बड़ी खोज: भारत में मिले 1.6 अरब वर्ष जीवन के सबसे पुराने सबूत

Satna, Madhya Pradesh, India
बड़ी खोज: भारत में मिले 1.6 अरब वर्ष जीवन के सबसे पुराने सबूत

स्वीडन के शोधकर्ताओं का दावा: चित्रकूट में मिले जीवन के सबसे पुराने सबूत, मंदाकिनी नदी के किनारे मिला 1.6 अरब वर्ष पुराना जीवाश्म, बहुकोशिकीय जीवों का माना जा रहा सबसे पुराना साक्ष्य।


रमाशंकर शर्मा @ सतना।
प्रदेश की धार्मिक नगरी चित्रकूट में जानकीकुण्ड के समीप पयस्वनी (मंदाकिनी) नदी में धरती पर मौजूद पौधे के रूप में जीवन के सबसे पुराने सबूत मिले हैं। अंतराष्ट्रीय शोधकर्ताओं ने नदी के किनारों पर स्थित कैल्शियम मैग्नीशियम कार्बोनेट की शिलाओं के बीच फास्फेटिक चट्टानों में बहुकोशिकीय जीव का अब तक का सबसे पुराना जीवाश्म खोजा है।

इसे 1.6 अरब वर्ष पुराना बताया जा रहा है। सबसे पुराने जीवन के साक्ष्य जो मिले हैं वो 3.5 अरब वर्ष पुराने हैं लेकिन वे सभी एकल कोशिकीय जीवों के हैं। यह पहला जीवाश्म माना जा रहा है जो बहुकोशिकीय जीवों के जीवन का सबसे पुराना साक्ष्य है।

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जीवन का सबसे पुराना सबूत
स्वीडन के म्यूजियम ऑफ नेचुरल हिस्ट्री के शोधकर्ताओं ने रिसर्च जर्नल प्लॉस के शोधलेख में बताया है कि 1.6 अरब साल पुराना जो जीवाश्म मिला है वह लाल शैवाल की तरह है। जो संभवत: धरती पर मौजूद पौधे के रूप में जीवन का सबसे पुराना सबूत है। इससे पता चलता है कि आधुनिक बहुकोशिकीय जीवन पूर्व की सोच से बहुत पहले ही पनप चुका था।

जीवाश्म अच्छी हालत में
इससे पहले जो खोज हुई है उनमें मिले बहुकोशिकीय जीव लगभग 60 करोड़ वर्ष पहले के हैं। इस खोज से पहले जिस लाल शैवाल की खोज हुई थी वह 1.2 अरब पुराना है। लेख में बताया गया है कि चित्रकूट में जानकी कुण्ड के पास पयस्वनी नदी के किनारे की शिलाओं में लाल शैवाल जैसे दिखने वाले दो जीवाश्म अच्छी हालत में मिले हैं जो उंगली नुमा आकृति के हैं।

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मंदाकिनी में छिपे हैं रहस्य
इस शोध के अनुसार चित्रकूट की मंदाकिनी नदी के किनारे फैली विशाल चट्टानों में जीवन के सबसे पुराने रहस्य बिखरे पड़े हैं। जिस पर अभी विस्तृत शोध की जरूरत है। हालांकि देश के अन्य शोधकर्ताओं ने भी यहां पूर्व में इस तरह से शोध किये हैं लेकिन उनके हाथ इतने पुराने जीवाश्म नहीं लगे थे।

पहले था समुद्री इलाका
रीवा के प्रसिद्ध भूगर्भ शास्त्री डॉ डीपी दुबे के मुताबिक विन्ध्यन सुपर ग्रुप ऐसे रहस्यों से भरा हुआ है। उन्होंने अपने एक शोध का हवाला देते हुए बताया कि पूर्व विन्ध्यन अपर में (रीवा में) ही ऐसे फाशिल्स उनके द्वारा खोजे गए थे। जो इस बात का सबूत हैं कि पहले यहां समुद्र रहा होगा। अपने फाशिल्स के संबंध में बताया कि उन्हें समुद्री मछली के फाशिल्स मिले थे जो स्पष्ट संकेत देते हैं कि यह पहले समुद्री क्षेत्र था। चित्रकूट जिसे लोवर विन्ध्यन के रूप में जाना जाता है, वहां जीवन के ऐसे संकेत मिलना बड़ी बात है।

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जीवन के नये पुनर्मूल्यांकन की होगी शुरुआत
चित्रकूट में 1.6 अरब वर्ष पुराने जीवाश्म मिलने के बाद यह तथ्य तो स्थापित हो गया है कि यह जीवाश्म सबसे पहले ज्ञात पौधों का प्रतिनिधित्व कर सकता है। जो कि वैज्ञानिकों को जीवन के वृहद वंश के प्रमुख वंशों की धरती पर पहली बार दिखाई देने के समय का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए मजबूर कर सकता है। इन दो बहुकोशिकीय जीवाश्मों में एक धागा की तरह और अन्य बल्बस के रूप में वर्णित किया है, जो बैक्टीरिया के मैट के साथ उथले समुद्री वातावरण में रहते थे।

समग्र आकार का मिलान
इस शोध के पहले सबसे पुराने ज्ञात पौधे कनाडा के आर्कटिक से 1.2 अरब साल पुराने लाल शैवाल जीवाश्म थे। शोधकर्ताओं ने कहा कि जीवाश्मों में संरक्षित सेलुलर संरचनाएं और उनके समग्र आकार का मिलान लाल शैवाल से हो रहा है जो आज की पौधों की तरह एक प्राचीन पौधे हैं जो प्रवाल भित्तियों जैसे समुद्री सेटिंग में पनपता है, यह ताजे पानी के वातावरण में भी पाया जा सकता है।

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यह है धरती का जीवन इतिहास
धरती का गठन लगभग 4.5 अरब साल पहले हुआ था। जीवन का संकेत करने वाले सबूत लगभग 3.7 से 4.2 अरब साल पहले समुद्री बैक्टीरिया के रूप में प्रकट हुए थे। जो बाद में पौधों और बाद में जानवरों के रूप में मौलिक समुद्र में दिखाई दिया। धरती पर जीवन के लिये पौधों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। इसी श्रेणी का जीवाश्म केंद्रीय भारत में चित्रकूट के फॉस्फेट से भरपूर तलछटी चट्टानों में पाए गए हैं।

प्रकाश संश्लेषण की मशीनरी का हिस्सा
धागे की तरह मिले जीवाश्मों की आंतरिक सेलुलर विशेषताओं में जो संरचना मिली है वह प्रकाश संश्लेषण की मशीनरी का हिस्सा बताई जा रही है। जिससे साबित हो रहा है कि ये जीवाश्म अपने समय में जीवित अवस्था में सूर्य के प्रकाश को रासायनिक ऊर्जा में बदल कर जीवित रहते थे। शोधकर्ताओं ने कहा है कि ये जीवाश्म, यूकेरियोट्स नामक व्यापक श्रेणी में सबसे पुराने ज्ञात उन्नत बहुकोशिकीय जीवों का भी प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें पौधे, कवक और जानवर शामिल होते हैं, जो जटिल जीवन का संकेत देते हैं।

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