अब्बू-गोलू की 'दुश्मनीÓ पर शिकारी हैदर का फायर

Nitin Sadafal

Publish: Jul, 18 2017 01:23:00 (IST)

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अब्बू-गोलू की 'दुश्मनीÓ पर शिकारी हैदर का फायर

रत्तू यादव की मर्डर मिस्ट्री में पुलिस ने हत्या के 13वें दिन खुलासा कर दिया। 


सागर. दुश्मन का दुश्मन दोस्त होता है, रत्तू यादव की मर्डर मिस्ट्री में पुलिस ने इसी थ्योरी पर काम किया और हत्या के 13वें दिन खुलासा कर दिया। हत्या में शामिल 7 में से 5 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। रत्तू की हत्या के लिए अब्बू यादव व गोलू दबाड़े ने मिलकर प्लान बनाया। इसके लिए भोपाल के शिकारी और शार्प शूटर हैदर को हायर किया था। प्लान था रत्तू की गाड़ी को धीमी करने एक अन्य कार (जो रत्तू की गाड़ी के पीछे चल रही थी, लेकिन आगे नहीं निकल पाई) का इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन अचानक सामने आए ट्रक के कारण रत्तू की गाड़ी की चाल कम हुई, हैदर मोटरसाइकल से उतरा और रत्तू पर 315 बोर के कट्टे से फायर कर दिया। हैदर सीने में गोली मारने वाला था, लेकिन रत्तू झुक गया और गोली पेट के नीचे फेंफड़ों को चीरते हुए निकल गई और उसने दम तोड़ दिया था। एसपी सचिन अतुलकर ने एएसपी पंकज पांडेय, पीएल कुर्वे की मौजूदगी में सोमवार को हत्याकांड का खुलासा किया। 




दुश्मन दोस्त, ऐसे करीब आए 
पुलिस ने 7 लोगों को  हत्या में शामिल होना बताया है। अब्बू यादव, गोलू दबाड़े, सोनू विश्वकर्मा, अमित टिम्मा, अमित गुंडा, भूपेन्द्र पटेल और कुख्यात शिकारी हैदर। पुलिस की थ्योरी के मुताबिक हत्या की वजह रत्तू का बढ़ता दबदबा रही। अब्बू यादव का गोपालगंज व पथरिया क्षेत्र में पहले बड़ा दखल था। लेकिन पिछले कुछ सालों से रत्तू का कद बढ़ता जा रहा था। शराब, जुआं, हथियार के अवैध कारोबार में रत्तू की पूछपरख ज्यादा होने लगी थी जिससे उनमें खूनी संघर्ष हुए थे। रत्तू के प्रभाव को कम करने अवैध हथियारों की डील से करीब आए गोलू को अब्बू ने आगे बढ़ाया। गोलू और रत्तू यादव भी पूर्व में आमने-सामने आ चुके थे। इसलिए उसने गोलू का साथ देना शुरू कर दिया और सोनू विश्वकर्मा, अमित टिम्मा और अमित गुंडा भी साथ आ गए। 




अब्बू का करीबी था शार्प शूटर हैदर
अब्बू पुराना बदमाश है। शनिचरी में भी उसके गुर्गे हैं।  रिश्तेदारी में आए हैदर से यही उसकी पहचान हुई थी। अब्बू यह बात जानता था कि हैदर राहतगढ़ के जंगलों में   शिकार करता है, उसका निशाना भी सटीक है, इसलिए हत्या के लिए उसने हैदर को चुना। अब्बू ने हैदर को गोलू दबाड़े से मिलवाया।





हत्या के वक्त एक ही टॉवर लोकेशन 
हत्या के कुछ समय पहले रत्तू और अब्बू का एक शादी समारोह में जमकर विवाद हुआ था। यह बात जब पुलिस को पता लगी तो पुलिस ने यहीं से जांच शुरू की। हत्या के वक्त अब्बू और रत्तू की टावर लोकेशन एक ही आ रही थी। यहीं से पुलिस की जांच को गति मिली। 




