केजेएस सीमेंट प्रबंधन ने टमस नदी में छोड़ा प्रदूषित पानी,एसडीएम ने थमाया नोटिस

rajendra gaharwar

Publish: Apr, 22 2017 01:51:00 (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
केजेएस सीमेंट प्रबंधन ने टमस नदी में छोड़ा प्रदूषित पानी,एसडीएम ने थमाया नोटिस

एनीकट से प्रदूषित पानी घरों में पहुंचने से मचा हड़कंप, लोगों ने की शिकायत

मैहर. सतना। टमस नदी में खदानों का दूषित और विषाक्त पानी छोड़े जाने के मामले में केजेएस सीमेंट प्रबंधन को नोटिस जारी किए गए हैं। इस पानी से नगर में पेयजल सप्लाई करने वाले एनीकट में एकत्रित पानी भी प्रदूषित हो गया है। एसडीएम मैहर तन्वी हुड्डा ने लोक बाधा की धारा 133 के तहत दिये इस नोटिस के साथ ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भी मामले की जांच के लिये निर्देशित किया गया है।

चूनायुक्त विषाक्त पानी भी
जानकारी के अनुसार मैहर में टमस नदी पर बने एनीकट के माध्यम से पेयजल की आपूर्ति की जाती है। इस नदी के किनारे ही केजेएस की गिरगिटा स्थित खदानें हैं। खदानों में काफी मात्रा में दूषित चूनायुक्त विषाक्त पानी भी मौजूद था। यहां खनन कार्य करने के लिये केजेएस प्रबंधन ने अपनी हैवी मोटरों के सहारे पूरा पानी निकाल कर टमस नदी में डाल दिया। व्यापक मात्रा में नदी में डाला गया यह पानी एनीकट तक पहुंच गया।

नागरिकों ने की शिकायत
एनीकट में पहुंचा खदानों का यह दूषित पानी जब फिल्टर प्लांट तक पहुंचा। लेकिन यह पानी पूरी तरह से शोधित नहीं हो सका और यह गंदा पानी लोगों के घरों तक पहुंचा। जिसकी शिकायत नगर पालिका और एसडीएम से की गई। एसडीएम ने इसकी जांच के लिये नगर पालिका को निर्देश किया। टेस्ट में पाया गया कि नदी के पानी में व्यापक पैमाने पर दूषित जल मिलाया गया है। जिसका गलत प्रभाव मानव जीवन पर पड़ सकता है। नगर पालिका ने अपना यह प्रतिवेदन एसडीएम को सौंपा।

प्रतिदिन 28 लाख लीटर की जरूरत
शहर में प्रतिदिन 28 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है। जिसकी पूर्ति मौजूदा समय में नगर पालिका आठ बोर से कर रही है। दो टंकियों में प्रतिदिन 18 लाख लीटर पानी भरा जाता है। वाटर टैंकर और दूसरे माध्यमों से 10 लाख लीटर पानी की खपत है। टमस नदी सूख गई है। नगर पालिका के इंजीनियर और प्रशासन सोनवारी, गिरगिटा में टमस नदी में 10 हार्स पॉवर के मोटर पंप से पानी लेने की योजना बना रहे थे। लेकिन पानी जहरीला हो जाने से परेशानी बढ़ गई है।

जलस्तर 150 फीट नीचे खिसका
इंजीनियरों के मुताबिक, टमस नदी के पानी में बेहद घातक और हानिकारक मैगनीज का इलाज औषधीय ट्रीटमेंट से ही संभव है। नगर पालिका के आठ बोर की गहराई औसतन 125 फीट है। जबकि जलस्तर 140 से 150 फीट नीचे चला गया है। शहर में जलापूर्ति के लिए मई में नौ करोड़ और जून के अंत तक 18 से 24 करोड़ लीटर तक पानी की आवश्यकता होगी। ऐसे में कुछ इंजीनियर 15 मई के बाद बड़ा संकट देख रहे हैं।

किया जवाब तलब
नगर पालिका का प्रतिवेदन मिलने के बाद एसडीएम तन्वी हुड्डा ने केजेएस सीमेन्ट प्रबंधन को लोक बाधा की धारा 133 के तहत नोटिस जारी करते हुए समय सीमा में जवाब तलब किया है। इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग को भी इसकी जांच के आदेश जारी किये हैं। उधर केजेएस प्रबंधन ने माना कि उसे एसडीएम की तरफ से पत्र मिला है और उसका जवाब भी दे दिया गया है। साथ ही यह दावा भी किया गया है कि उनकी खदानों में इतना पानी नहीं है जो छोड़ा जा सके।

बोलीं एसडीएम
एसडीएम मैहर तन्वी हुड्डा ने बताया कि बिना अनुमति खदान का प्रदूषित पानी टमस नदी में छोडऩे के लिए केजेएस सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन को धारा 135 का नोटिस देकर जवाब तलब किया गया है। साथ ही, नदी से जलापूॢत फिलहाल रोक दी गई है।

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned