यहां हिंदू परिवार में आज भी पढ़ी जाती है उर्दू में गीता और रामायण

Nitesh Tiwari

Publish: Oct, 19 2016 04:19:00 (IST)

Bhopal, Madhya Pradesh, India
यहां हिंदू परिवार में आज भी पढ़ी जाती है उर्दू में गीता और रामायण

भोपाल नवाबी रियासत से गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है। यहां हिन्दूओं के धार्मिंक ग्रंथ श्रीमद् भागवत गीता और रामायण उर्दू में भी पढ़े जाते हैं। 


चंद्रप्रकाश भारती/भोपाल. भोपाल नवाबी रियासत से गंगा-जमुनी तहजीब के लिए जाना जाता है। यहां हिन्दूओं के धार्मिंक ग्रंथ श्रीमद् भागवत गीता और रामायण उर्दू में भी पढ़े जाते हैं। इन्हें साल में एक बार रामनवमी पर कुल की पूजा के वक्त खोला जाता है। एक परिवार में तो इसके एक पाठ में निकलने वाले अध्याय के आधार पर साल गुजरता है। जिस तरह देश, अनेक धर्म, संस्कृति व बोली में बंटा हुआ है, उसी तरह पहले रियासतों में बंटा था। अब पार्टियों में बंटा हुआ है, लेकिन धार्मिंक भावनाओं की गंगा-जमुनी तहजीब इसमें आजादी के पहले भी थी। 


परिवार में अटूट आस्था
हिंदू होने के बावजूद इस परिवार के लोग ये ग्रंथ उर्दू में पढ़ते हैं। इन्हें परिवार का ग्रंथ मानकर वर्षों से संजोए भी हैं। साल में एक बार कुल की पूजा में इस किताब के किसी एक पाठ को किसी बालिका से खुलवाया जाता है। इसमें जो भी पाठ खुलता है, उसका इस परिवार पर सालभर असर भी दिखाई देता है। इस परिवार के सबसे बुजुर्ग 80 वर्षीय छोटे लाल भारती ने बताया कि देश में कई मुस्लिम रियासतें थी, जिसमें भोपाल, हैदराबाद, नखनऊ, जूनागढ़, कश्मीर आदि शामिल थे। इनमें उर्दू मुख्य भाषा होने के कारण वहां लोगों की मनोरंजन व धार्मिक ग्रंथ भी उर्दू में ही लिखे-पढ़े जाते थे। 

धर्म के प्रचार के लिए लेखकों ने इन्हें लिखा। हमारे परिवार के लिए यह ग्रंथ मार्गदर्शक है। साल में एक बार इसके अध्याय को खोलकर पढ़ा जाता है। गंगा-जमुनी तहजीब का उदाहरण यह भी है कि भोपाल नबाव हिंदूओं के दशहरा व होली जैसे मुख्य त्योहारों में भाग लेते थे। भोपाल का प्रथम दशहरा आयोजन का खर्चा भी नबावी रियासत वहन करती थी। इस परम्परा को आज प्रदेश सरकार भी निभा रही है। 


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