फुलप्रूफ प्लान, ताकि कहीं चूक न हो 
हैदर के साथ अब्बू-गोलू ने रत्तू की रैकी की। फिर प्लान तैयार किया। 5 जुलाई की शाम को जैसे ही रत्तू घर से निकला वे उसके पीछे लग गए। किसी को शक न हो इसके लिए सभी को अलग-अलग काम सौंपा गया था। हमले में रत्तू किसी भी तरह बच न निकले इसलिए गोलू ने हैदर और सोनू को अपने साथ बाइक पर बैठाया। रत्तू की कार के आगे अपनी कार अड़ाकर रोकने का जिम्मा जबकि एसपी बंगले के पास रहने वाला अमित उर्फ टिम्मा कनौजिया कार में भूपेन्द्र व अन्य के साथ रत्तू के वाहन को रास्ते में रोकने की तैयारी से था।  हाईवे से  विश्वविद्यालय के घाट के बीच एक किमी पीछा किया गया। अमित ने कार काफी तेजी से चलाई लेकिन आगे नहीं निकल पाया। घाट शुरू होते ही रत्तू के वाहन की रफ्तार आगे चल रहे मिनी ट्रक ने रोक दी। इसी मौके पर गोलू बाइक लेकर वाहन के पास पहुंचा सोनू ने पत्थर मारा तभी हैदर ने फायर कर दिया। रत्तू झुका लेकिन गोली उसके पेट के अंदर लीवर, फेंफड़ों को चीरते हुए गुजर गई। उसे बीएमसी ले गए जहां उसकी मौत हो गई।   



रात को भोपाल में दबिश
पुलिस को रजाखेड़ी निवासी सोनू विश्वकर्मा और गोलू के कनेक्शन का पता चला तो सोनू को उठा लिया। शुरुआती पूछताछ में ही सोनू ने सरेंडर कर दिया। उसने अब्बू और गोलू के शामिल होने की सूचना दी। सोनू ने कहा गोलू ने उसे कपड़े लेकर भोपाल के पिपलानी बुलाया है। पुलिस उसके साथ भोपाल पहुंच गई। रात में पिपलानी स्थित चाय की दुकान, जहां गोलू ने पहुंचने के लिए कहा था, वहां से पुलिस के हत्थे भूपेन्द्र पटेल चढ़ गया। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने गोलू की कार के पास स्थित एक घर पर दबिश दी तो वहां अमित उर्फ टिम्मा कनौजिया और अमित अहिरवार उर्फ गुंडा हत्थे चढ़ गए, लेकिन गोलू वहां नहीं मिला।  





सीएसपी और टीआई जुटे रहे रात-दिन
रत्तू की हत्या के बाद आरोपियों तक पहुंचने के लिए सीएसपी गौतम सोलंकी के अलावा टीआई केंट बीएम द्विवेदी, टीआई मोतीनगर आलोक ङ्क्षसह परिहार, टीआई गोपालगंज प्रशांत मिश्रा और टीआई सिविल लाइन वीरेन्द्र ङ्क्षसह चौहान की टीम सक्रिय रही। टीआई द्विवेदी, परिहार की टीम मैदानी क्षेत्र में आरोपियों से जुड़े सुराग तलाश रही थी तो गोपालगंज टीआई मिश्रा साइबर सेल के संपर्क में रहकर आरोपियों तक पहुंचने में जुटे थे। आरोपियों का सुराग लगते ही टीम रविवार को पूरी रात भोपाल में दबिश देकर उन्हें दबोचती रही। टीम की सफलता के लिए एसपी अतुलकर ने एसआई तबस्सुम खान, भोला यादव, अमित चौबे, शरद तिवारी, मुकेश दुनेरिया, अखिलेश शुक्ला, आशीष गौतम, रवीन्द्र, वीरेन्द्र, रमेश रैकवार सहित साइबर सेल के सौरभ रैकवार व अमर तिवारी की सराहना की कर दस हजार रुपए के इनाम की घोषणा और मुख्यालय स्तर पर इनाम दिलाने की अनुशंसा का आश्वासन दिया।

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