़ेंगी और किफायती आवास खंड के लिए तो निश्चित तौर पर नहीं बढ़ेंगी।

एक देश एक कर से होगा बड़ा सुधार
नायडू ने कहा कि इस समय किफायती आवास खंड को सेवा कर से छूट है। मेरा मंत्रालय इस क्षेत्र को जीएसटी के तहत भी यह छूट जारी रखने की जरूरत का मुद्दा वित्त मंत्रालय के सामने पहले ही उठा चुका है। उन्होंने कहा कि किफायती आवास खंड को बजट में बुनियादी ढांचे का दर्जा दिया गया है और इससे खरीदारों में नकदी उपलब्धता बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी। मंत्री ने कहा कि भले ही रीयल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में रखने के बारे में स्पष्टता नहीं हो लेकिन 'एक देश एक कर' के इस बड़े सुधार से इस क्षेत्र को फायदा होगा ही।

मकानों का कब्जा समय पर दें कंपनियां: नायडू
केंद्रीय मंत्री ने बिल्डरों से मकान खरीदने वालों से किए वादे को पूरा करने और समय पर उसकी डिलीवरी करने को कहा। वहीं जमीन-जायदाद के विकास से जुड़ी कंपनियों ने मौजूदा परियोजनाओं को नए रीयल्टी कानून से छूट दिए जाने की मांग की। नायडू ने कुछ शहरों में जमीन की आसमान छूती कीमतों को लेकर चिंता जतायी और कहा कि उसे लोगों के लिये सस्ता बनाने के लिए नीचे लाने की जरूरत है।

जो वादा किया है उसे पूरा कीजिए

उन्होंने कहा कि सरकार आपसे किए वादों से अधिक करने के लिए नहीं कह रही है। आपने कागज पर जो भी वादा किया है, आप केवल उसको पूरा कीजिए। हम आपके साथ हैं। नायडू क्रेडाई के चेयरमैन इरफान रज्जाक की मांग पर जवाब दे रहे थे। रज्जाक ने यह मांग की है कि नया रीयल एस्टेट (नियमन एवं विकास) कानून पूर्व की तिथि से लागू नहीं होना चाहिए और केवल नई परियोजनाओं पर ही लागू होना चाहिए। यह मांग ऐसे समय की गई है जब रीयल्टी कंपनियां पिछले कुछ साल से ग्राहकों को समय पर आवासीय इकाई उपलब्ध नहीं करा रही हैं। इससे ग्राहकों में नाराजगी है और खरीदारों द्वारा विभिन्न अदालतों में कई मुकदमें चल रहे हैं।

पारदर्शिता लाने के लिए करें डिजिटल लेन-देन
उन्होंने कहा कि जो मुद्दे उठाये जा रहे हैं, उस पर मंत्रालय विचार कर रहा है। मौजूदा परियोजनाओं के संदर्भ में भी....। वेंकैया नायडू ने कहा कि क्षेत्र को रातों-रात फरार होने वाली इकाइयों से निपटने की जरूरत है। मंत्री ने बिल्डरों से सेक्टर में पारदर्शिता लाने के लिए डिजिटल लेन-देन अपनाने को कहा। रीयल एस्टेट क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए उन्होंने कहा कि डिवेलपरों को अपने परिदृश्य में बदलाव लाने की जरूरत है तथा वे नए व्यापार सिद्धांत और मॉडल लेकर आएं। व्यापार सुगमता के बारे में नायडू ने कहा कि सरकार रीयल एस्टेट परियोजनाओं में त्वरित मंजूरी की दिशा में काम कर रही है।

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