महज 2.47 प्रतिशत विद्यार्थियों ने अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन किया : CBSE

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महज 2.47 प्रतिशत विद्यार्थियों ने अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन किया : CBSE

सीबीएसई के अनुसार, वर्ष 2014, 2015 और 2016 में क्रमश: 2.31, 2.09 और 2.53 प्रतिशत विद्यार्थियों ने अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन किया था

नई दिल्ली। बारहवीं कक्षा के परीक्षा में 'दोषपूर्ण मूल्यांकन' प्रक्रिया अपनाने के आरोपों के बीच केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को स्पष्टीकरण दिया कि महज 2.47 प्रतिशत विद्यार्थियों ने ही अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन किया था। इस साल 10 लाख 98 हजार 891 विद्यार्थी सीबीएसई की 12वीं की परीक्षा में बैठे थे।

सीबीएसई के अनुसार, वर्ष 2014, 2015 और 2016 में क्रमश: 2.31, 2.09 और 2.53 प्रतिशत विद्यार्थियों ने अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन किया था। बोर्ड की ओर से यह स्पष्टीकरण उन खबरों के बीच आया है जिनमें दावा किया गया था कि अंकों के सत्यापन को लेकर बढ़ोत्तरी हुई है। विद्यार्थियों का आरोप था कि सत्यापन में भारी गलतियां हुई थीं।  


बोर्ड की ओर से जारी वक्तव्य में कहा है कि इस साल अंकों के सत्यापन के लिए महज 2.47 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने ही आवेदन किया था। इसी तरह वर्ष 2014, 2015 और 2016 में क्रमश: 2.31, 2.09 और 2.53 प्रतिशत विद्यार्थियों ने अंकों के सत्यापन के लिए आवेदन किया था। इससे साबित होता है कि जिस तरह से कुछ खबरों में दावा किया गया था, उसके उलट अंकों के सत्यापन के लिए अभूतपूर्व बढ़ोत्तरी नहीं हुई।

वक्तव्य में आगे कहा कि बोर्ड की परीक्षा समिति और प्रबंध निकाय ने जून 2016 में पूनर्मूल्यांकन नहीं करने का फैसला किया था क्योंकि आंकड़ों के अनुसार, पूनर्मूल्यांकन के बाद भी अंकों में कोई बदलाव नहीं देखने को मिले थे।


एमपी बोर्ड के 9वीं और 11वीं के बच्चे पढ़ेंगे सीबीएसई कोर्स
बुरहानपुर. माध्यमिक शिक्षा मंडल निजी और सरकारी स्कूल के कक्षा 9वीं और 11वीं के विद्यार्थी भी अब पढ़ाईके साथ आईआईटी, सीपीएमटी और क्लेट के परीक्षा के लिए और तैयार होंगे। शिक्षा विभाग ने सीबीएसई कोर्स का पैटर्न लागू कर दिया है। इस साल से विद्यार्थी इसकी पढ़ाई शुरू कर देंगे। इसके लिए शिक्षकों को भी ट्रेनिंग दी गईहै। शासकीय और निजी स्कूल में यह बदलाव किया है।

प्रदेश की सभी स्कूल में कक्षा 9वीं की मैथ्स, साइंस और 11वीं में फिजिक्स, कैमिस्ट्री, बायो और मैथ्स में बदलाव किया गया है। सीबीएसई पैटर्न पर छात्र-छात्राओं को पढ़ाई कराई जा सकेगी। 9वीं में पढ़ाई कर बच्चे 10वीं में जाने के बाद यहां भी कोर्सबदल दिया जाएगा।11वीं पढऩे के बाद फिर 12वीं में भी बच्चों को कोर्स बदल देंगे। ताकि बोर्ड में दिक्कत न जाए। इसलिए अभी 9वीं और 11वीं में ही कोर्सबदला है।

प्रतियोगी परीक्षा पर जोर
सीबीएसईमें पढऩे वाले बच्चे तेजी से प्रतियोगी परीक्षा में आगे निकल रहे हैं।इसी बात की चिंता सरकार को होने के बाद कोर्समें बदलाव किया है। ताकि बच्चे भी सीबीएसई स्कूल के बच्चों की तरह आईआईटी, सीपीएमटी और क्लेट के एग्जाम के लिए और अच्छी तरह से तैयारी कर सकेंगे।

एक्सपर्ट की राय
शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय के फिजिक्स के व्या?याता राकेश दलाल ने कहा कि एमपी बोर्डके विषय में थ्योरी ज्यादा थी।सीबीएसईमें प्रैक्टिल ज्यादा है। इससे यह फायदा मिलेगा कि बच्चे सभी विषयों के सिद्धांतों को प्रैक्टिकल करके देखेंगे ताकि विद्यार्थियों की सभी इंद्रिया काम कर सके। इससे उसके मस्तिष्क पटल पर स्थाई प्रभाव रहेगा। लंबे समय तक उसे यह पढ़ाईयाद रहेगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल की पढ़ाई से बच्चे प्रातियोगी परीक्षा की तैयारी करने में आसानी होंगी।

 किताबें प्रकशित, पहुंची बुरहानपुर
नया शिक्षण सत्र शुरू होने से पहले किताबें भी प्रकाशित होकर बुरहानपुर पहुंच गई है। इसमें पहली से 12वीं तक की किताब है।साथ ही 9वीं और 11वीं में लागू किए गए नए कोर्स की किताब भी आ चुकी है।जिसे स्कूल के शिक्षकों ने समझना शुरू कर दिया है। हालांकि बच्चों को सीबीएसई पढ़ाने से पहले इंदौर में शिक्षकों को छह दिन की ट्रेनिंग दी जा चुकी है लेकिन किताब आने के बाद शिक्षक उत्सुक दिखे। किताबें देखकर बच्चों को पढ़ाने की तैयारी कर ली।

ऐसी है बच्चों की संख्या

572 कुल शिक्षक

27 हजार विद्यार्थी

- नए शिक्षा सत्र से 9वीं और 11वीं में के कोर्स में सीबीएसई की पढ़ाई होंगी। शिक्षकों को ट्रेनिंग दे दी गई है। किताबें भी प्रकाशित हो चुकी है।- बीआर सिटोले, जिला शिक्षा अधिकारी


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