ऐसा है सीहोर जिले में शिक्षा का स्तर :  150 स्कूल शिक्षक विहीन, नहीं खुलते ताले

bharat pandey

Publish: Jul, 17 2017 12:23:00 (IST)

Sehore, Madhya Pradesh, India
ऐसा है सीहोर जिले में शिक्षा का स्तर :  150 स्कूल शिक्षक विहीन, नहीं खुलते ताले

शिक्षा सत्र शुरू होने के एक माह बाद भी नहीं हो सकी अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति

सीहोर।  जिले में शिक्षा का स्तर सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।शिक्षा के हालात यह हैं कि 150 स्कूलों में एक भी शिक्षक पदस्थ नहीं है, इन स्कूलों के ताले भी नहीं खुलते हैं।  अच्छी शिक्षा और व्यवस्थित शिक्षा देने के लिए सरकार ने भले ही हर तीन किमी के अंदर स्कूल खोल दिए हो, लेकिन शिक्षकों के नियुक्त नहीं किए जाने से बच्चों भविष्य जरूर अंधकार में हो रहा है।
15 जून से स्कूल का नवीन सत्र शुरू हुआ, लेकिन कई स्कूल ऐसे है। जिनमें अभी तक पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। जिले के 86 मिडिल और 61 प्राइमरी स्कूल में तो एक भी शिक्षक नहीं है।इन स्कूलों के ताले ही नहीं खुल रहे हैं।इसी तरह कई स्कूलों में शिक्षक है, लेकिन वह पढ़ाने ही नहीं पहुंच रहे हैं।  जिले में शिक्षा का स्तर सुधरने का नाम नहीं ले रहा है।

अभी तक नहीं रखे गए अतिथि शिक्षक
जिले में शिक्षकों के रिक्त पदों पर अतिथि शिक्षकों से काम चलाया जाता है, लेकिन अभी तक अतिथि शिक्षकों का भी पता नहीं है। पिछले साल 15 जून से अतिथि शिक्षकों को रख लिया गया था, लेकिन इस बार 15 जुलाईनिकलने के बाद भी शिक्षकों का पता नहीं है। गौरतलब हैकि जिले में प्राथमिक से लेकर हायर सेकंडरी तक शिक्षकों के नौ हजार  पद स्वीकृत हैं। इसमें से सात हजार पद भरे हुए हैं, जबकि दो हजार पद रिक्त हैं। शिक्षा विभाग का कहना है कि इसी लंबे समय से शिक्षकों के पद पर नियुक्तियां नहीं होने से स्कूलों में शिक्षा के हालात बिगड़ते जा रहे हैं।


ग्रामीण क्षेत्र में हालात काफी खराब
ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के हालात काफी खराब हैं। इनमें आष्टा ब्लाक की एमएस गादिया, लोहार, इछावर की मोयापानी, बुदनी की एमएस बोराना, इछावर की नवलपुर, दवपुरा, नसरुलागंज की एमएस कोटा, सीहोर की पीएस महेाडिय़ा, घाटी सहित अनेक शालाएं शामिल हैं। जबकि शहरी क्षेत्र की शालाओंं में कम बच्चों के बाद भी अधिक शिक्षक पदस्थ हैं। वहीं शिक्षा विभाग का तर्क है कि शून्य शिक्षिकीय स्कूलों में पास के स्कूलों के शिक्षकों को अटैच कर पढ़ाईकराई जा रही है।


अतिशेष शिक्षकों की सूची जारी नहीं की
युक्तिकरणकरण नीति के तहत शिक्षा विभाग द्वारा अतिशेष शिक्षकों की सूची शिक्षा सत्र शुरू होने के एक माह बाद भी जारी नहीं हो सकी है।शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा सत्र के पहले जारी अतिशेष शिक्षकों की सूची में  प्राथमिक स्तर के 442 और मिडिल स्तर के 605 अतिशेष शिक्षकों के नाम अतिशेष बताए थे, लेकिन सूची में कमियों के चलते निरस्त कर दिया गया था।इसके बाद दोबारा न सूची जारी हुई और न ही अतिशेष शिक्षकों को शून्य शिक्षिकीय स्कूलों में भेजा गया।

300 से अधिक स्कूल में एक ही शिक्षक   
जिले के तीन सौ से अधिक स्कूलों में एक ही शिक्षक पदस्थ है। एक शिक्षक के पदस्थ होने से वह पढ़ाई तो नहीं करवा पा रहा है। सिर्फ शिक्षा विभाग की बाबूगिरी करने में ही लगा हुआ है। स्कूल में कई प्रकार के काम शासन द्वारा दे दिए गए है, जिसमें समग्र, छात्रवृत्ति, गणवेश, मध्यान्ह भोजन सहित अन्य कार्यो में एक शिक्षक जुटा रहता है। इससे वह स्कूल में पढ़ाई नहीं करवा पाते है। शिक्षकों की कमी इस कदर है कि प्राइमरी स्कूल में एक शिक्षक कक्षा एक से लेकर पांचवी तक अकेला पढ़ा रहा है और कई मिडिल स्कूलों में एक शिक्षक कक्षा छठवीं से आठवीं तक की तीन कक्षाएं अकेले पढ़ा रहा है।


 युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया डीपीआईसे ही चल रही है।इसी तरह अतिथि शिक्षकों की प्रक्रिया भी ऑनलाइन चल रही है। शीघ्र ही व्यवस्था को अंतिम रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। अनिल कुमार वैद्य, , डीईओ सीहोर

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