MP का भूजल स्तर गिरा: बेकार बह गया नदियों का नीर, अंधाधुंध दोहन से सूखे तालाब

Satna, Madhya Pradesh, India
  MP का भूजल स्तर गिरा: बेकार बह गया नदियों का नीर, अंधाधुंध दोहन से सूखे तालाब

जल संरक्षण के प्रयास नहीं, भू-जल स्तर गिरने से फिर झेलनी पड़ सकती है सूखे की मार, जिला प्रशासन ने वर्षा जल रोकने नदियों पर बनाए गए स्टापडैम के गेट बंद नहीं कराए।


सुखेन्द्र मिश्रा @ सतना।
हर साल पानी की किल्लत से जूझते जिले में इस बार भी वर्षा जल के संरक्षण के प्रयास नहीं किए गए हैं। बारिश के पानी को जमीन में उतारने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित करना तो बहुत दूर की बात है, जिलेभर में नदियों के पानी का ही संरक्षण नहीं किया जा रहा है। ऐसे में जिले में नदियों और अन्य जलस्रोतों का पानी बर्बाद होकर बह रहा है।

रीतते जा रहे नदी-तालाबों पर इसके बावजूद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा। जबकि, गांव से लेकर शहर तक की पूरी आबादी इन्हीं नदी-तालाबों के जल पर आश्रित है। जिला प्रशासन ने वर्षा जल रोकने नदियों पर बनाए गए स्टापडैम के गेट बंद नहीं कराए। इससे पूरा पानी बेकार बह गया। नवंबर में ही जिले के अधिकांश नदी-नाले सूख गए।

Groundwater levels dropped

नदियों के हालात
जिले की मुख्य नदी टमस की धार पतली हो गई है। सहायक नदी-नालों का पानी सिंचाई के लिए उपयोग करने से वे लगभग सूख चुके हैं। शहर का भू-जल स्तर बढ़ाने सतना नदी में एक दर्जन से अधिक स्टापडैम बनाए गए हैं। लेकिन अधिकांश गेट अभी तक नहीं बंद किए गए। जो स्टाडैम बंद थे, वहां पर उपस्थित जल भंडार का उपयोग किसान सिंचाई के लिए कर रहे हैं।

90 फीसदी स्टापडेम खाली
इससे सतना नदी की सांस नवंबर में ही टूट चुकी है। कुछ एेसे ही हाल सेमरावल के भी हैं। इस वर्ष अत्यधिक बारिश के कारण आसपास के गांवों को कई बार डुबाने वाली यह नदी भी सूखने की कगार पर है। इसमें बने 90 फीसदी स्टापडेम खाली पड़े हैं। नवंबर का महीना बीतने को है, लेकिन अभी तक बाणसागर का पानी अधिकांश नहरों में नहीं पहुंचा।

तेजी से घट रहा भूजल स्तर

इससे भू-जल दोहन में क्रिटिकल जोन में शामिल रामपुर बाघेलान विकासखंड के ग्रामीण खेतों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल से भू-जल का दोहन कर रहे हैं। इससे क्षेत्र में भू-जल स्तर तेजी से घट रहा है। लोगों का कहना है कि कई गांवों में कुओं का पानी अभी से पाताल पहुंच गया है। एेसे में यदि जल्द ही प्रशासन ने भू-जल एवं नदी-नालों में बेकार बह रहे पानी को सहेजने ठोस कदम नहीं उठाए, तो जिले में सर्दी के मौसम में ही पानी की किल्लत शुरु हो जाएगी।

दोनों हाथ लूट रहे तालाबों का पानी
जिले में इस वर्ष मेहरबान रहे मानसून ने कई दशक से खाली पड़े तालाबों को भी लबालब कर दिया था। इससे लोगों में उम्मीद बंधी थी कि गर्मी में भी भू-जलस्तर नहीं गिरेगा। लेकिन लोग तालाबों में पंप लगाकर रात-दिन तालाब के पानी का दोहन सिंचाई के लिए कर रहे हैं। अत्यधिक दोहन से छलक रहे तालाबों का पानी नवंबर में ही तलहटी तक पहुंच गया है। गांव के दबंग परिवार प्रतिबंध के बावजूद तालाबों के जल का उपयोग सिंचाई के लिए कर रहे हैं। प्रशासन जल बचाने कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।

अगस्त में ब्लॉकवार भू-जलस्तर मापा गया था। जिले का औसत भूजल स्तर 2.25 मीटर आया था। जो बीते दस वर्षों में सबसे ऊपर था। चिंता का विषय यह है कि बारिश के पानी को संरक्षित करने के उचित उपाय नहीं हुए। जलस्त्रोतों में जो जल संरक्षित है, सिंचाई के लिए उसका अंधाधुंध दोहन हो रहा है। इससे भू-जल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।
जीएस बघेल, सहायक भूजल विद सतना

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