शक्कर की मिठास में अब महंगाई की 'कड़वाहट'

suresh mishra

Publish: Feb, 12 2017 09:19:00 (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
 शक्कर की मिठास में अब महंगाई की 'कड़वाहट'

चीनी की मिठास आम रसोई के साथ इस सीजन में होने वाले शादी-ब्याह व अन्य मांगलिक आयोजनों की भी बजट बिगाड़ रही है। आम आदमी को चाय में चीनी डालने से पहले सोचना पड़ रहा है। कारण, चीनी का लगातार बढ़ता भाव है। बीते एक माह में शक्कर के भाव चार रुपए प्रति किलो यानी करीब 15 फीसदी बढ़ गए हैं।


सतना
चीनी की मिठास आम रसोई के साथ इस सीजन में होने वाले शादी-ब्याह व अन्य मांगलिक आयोजनों की भी बजट बिगाड़ रही है। आम आदमी को चाय में चीनी डालने से पहले सोचना पड़ रहा है। कारण, चीनी का लगातार बढ़ता भाव है। बीते एक माह में शक्कर के भाव चार रुपए प्रति किलो यानी करीब 15 फीसदी बढ़ गए हैं।

व्यापारियों की मानें तो इसमें अभी और बढ़ोतरी की संभावना है। वर्तमान में जिले में चीनी ज्यादातर महाराष्ट्र, गुजरात एवं कोल्हापुर से आ रही है।
शक्कर के भाव में बढ़ोतरी का असर व्यापार वर्ग से लेकर आमजन तक पड़ रहा है।

जुलाई 2015 में चीनी प्रति किलो 25 से 26 रुपए किलो मिल रही थी, जो आज 43 से 44 रुपए प्रति किलो पहुंच चुकी है। सामान्यतया एक परिवार में प्रतिमाह औसत सात किलो चीनी काम में आती है। इसके लिए पहले 175 रुपए खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब 301 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं। एक परिवार को केवल शक्कर पर प्रतिमाह 126 रुपए अधिक खर्च करने पड़ रहे हैं।


उत्पादन में 60 लाख टन की कमी

शक्कर कारोबार से जुड़े व्यापारी बताते हैं, इस बार गन्ने की पैदावार पूरे देश में कम हुई है। पिछले वर्ष देश में 280 लाख टन शक्कर का उत्पादन हुआ था। जो घटकर इस वर्ष 220 लाख टन रह गया है। 60 लाख टन शक्कर कम उत्पादित हुई है। यानी 30-40 फीसदी कमी आई है।

इस वजह से बढ़
रहे दाम
बाजार में शक्कर उछाल पर है। डिमांड बढऩे के साथ ही दाम भी बढऩे शुरू हो गए हैं। 38 रुपए किलो की शक्कर अब 42 रुपए किलो थोक में खरीदनी पड़ रही है। शादियों के सीजन के चलते अगले कुछ दिनों में इसके रेट 45 रुपए किलो तक पहुंचने की संभावना है।

प्रति माह 30 ट्रक
चीनी की खपत
शक्कर व्यापारियों के अनुसार, गर्मी में चीनी की खपत बढऩे का मुख्य कारण शीतल पेय में प्रयोग होना और शादी-ब्याह का सीजन होना रहता है। शहर में प्रति महीने औसत 30 ट्रक चीनी की खपत होती है। एक ट्रक करीब 15 टन चीनी का होता है। इस सीजन में यह खपत प्रति महीने 50 ट्रक तक पहुंच जाती है।

ऐसी ही तेजी 2010
में आई थी
व्यापारियों ने बताया, चीनी के भावों में ऐसी ही तेजी छह साल पहले जनवरी 2010 में भी आई थी। तब चीनी के थोक भाव 40 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। हालांकि सरकार की पहल पर एक सप्ताह में ही बढ़े हुए दाम को नियंत्रित कर
दिया गया था।

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