इस पहाड़ी में रहते थे आदिमानव, हजारों वर्ष पुराने शैलचित्रों से आज भी सजी है गुफाएं

suresh mishra

Publish: Dec, 02 2016 06:59:00 (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
 इस पहाड़ी में रहते थे आदिमानव, हजारों वर्ष पुराने शैलचित्रों से आज भी सजी है गुफाएं

बरहा की जगदीश पहाड़ी, मानिकपुर के 'सरहट' में अनगिनत गुफाएं, ज्ञात-अज्ञात औषधियों से भरे हैं पाठा के जंगल, बिखरी हैं धरोहरें, हैरान करने वाले हैं शैलचित्रों के रंग जो सदियों बाद भी नहीं हुए बेरंग 


सतना।
चित्रकूट के मउ तहसील के ग्राम बरहा की जगदीश पहाड़ी की गुफाएं आदि मानवों की गवाह हैं। इनमें अनगिनत रंगीन शैलचित्र मौजूद हैं। जो 30 हजार वर्र्ष पुराने और पाठा की पाषाणकलीन संस्कृति का हिस्सा थे। शैलचित्र आदि मानवों की समझ और कला कौशल को प्रदर्शित करते हैं।भले ही पुरातत्व विभाग की नजर में उनकी खास अहमियत न हो।

लेकिन, पर्यटन की दृष्टि से शैलचित्रों का आकर्षण कहीं कम नहीं है। जंगली जानवरों का शिकार करते आदिमानव के चित्र अतीत की सभ्यता, साधन और जरूरतें बयां करते हैं।

गुफाएंं और चित्र हैरान करने वाले हैं। सदियों पहले चट्टानों और पत्थरों पर उकेरे गए चित्रों के रंग आज भी गहरे हैं। मानों कल ही बनाया गया है। उनपर वक्त के सफर और प्राकृतिक आपदाओं का असर नजर नहीं आता। जो भी गुफाओं में इन्हें देखता है, समझना चाहता है कि वे कौन से रंग हैं जो सदियां गुजर जाने पर भी बेरंग नहीं हुए।


करपटियां में 40 शिलाओं का समूह

चित्रकूट से 30 किमी दूर मानिकपुर के 'सरहट' के पास ऐसे शैल चित्र बड़ी संख्या में हैं। सरहट के पास ही बांसा, चूहा खांभा चूल्ही में भी मिलते हैं। वहंा से 40 किमी दूर मे करपटियां में  एकसाथ 40 शिलाओं का समूह है। बिखरी धरोहरें इतिहास के कालखन्डों के रहस्य की गवाह हैं। पाठा के जंगल में अनेक प्रकार की ज्ञात-अज्ञात औषधियां भी पाई जाती हैं। 84 कोस में औषधियां भरी पड़ी हैं।

एक्सपर्ट व्यू

शैल चित्रों के पुरातात्विक ध्वंसावशेष आज भी जीवित हंै। चट्टानों का चिकनापन अब भी कायम है। जो साक्षी हैं कि, यहां मानव सभ्यता पनपी और पोषित हुई। पाठा की पुरापाषाण कालीन संस्कृति की खोज सिंधु घाटी सभ्यता के बहुत समय के बाद हुई। लेकिन उसे श्रेष्ठ मानव संस्कृतियों से एक माना गया।
अनुज हनुमत, इतिहासकार एवं शोधकर्ता.

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