AIDS Day: हर माह सात लोग हो रहे एड्स के शिकार, 13 साल में 600 एड्स पीडि़त चिन्हित

suresh mishra

Publish: Dec, 01 2016 09:35:00 (IST)

Satna, Madhya Pradesh, India
 AIDS Day: हर माह सात लोग हो रहे एड्स के शिकार, 13 साल में 600 एड्स पीडि़त चिन्हित

जिले में एड्स तेजी से पांव पसार रहा है। प्रतिवर्ष बढ़ते रोगियों की संख्या को देखा जाए, तो स्थिति खतरनाक स्तर पर है। औद्योगिक जिले के लिए चिंता का विषय है।


सतना
  13 साल के दौरान जिले में करीब 600 एड्स पीडि़त चिन्हित किए जा चुके हैं। जिसमें 45 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। वहीं गत ग्यारह माह में 77 से अधिक एड्स के नए पीडि़त सामने आ चुके हैं। इस तरह देखा जाए तो प्रत्येक माह सात लोग एड्स के शिकार हो रहे हैं। रोगियों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य महकमे के माथे पर चिंता की लकीर खींच दी है। अब लोगों को जागरुक करने के लिए नए सिरे से अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है।

मैहर क्षेत्र में सर्वाधिक पीडि़त

इस वर्ष  एड्स के करीब 77 रोगी मिल चुके हैं। खास बात यह है कि इसमें सबसे ज्यादा पीडि़त मैहर क्षेत्र में मिले हैं। यहां सर्वाधिक 24 पीडि़त मिले हैं। जबकि चित्रकूट में 20 रोगी सामने आए हैं। सतना व मैहर अस्पतालों में स्थित आईसीटीसी जांच केंद्रों की रिपोर्ट बताती है, महिला व पुरुषों के अनुपात में ज्यादा अंतर नहीं है। जनवरी से नवंबर तक आईसीटीसी सतना में 33 और मैहर के 24 लोगों में एचआईवी के लक्षण मिले हैं। दोनों केंद्रों पर 11 माह में तीस हजार से अधिक लोगों का परीक्षण किया गया।

सीडी-4 जांच सुविधा नहीं
एचआईवी काउंसलर नीरज तिवारी ने बताया कि आईसीटीसी सतना में एचआईवी संभावित की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद पीडि़त को सीडी-4 जांच के लिए रीवा भेजा जाता है। आईसीटीसी में एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल ट्रीटमेंट) की सुविधा उपलब्ध नहीं है। एआरटी सेंटर में मरीज का सीडी-4 टेस्ट किया जाता है। सीडी-4 काउंट तीन सौ के नीचे पाया जाता है तो मरीज का इलाज तुरंत शुरू हो जाता है। काउंट 300 से ज्यादा है तो हर तीसरे महीने जांच करानी होती है।

पूरा परिवार पीडि़त
जिले में आधा दर्जन परिवार एेसे हैं, जिनके सभी सदस्य एचआईवी पॉजिटिव हैं। इनमें 5 से 8 साल के मासूम भी शामिल हैं। इन परिवारों की जानकारी गोपनीय रखते हुए एड्स कंट्रोल सोसायटी द्वारा इलाज किया जा रहा है।

लाखों रुपए खर्च

जिले में एड्स को नियंत्रित करने के लिए अनेक अभियान चलाए जा रहे हैं। इनमें प्रतिवर्ष लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं। बावजूद इसके जागरुकता अभियान कागजों तक सीमित रह गए हैं।

बाहर से कमा कर लाए बीमारी
पीडि़तों में 95 फीसदी वे परिवार शामिल हैं, जो रोजगार की तलाश में दूसरे शहर गए और वहां से संक्रमित होकर वापस लौट आए। यानि इस तरह देखा जाए, तो वे नौकरी करने गए और बीमारी कमा कर लौटे। वहीं जानकारी के अभाव में ये रोग उनके माध्यम से परिवार में भी फैल गया।

हकीकत

597 जिले में एड्स रोगी
25 हजार से ज्यादा अब तक हुई जांच
03 एचआईवी जांच केंद्र
45 फीसदी महिलाएं पीडि़त        

समयावधि 2003 से 2016 तक

45 मरीज आए सामने 2015 में
07 अब तक कुल मौत
77 मरीज पॉजिटिव मिले 2016 में 

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