MP के किसानों की सरकार बनी दुश्मन, जानिए क्यों अन्नदाता को नहीं मिल रही एक तोला खाद

Satna, Madhya Pradesh, India
MP के किसानों की सरकार बनी दुश्मन, जानिए क्यों अन्नदाता को नहीं मिल रही एक तोला खाद

खाद बीज के लिये किसान परेशान, कलेक्टर ने मुख्य सचिव को दी सूचना फिर भी नहीं निकला हल, 2000 टन खाद मांग के बाद भी नहीं मिल पा रही।


सतना । जिले के सहकारी बैंक का संचालक मंडल अपात्रता की स्थिति से गुजर रहा है। एक साल से बनी इस स्थिति के चलते संचालक मंडल में कोरम का अभाव हो गया है। इससे बैंक का संचालन ठप हो गया है। ऐसे में साख सीमा स्वीकृत न होने से किसानों के लिए जरूरी खाद-बीज का उठाव समितियां नहीं कर पा रही है।

लिहाजा, किसानों को पर्याप्त खाद और बीज नहीं मिल पा रहा। इस स्थिति कि जानकारी कलेक्टर ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों सहित मुख्य सचिव को गत माह में दे दी, लेकिन इसके बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं। हालात यह हो गये हैं कि समितियां खाद नहीं उठा पा रही है।

2 हजार टन खाद की मांग
सतना में आज कि स्थिति में लगभग 2 हजार टन खाद की मांग किसानों की बनी हुई है। इसके लिए लगभग दो करोड़ रुपए की साख सीमा की जरूरत समितियों को है। लेकिन भंग संचालक मंडल के कारण यह साख सीमा तय नहीं हो पा रही है। बारिश के बीच अब किसानों को खाद की तुरंत आवश्यकता है अन्यथा उनकी फसल को विपरीत प्रभाव पड़ेगा। लेकिन मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है।

नहीं मिला मार्गदर्शन
मामले में जून से लेकर अब तक कलेक्टर लगातार संबंधित उच्चाधिकारियों को सूचित कर चुके हैं और मार्गदर्शन मांग चुके हैं। स्थिति यह तक है कि मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह को वे अर्धशासकीय पत्र लिख चुके हैं। लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात ही है। न तो वहां से कोई निर्णय आया न ही मार्गदर्शन।

यह है स्थिति
जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक मर्यादित सतना के 11 संचालक मंडल सदस्यों में से 7 संचालकों के अपात्र हो जाने से वर्तमान स्थिति में कोरम का अभाव बना हुआ है। इस स्थिति में संचालक मंडल की बैठक में वैधानिक संकट उत्पन्न हो गया है। हालात यह है कि बैंक आज की स्थिति में कोई भी निर्णय नहीं ले पा रहा है।

बैंक बोर्ड की बैठक
खरीफ सीजन 2017 के लिये कोरम का अभाव होने से बैंक बोर्ड की बैठक हो नहीं पा रही है। इससे सहकारी समितियों की साख सीमा का निर्णय भी नहीं हो पा रहा है कि वे कितने की खाद बीज का उठाव करेंगे। जहां अग्रिम भण्डारण की बात है तो वह 31 मई को समाप्त हो चुकी है। ऐसे में अब समितियों को खाद बीज के लिये डीडी लेना पड़ेगा लेकिन बैंक लिमिट के बिना यह नहीं हो पाएगा। समितियों द्वारा खाद-बीज का उठाव नहीं होने से किसान को नहीं मिल पाएगा।

उधार का भरोसा
जिले में 2000 टन खाद की मांग और दो करोड़ की साख सीमा के बीच कलेक्टर को बताया गया कि सहकारी समितियों को खाद के लिये साख सीमा स्वीकृत नहीं होने से समितियों द्वारा रिलीज ऑर्डर के साथ डीडी नहीं दी जा सकती है। इससे उठाव नहीं होगा। हालांकि कलेक्टर ने इस पर जिला विपणन अधिकारी को निर्देश दिये हैं कि डीडी की जगह चेक लेकर खाद प्रदान करें। लेकिन डीएमओ कार्यालय की माने तो वे इस संबंध में अपने उच्चाधिकारियों से बात करने के बाद ही निर्णय ले सकेंगे।

मंत्री से बात हुई है: सांसद
सांसद गणेश सिंह को जब मामले की जानकारी दी गई तो उन्होंने स्वीकारा कि संचालक मंडल भंग है। किसान हित को प्राथमिक बताया। कहा, अभी ही सहकारिता मंत्री से इस संबंध में बात करते हैं। कुछ देर बाद उन्होंने पत्रिका को बताया कि सहकारिता मंत्री से बात हो गई है और कल खाद रिलीज हो जाएगी।

सरकार का हित जाहिर: अजय
नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा, मध्यप्रदेश में कितनी किसान हितैषी सरकार है इससे साफ जाहिर हो गया है। चाहे सोसायटी में खाद लेने का मामला हो या किसानों को उनकी फसल के भुगतान की बात हो या फिर ब्याज और बीमा की, सभी जगह छलावा है। सतना में सहकारिता संकट के पीछे सरकार की खामोशी की मुख्य वजह अपनी पार्टी के भरोसेमंद को बचाना है, भले ही किसान मरे या जिये।

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