सौगात: 28 साल बाद आयुर्वेद की डिग्री को मिली राष्ट्रीय मान्यता

suresh mishra

Publish: Dec, 02 2016 07:07:00 (IST)

Rewa, Madhya Pradesh, India
 सौगात: 28 साल बाद आयुर्वेद की डिग्री को मिली राष्ट्रीय मान्यता

सीसीआईएम ने दी बीएएमएस की एक हजार डिग्रियों को मान्यता, अब दूसरे प्रदेशों में कर सकेंगे नौकरी, आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य की कोशिशे लाई रंग


रीवा
शासकीय आयुर्वेद कॉलेज से पढ़कर निकले करीब एक हजार चिकित्सकों के चेहरे खिल गए हैं। उनकी बीएएमएस डिग्री को सीसीआईएम ने सेकें ड शेड्यूल में रजिस्टर्ड कर लिया है। अब यह चिकित्सक प्रदेश के बाहर नौकरी कर सकेंगे।
वर्ष 1988  के बाद से अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय के द्वारा सेंट्रल काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन (सीसीआईएम) के सेकेंड शेड्यूल में बीएएमएस की डिग्री दी जा रही थी।

लेकिन इनका रजिस्ट्रेशन सीसीआईएम में नहीं कराया जा रहा था। यूनिवर्सिटी की लापरवाही का दंश बीएएमएस की पढ़ाई पूरी कर निकलने वाले आयुर्वेद चिकित्सकों को भुगतना पड़ रहा था। उनकी डिग्री केवल मध्य प्रदेश में ही मान्य थी वह प्रदेश के बाहर नौकरी करने जाते थे तो संस्थाएं यह कह कर वेतन देने से इंकार कर देती थी कि डिग्री मान्य नहीं है।

एक हजार आयुर्वेद चिकित्सक इससे जूझ रहे
2016  तक की स्थिति में करीब एक हजार आयुर्वेद चिकित्सक इससे जूझ रहे थे। 28 साल बाद 1 दिसंबर गुरुवार को सीसीआईएम नई दिल्ली से आयुर्वेद कॉलेज आदेश पहुंचा तो प्राचार्य सहित सभी स्टॉफ की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आदेश में बताया गया है कि सेकेंड शेड्यूल में बीएएमएस की डिग्रियों को रजिस्टर्ड कर लिया गया है। प्राचार्य डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने कहा कि अब आयुर्वेद कॉलेज से निकले और आगे निकलने वाले चिकित्सकों के लिए प्रदेश के बाहर सरकारी और गैरसरकारी संस्थाओं में नौकरी का रास्ता खुल गया है।

1972 में आयुर्वेद कॉलेज खुला
बताया कि 1972 में आयुर्वेद कॉलेज खुला था। 1988  तक सेकेंड शेड्यूल में रजिस्टे्रशन हुए थे। इसके बाद डिग्री के नाम में परिवर्तन के चलते इसमें ब्रेक लग गया था। विश्वविद्यालय की लापरवाही के कारण इतने लम्बे समय तक चिकित्सकों को परेशानी का सामना करना पड़ा है।


एक साल पहले शुरू हुई थी कवायद

इस समस्या को एक साल पहले कॉलेज के प्राचार्य डॉ. दीपक कुलश्रेष्ठ ने सीसीआईएम में उठाया। 1988  से 2016  तक कॉलेज से पढ़कर निकले आयुर्वेद चिकित्सकों के सारे रिकार्ड एकत्र किए गए। उनको सीसीआईएम में प्रस्तुत किया गया। एपीएस यूनिवर्सिटी से सारे रिकार्डों का वेरीफिकेशन कराया। बता दें कि इससे पहले कॉलेज में 10 प्राचार्य रहे, लेकिन किसी ने भी इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया था।

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